अमेरिका के सामने भारत को लेकर शर्त! तालिबान 'प्रेम' में इमरान खान उठाने वाले हैं बहुत बड़ा कदम?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को संयुक्त राज्य अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह 20 साल की लड़ाई के बाद अफगानिस्तान में बर्बादी फैलाकर अब पाकिस्तान की मदद चाहता है।

इस्लामाबाद, अगस्त 12: तालिबान प्रेम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बहुत बड़ा कदम उठा सकते हैं। पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से बड़ा दावा किया जा रहा है। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर से अमेरिका को ब्लैकमेल करने की कोशिश की है। इमरान खान ने अफगानिस्तान की बर्बादी के लिए एक बार फिर से अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की है। इसके साथ ही तालिबान को लेकर बहुत बड़ा कदम लेने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने भारत को लेकर शर्त रख दी है।

अमेरिका पर बड़ा आरोप

अमेरिका पर बड़ा आरोप

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को संयुक्त राज्य अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह 20 साल की लड़ाई के बाद अफगानिस्तान में बर्बादी फैलाकर अब पाकिस्तान की मदद चाहता है। इमरान खान ने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान में अमेरिका ने ही इतनी बर्बादी फैलाई है और अब अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान इस 'मलबे' को साफ करे। इमरान खान ने अमेरिका पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि ''वॉशिंगटन इस्लामाबाद पर भारी दवाब बना रहा है कि अफगानिस्तान में 'मायावी शांति समझौता' करवाने के लिए, तालिबान से बातचीत के लिए पाकिस्तान एक मध्यस्थ की भूमिका अदा करे, क्योंकि अफगानिस्तान सरकार और 'विद्रोहियों' (तालिबान) के बीच बातचीत रूक गई है, और अफगानिस्तान में हिंसा तेजी से बढ़ती जा रही है।

''परेशानी में ही पाकिस्तान की याद''

''परेशानी में ही पाकिस्तान की याद''

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि ''पाकिस्तान को किसी तरह की गड़बड़ी को सुलझाने में ही उपयोगी माना जाता है और अमेरिका मानता है कि उसने 20 सालों में अफगानिस्तान में जो 'गड़बड़ी' फैलाई है, उसका समाधान पाकिस्तान करे।'' इमरान खान ने कहा कि ''20 साल तक अफगानिस्तान में सैन्य समधान खोजने की कोशिश में शांति समधान बहुत पीछे छूट गया है''। माना जा रहा है कि इमरान खान का ये बयान एक बार फिर से अमेरिका को ब्लैकमेल करने की कोशिश है, वहीं पाकिस्तान मीडिया के एक तबके ने दावा करना शुरू कर दिया है कि पाकिस्तान तालिबान को जल्द मान्यता देने की कोशिश में है। आपको बता दें कि 2001 में तालिबानी सरकार को उखाड़ फेंकने के 20 साल बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपनी सेना को बाहर निकालने का फैसला किया और जब अमेरिकी फौज ने अफगानिस्तान की धरती को छोड़ना शुरू किया, उसके बाद से तालिबान काफी तेजी से अपना विस्तार कर रहा है और अब तक करीब 9 प्रांतों की राजधानियों पर तालिबान कब्जा जमा चुका है।

भारत से जले इमरान खान

भारत से जले इमरान खान

अफगानिस्तान में भारी हिंसा के बीच पश्चिमी देशों की सरकारें और अफगानिस्तान की सरकार लगातार कह रही है कि तालिबान को पाकिस्तान का पूरा समर्थन हासिल है और पाकिस्तान ही तालिबान को हथियार, सैन्य मदद और खाने की सप्लाई कर रहा है। जबकि, पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है। जिसको लेकर इमरान खान ने सफाई देते हुए कहा कि इस्लामाबाद अफगानिस्तान में पक्ष नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि ''मुझे लगता है कि अमेरिकियों ने फैसला किया है कि भारत अब उनका रणनीतिक साझेदार है, और मुझे लगता है कि इसीलिए अब पाकिस्तान के साथ व्यवहार करने का उनका तरीका बदल गया है''

भारत को लेकर रखी शर्त?

भारत को लेकर रखी शर्त?

इमरान खान ने अमेरिका को तालिबान के नाम पर ब्लैकमेल करते हुए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का इस्तीफा मांग लिया है। इमरान खान ने कहा कि ''जब तालिबान के नेता पाकिस्तान आए थे तो उन्हें मनाने की कोशिश हमने की थी, लेकिन उन्हें राष्ट्रपति अशरफ गनी का इस्तीफा चाहिए और वो इससे कम पर तैयार नहीं है''। आपको बता दें कि अशरफ गनी लगातार आरोप लगा रहे हैं कि पाकिस्तान पूरी तरह से तालिबान को समर्थन कर रहा है। इसके साथ ही इमरान खान ने कहा कि ''अमेरिका भारत के साथ है और भारत-पाकिस्तान एक दूसरे के प्रतिद्वंदी हैं और दोनों देशों के बीच इस वक्त डिप्लोमेटिक संबंध न्यूनतम है''। यानि, इमरान खान ने अमेरिका को साफ कहा है कि वो अगर अफगानिस्तान में शांति चाहता है तो उसे भारत के साथ अपने संबंध को कम करना पड़ेगा।

पाकिस्तान उठाएगा बड़ा कदम ?

पाकिस्तान उठाएगा बड़ा कदम ?

पाकिस्तानी मीडिया के एक बड़े हिस्से ने दावा करना शुरू कर दिया है कि जैसे ही तालिबान काबुल पर नियंत्रण स्थापित करता है, ठीक वैसे ही पाकिस्तान उसे मान्यता दे देगा। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान से ऐसे संकेत मिले हैं कि इमरान खान सरकार उभरते तालिबान को जल्द से जल्द मान्यता देने की कोशिश कर रहा है। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के बयानों के हवाले से लिखा है कि ''ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान में कम अफरा-तफरी के साथ जल्द से जल्द सत्ता का हस्तांतरण तालिबान के हाथ में हो जाए''। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान इस बात के लिए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी की आलोचना कर रहा है कि वो तालिबान के रास्ते में 'बाधा' बन रहे हैं।

भारत पर पाकिस्तान का निशाना

भारत पर पाकिस्तान का निशाना

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की सरकार और पाकिस्तान की मीडिया लगातार इसलिए भारत को निशाने पर ले रही है कि भारत अफगानिस्तान सरकार को समर्थन करता है। पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि अशरफ गनी सरकार को समर्थन देकर अफगानिस्तान की स्थिति को भारत और जटिल बना रहा है। हालांकि, पाकिस्तान के कई रक्षा विशेषज्ञ सरकार को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तालिबान को मान्यता दी गई तो आने वाले वक्त में पाकिस्तान के लिए कई खतरे पैदा हो सकते हैं। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि वैसे तो पाकिस्तान की सरकार अलग अलग प्लेटफॉर्म पर दावा करती है कि अफगानिस्तान में उसका कोई 'पसंदीदा' नहीं है, लेकिन मंत्रियों के आधिकारिक बयानों से प्रतीत होता है कि वो तालिबान को तवज्जो दे रहे हैं।

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