ग्लेशियरों से सिर्फ 10 साल में पिघल गए 680 अरब हाथी के बराबर बर्फ, सबसे बड़ा कारण जानिए
ग्लेशियर पिघलने को लेकर एक नया शोध सामने आया है। इसके अनुसार सिर्फ एक दशक में दुनिया के ग्लेशियरों का 2 फीसदी हिस्सा पिघल चुका है। क्योंकि, हवा का तापमान ज्यादा है।

जलवायु परिवर्तन की समस्या गंभीर होती जा रही है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। लेकिन, इसका रूप कितना भयंकर हो सकता है, वह एक नए शोध में सामने आया है। बीते 10 वर्षों में ही दुनिया का 2 फीसदी ग्लेशियर नष्ट हो चुका है। अगर इतने ग्लेशियर को वजन के रूप में देखें तो यह 680 अरब हाथियों के बराबर है।

जलवायु परिवर्तन के चलते पिघल रहे हैं ग्लेशियर
जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया में जो तापमान बढ़ रहा है, उसका सबसे बुरा असर ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। वह बहुत ही ज्यादा तेजी से पिघल रहे हैं, जिसको लेकर कई रिपोर्ट आ चुकी हैं कि आने वाले वर्षों में विश्व के कई तटवर्ती शहर समुद्र में समा सकते हैं। लेकिन, एक नई रिपोर्ट इसकी भयानकता की गंभीरता जाहिर कर रही है।

680 अरब हाथियों के वजन के बराबर ग्लेशियर 10 साल में पिघला
पता चला है कि दुनिया भर में जितने भी ग्लेशियर हैं, उनमें से 680 अरब हाथियों के वजन के बराबर बर्फ महज एक दशक में नष्ट हो चुके हैं। यह कितनी विशाल मात्रा है, यह इससे समझा जा सकता है कि एक एशियाई हाथी का वजन लगभग 4,000 किलो होता है।

एक दशक में 2,720 गीगाटन ग्लेशियर पिघले
वैसे तो बर्फ पिघलने की घटनाओं को लेकर सबसे ज्यादा अंटार्कटिक और ग्रीनलैंड चिंता बढ़ाते हैं। लेकिन, दुनिया भर में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बर्फ तेजी से पिघलते जा रहे हैं। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2010 से लेकर 2020 के बीच विश्व के ग्लेशियर से 2,720 गीगाटन बर्फ पिघल चुके हैं। यह मात्रा दुनिया के कुल ग्लेशियर का 2 फीसदी है।

ग्लेशियर पिघलने का सबसे बड़ा कारण क्या है?
इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने यूरोपियन स्पेस एजेंसी के CryoSAT सैटेलाइट का इस्तेमाल किया है। इससे जानकारी मिली है कि हवा का उच्च तापमान दुनिया के ग्लेशियरों से 89% बर्फ पिघलने के लिए जिम्मेदार है। यह शोध जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।

रिसर्च पेपर के अनुसार समुद्र तल की बढ़ोतरी में ग्लेशियर के पिघलने का योगदान सबसे ज्यादा है। इसके मुताबिक, 'ग्लेशियर बर्फ घटने के कारकों को लेकर यह शोध एक वैश्विक तस्वीर पेश करता है। नतीजे संकेत देते हैं कि विश्व में सभी बर्फ नष्ट होने का करीब 90% इसके वायुमंडल से संपर्क के कारण है....। '
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एशिया में 1.3 अरब से ज्यादा लोगों को पानी मिलता है
बर्फ की सतह की ऊंचाई को मापने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने CryoSAT सैटेलाइट पर लगे रडार अल्टीमीटर का इस्तेमाल किया। एशिया में ग्लेशियर से 1.3 अरब से ज्यादा लोगों को पानी उपलब्ध होता है और यह कई महत्वपूर्ण उद्योंगों के लिए एक प्रमुख संसाधन है।
अभी ग्रीनलैंड और अंटार्कटिक से अलग ग्लेशियर ज्यादा पिघल रहे
ग्लेशियर पिघलते रहने से समुद्र का तल बढ़ता रहेगा, तो तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ के हालात बनेंगे। समय के साथ यह समस्या भयावह रूप धारण करेगी, ऐसी बातें कई सारी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में सामने आ चुकी हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी जो बर्फ समुद्र तल को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं, वह ग्रीनलैंड और अंटार्कटिक से अलग हैं और यह स्थिति इस सदी के अंत तक बनी रह सकती है।

असल में हो क्या रहा है?
एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के नोएल गौरमेलन ने एक बयान में कहा है, 'मुझे यकीन है कि अधिकतर लोगों ने विभिन्न समय पर खींची गई तस्वीरों को देखा होगा, जो दिखाती हैं कि वक्त के साथ एक ग्लेशियर टर्मिनस कैसे खत्म हो गया है। और यह हम सैटेलाइट तस्वीरों से भी देख सकते हैं। लेकिन, हमारे लिए यह जरूरी है कि ग्लेशियर की मात्रा कैसे बदल रहा है, ताकि स्थापित किया जा सके कि असल में हो क्या रहा है।'












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