ब्रिटेन में तेजी से इस्लाम अपना रहे ईसाई बच्चे, मौलवी का दावा- ‘100 सालों में हर घर में होगा एक मुस्लिम’
ब्रिटेन में गोरे ईसाई बच्चे तेजी से इस्लाम की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। डेली मेल की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रिटेन में ईसाई धर्म के लोग बड़ी तादाद में इस्लाम अपना रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि इसमें एक बड़ी तादाद श्वेत ईसाई बच्चों की है।
सौ साल पहले ब्रिटेन में 10 हजार के लगभग मुस्लिम आबादी थी। लेकिन अब ये आबादी 40 लाख को पार कर गई है। डेली मेल की रिपोर्ट में बताया गया है कि यूके में पिछले छ वर्षों में इसकी संख्या में 37 फीसदी का इजाफा हुआ है। वर्तमान में ब्रिटेन में मस्जिदों की संख्या बढ़कर 1500 हो गयी है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे साल 2021 में सिर्फ 9 साल के बच्चे जिसका नाम रूडी है, ने इस्लाम अपना लिया था। इसके अलावा ब्रिटेन में एक और धर्मांतरण का केस जो कि खूब चर्चित रहा वो था ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर की साली की बेटी का।
टोनी ब्लेयर की साली लॉरेन बूथ, जो उनकी पत्नी की सौतेली बहन हैं ने साल 2010 में ईरान यात्रा के बाद इस्लाम अपना लिया था। वह एक पत्रकार है और हिजाब पहनती है। इतना ही नहीं, वह पांच वक्त की नमाजी भी है। लॉरेन बूथ की बेटी ने भी कुछ साल बाद इस्लाम अपना लिया। इस घटना को ब्रिटिश मस्जिदों एवं इस्लामी पोर्टल्स द्वारा खूब प्रचारित किया गया था।
बारह वर्षीय अलेग्जेंड्रा ने इस्लाम अपनाते हुए कहा था, "मेरी माँ का आभार, जिहोनें मुझे इस्लाम अपनाने के लिए दिशा दिखाई और इस्लाम में मतान्तरित होने से मुझे आत्मिक शांति एवं संतुष्टि मिली है और उसने यहाँ तक कहा था कि इस्लाम ने उसका जीवन आश्चर्यजनक रूप से बदल दिया है!"
रिपोर्ट में लिखा है- इंटरनेट सर्च इंजन में 'इस्लाम कन्वर्ट' टाइप करें और आपको इस धर्म को अपनाने वाले ब्रिटिश युवाओं की सैकड़ों क्लिप दिखाई देंगी। असंतुष्ट युवा ईसाइयों और अविश्वासियों द्वारा बड़े पैमाने पर धर्मांतरण की 'घटना' को प्रदर्शित करने के लिए मस्जिदों द्वारा कई पोस्ट किए गए हैं। इन बच्चों में से कुछ अभी भी प्राइमरी स्कूल में ही पढ़ते हैं।
7 अक्टूबर के बाद बढ़ी ऐसी घटना
रिपोर्ट में बताया गया है कि इजराइल पर हमास हमले के बाद ब्रिटेन में धर्म परिवर्तन की जैसे बाढ़ आ गई है। एक वीडियो का उल्लेख इस रिपोर्ट में है, जिसमें पिछले साल दिसंबर महीने में लन्दन में फिलिस्तीन के समर्थन में होने वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक दस वर्षीय बच्चे को एक फुटपाथ पर इस्लाम अपनाते हुए दिखाया जा रहा है।
इसमें उस बच्चे से इस्लामिक मौलवी कहता है कि 'हर शख्स जन्म से मुसलमान होता है। हमारा मुख्य उद्देश्य जन्नत है, हम कभी नहीं मरेंगे।' इस वीडियो में वह बच्चा अपने पिता के साथ खड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार उस बच्चे के पिता ने पच्चीस वर्ष पहले इस्लाम अपना लिया था, मगर मजहबी तालीम का पालन नहीं किया था और वह चर्च में प्रार्थना के लिए जाता था। उसके अनुसार उसने अपने बच्चे को प्रोत्साहित किया और उसने इस्लाम अपना लिया।
इस रिपोर्ट में लेविस्हम इस्लामिक सेंटर का भी उल्लेख है। ये सेंटर दक्षिण पूर्व लंदन में है और बच्चों का धर्म परिवर्तन करने के लिए जानी जाती है। इस चर्चा का मुख्य इमाम शकील बेग एक प्रभावशाली वक्ता है। उसने 7 अक्टूबर को हमास द्वारा इजराइल पर हुई हैवानियत का स्वागत किया था।
शकील बेग ने इस हमले को गाजा के लोगों की विजय बताते हुए कहा था कि फिलीस्तीन के लोगों, गाजा के लोगों के इस संघर्ष का स्वागत किया जाना चाहिए और उन्हें अपना समर्थन देना चाहिए कि वह अपने दुश्मनों को नष्ट कर सकें और उनके टुकड़े-टुकड़े कर सकें।
शकील बेग ने ये भी दावा किया था कि पश्चिम और इजराइल यह झूठ कह रहे हैं कि मुस्लिमों ने इजरायल में निर्दोष बच्चों को मारा है। बेग को जब बीबीसी ने एक बार चरमपंथी कहा था तो उसने चैनल पर ही मुकदमा कर दिया था। हालांकि कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। जज ने उसके बारे में कहा था कि वह छोटे बच्चों के दिलों में नफरत और कट्टरता का बीज बो रहा है।
एक इस्लामिक चैनल पर इमाम शकील बेग ने कहा था कि उसने लगभग 30,000 लोगों को पिछले दो दशकों में इस्लाम अपनाने में मदद की है, इसमें से 2 बच्चे भी थे जो सिर्फ 8 साल के थे। बेग ये दावा करता है कि लोग सत्य की तलाश कर रहे हैं... आध्यात्मिक मार्गदर्शन चाहते हैं जो कि उन्हें इस भौतिकवादी दुनिया में नहीं मिल रहा है जिसमें हम रह रहे हैं। उन्हें इस्लाम में जवाब और समाधान मिल रहे हैं।
बरकतुल्ला पॉडकास्ट में, बेग कहते हैं कि उनकी मस्जिद हर हफ्ते उन राहगीरों को कुरान की 30 से 40 प्रतियां दे रही है जो अंदर आते हैं और उनकी मांग करते हैं। इनमें से कई गैर-मुस्लिम हैं।
हर घर में होगा एक मुसलमान
जब बेग से पूछा गया कि वह 100 वर्षों में भविष्य को कैसे देखते हैं, तो इमाम ने कहा कि ब्रिटेन में हर घर में कोई न कोई मुस्लिम होगा, 'एक बेटी, बेटा, एक चचेरा भाई या एक चाची अगर अल्लाह ने चाहा तो तब तक लगभग सारी आबादी इस्लाम में शामिल हो जाएगी।'
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मस्जिदों ने यह तक कहा है कि वह इस्लाम में आने वाले हर युवा और बच्चे का स्वागत करते हैं फिर चाहे वह टैटू बनाए हुए हों या फिर अजीबोगरीब कपडे ही क्यों न पहने हों। बच्चों के इस्लाम अपनाने के पीछे एक कारण मुस्लिम बच्चों का स्कूल्स में पांच बार नमाज पढ़ना और एक अनुशासित जीवन जीना होता है।
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