Vladimir Putin: व्लादिमीर पुतिन अपने विरोधियों को कैसे कुचलते हैं, जानिए सत्ता के लिए किस हद तक जा चुके हैं...

Vladimir Putin Story: व्लादिमीर पुतिन, दुनिया का वो रहस्यमयी नेता, जो लोगों के बीच रहकर भी अपने तिलिस्म से हैरानी पैदा करता रहता है। व्लादिमीर पुतिन के बारे में कई किस्से-कहानियां लोग एक दूसरे को सुनाते हैं, जैसे पुतिन पैदा नहीं हुए थे, जैसे पुतिन कभी मरेंगे नहीं और जैसे, पुतिन आसमान से उतरा कोई अवतार है।

पुतिन अपनी जिंदगी को लेकर वाकई सस्पेंस रखते हैं, जैसे आजतक उनकी पत्नी, गर्लफ्रेंड या फिर बच्चों के बारे में किसी को ठीक-ठीक जानकारी नहीं है। लिहाजा पुतिन के बारे में जानने की दिलचस्पी हमेशा से लोगों को बनी रहती है। शनिवार को जब वैगनर समूह ने पुतिन के खिलाफ विद्रोह किया, तो एक बार फिर पुतिन की कहानी याद आने लगी, कि रूस का यह 'राजा' कैसे अपने विरोधियों और बगावत करने वालों को कुचलने के लिए कुख्यात रहा है।

vladimir putin

जासूसों के जासूस रहे हैं पुतिन

रूस की जासूसी एजेंसी केजीबी, जो अपने सीक्रेट ऑपरेशंस की वजह से कुख्यात रही है, व्लादिमीर पुतिन उसके बॉस रह चुके हैं। लिहाजा, केजीबी के बॉस रहने से लेकर क्रेमलिन में उदय, यूक्रेन पर आक्रमण और एक एक कर तमाम विरोधियों को कुचलने के लिए व्लादिमीर पुतिन हमेशा से पश्चिमी देशों के निशाने पर रहे हैं।

अगस्त 1999 में, सोवियत संघ के पतन के बाद रूस के पहले राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने एफएसबी सुरक्षा सेवा (पूर्व नाम- केजीबी) के पूर्व प्रमुख व्लादिमीर पुतिन को अपना प्रधानमंत्री बना लिया।

पांच महीने से भी कम समय के बाद, राष्ट्रपति येल्तसिन ने शराब की लत और बीमारी की वजहग से रूस की सत्ता को संभालने लायक नहीं रहे और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। जिसके बाद उनके उत्तराधिकारी बने व्लादिमीर पुतिन। येल्तसिन के इस्तीफा देने के बाद पुतिन को रूस का कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया और उसके बाद उन्होंने मार्च 2000 के चुनाव में राष्ट्रपति चुनाव जीतकर लोगों की मतों के आधार पर देश के राष्ट्रपति बने।

चेचन्या विरोधियों का कर दिया सफाया

राष्ट्रपति बनने के शुरूआती समय में ही अगस्त 2000 में पहली बार पुतिन की परीक्षा आ गई, जब परमाणु ऊर्जा से चलने वाली रूस की एक पनडुब्बी कुर्स्क 118 चालक दल के सदस्यों के साथ बैरेंट्स सागर में डूब गई। इस आपदा पर पुतिन की मौन प्रतिक्रिया की भारी आलोचना की गई।

अक्टूबर 2002 में, चेचन विद्रोहियों ने मॉस्को में एक थियेटर पर हमला किया और उस वक्त फिल्म देख रहे 800 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया। इस घटना में 130 लोग मारे गये थे। इस घटना के ठीक दो साल बाद, उत्तरी ओसेशिया के उत्तरी काकेशस गणराज्य में बेसलान के एक स्कूल में बंदूकधारियों ने 1,000 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया। सुरक्षा बलों ने इमारत पर धावा बोल दिया, जिससे लड़ाई शुरू हो गई जिसमें 186 बच्चों सहित 330 लोग मारे गए थे।

जिसके बाद पुतिन ने चेतन्या विरोधियों को कुचलने का काम शुरू कर दिया।

थियेटर में खूनी खेल खेलने वाले चेचन्या विरोधियों को कुचलने के लिए पुतिन के आदेश पर रूसी सुरक्षा बल थियेटर के अंदर घुसे थे और सभी आतंकवादियों को मार गिराया थआ। हालांकि, इसमें 130 आम लोग मारे गये थे। इसके लिए पुतिन का भारी आलोचना की गई थी, कि उन्होंने आतंकवादियों से कोई बात नहीं की।

उत्तरी काकेशस गणराज्य को चेचन्या कहा जाता है, जो मुस्लिम बहुल इलाका है और रूस 1994 से 96 के बीच यहां लड़ाई लड़ चुका है। जिसके बाद रूसी राष्ट्रपति ने चेचन्या के विद्रोहियों को कुचलने के लिए ऑपरेशन चलाया और साल 2009 तक चले दूसरे चेचन युद्ध में हजारों लोग मारे गये। रूस ने चेचन्या की राजधानी ग्रोज़नी को पूरी तरह से तबाह कर दिया। फिर पुतिन ने चेचन्या में एक कठपुतली सरकार की स्थापना की, जो आज तक उनका 'गुलाम' है।

2004 में फिर चुने गये राष्ट्रपति

साल 2004 में दोबारा चुने जाने के बाद पुतिन ने सत्ता पर अपनी पकड़ पूरी तरह से मजबूत कर ली और सुरक्षा सेवाओं को मजबूत करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुतिन ने रूसी मीडिया पर नकेल कस दिया। पुतिन अपने पहले कार्यकाल में ही सत्ता कैसे चलाना है, इसकी बारीकियां सीख गये थे।

दूसरी बार सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपने विरोधियों का सफाया करना शुरू कर दिया। उन्होंने रूस के सबसे अमीर शख्स मिखाइल खोदोरकोव्स्की जैसे कुलीन वर्गों को सत्ता से हमेशा के लिए दरकिनार कर दिया, जिन्हें तेल की दिग्गज कंपनी युकोस के सीईओ पद से हटा दिया गया और टैक्स धोखाधड़ी सहित कई आरोपों में 2005 में जेल में डाल दिया गया।

साल 2006 में, पत्रकार और शासन के प्रबल आलोचक अन्ना पोलितकोवस्काया की हत्या कर दी गई और लंदन में पूर्व रूसी जासूस अलेक्जेंडर लिट्विनेंको को घातक जहर देकर मार दिया गया। हालांकि, पुतिन ने इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जारी रखा, लिहाजा देश के अंदर जनता उनके शासन से खुश थी। आर्थिक मोर्च पर रूस अच्छा कर रहा था और इसकी सबसे बड़ी वजह तेल था।

संविधान को अपनी मर्जी से बदला

व्लादिमीर पुतिन पहले भी रूस के संविधान को कई बार अपनी मर्जी से बदल चुके हैं और इसके लिए उनकी सख्त आलोचना भी होती है लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। व्लादिमीर पुतिन का कार्यकाल 2024 में खत्म होने वाला था, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने संविधान में बदलाव कर दिया। व्लादिमीर पुतिन रूस में ऐसी व्यवस्था कर चुके हैं, कि जब तक वो रहेंगे, देश के राष्ट्रपति बने रहेंगे।

राष्ट्रपति बनने का क्या था नियम

व्लादिमीर पुतिन साल 2000 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करते हुए रूस के राष्ट्रपति के तौर पर कमान संभाली थी। इसके बाद वो 2004 में फिर से राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत गये। रूसी संविधान के मुताबिक कोई भी शख्स तीसरी बार लगातार राष्ट्रपति नहीं बन सकता है।

लिहाजा 2008 में व्लादिमीर पुतिन रूस के प्रधानमंत्री बन गये। उस वक्त दिमित्री मेदवेदेव रूस के राष्ट्रपति थे। साल 2012 में एक बार फिर से व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति बन गये और 2008 के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव 2012 में रूस के प्रधानमंत्री बन गये। 2012 में व्लादिमीर पुतिन पूरे 6 सालों के रूस के लिए राष्ट्रपति बने। फिर व्लादिमीर पुतिन 2018 में रूस के राष्ट्रपति बने और अब 2024 में उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है। लेकिन, उससे पहले ही उन्होंने रूस के संविधान में संशोधन कर दिया है।

पड़ोसी देशों को धमकाते रहते हैं पुतिन

अगस्त 2008 में, रूसी सेना ने दक्षिण ओसेशिया और अबकाज़िया के अलग हुए क्षेत्रों को मजबूत करने और जॉर्जिया के पश्चिमी समर्थक नेतृत्व को कमजोर करने के लिए, पूर्व सोवियत गणराज्य जॉर्जिया में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया। साल 2008 में रूस ने जॉर्जिया पर हमला कर दिया। पांच दिवसीय युद्ध में दोनों पक्षों के सैकड़ों लोग मारे गए, जिनमें कई नागरिक भी शामिल थे।

इस लड़ाई के बाद मॉस्को ने जॉर्जिया से दक्षिण ओसेशिया और एक अन्य अलगाववादी इलाके, अब्खाज़िया को अलग कर दिया और इन दोनों क्षेत्रों के स्वतंत्र राज्यों के रूप में मान्यता दे दी। यही काम पुतिन ने यूक्रेन में भी किया है।

राजनीतिक विरोधियों पर भी रहम नहीं

साल 2015 में पुतिन के प्रमुख आलोचक और देश के पूर्व उप प्रधान मंत्री बोरिस नेमत्सोव को क्रेमलिन के बाहर गोली मार दी गई।

वहीं, साल 2018 में, रूस के पूर्व डबल एजेंट सर्गेई स्क्रीपाल को इंग्लैंड में जहर देकर मार दिया गया। तो साल 2020 में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने वाले रूस के विपक्षी नेता, एलेक्सी नवलनी को भी एक फ्लाइट में जहर दे दिया गया। वो फ्लाइट जर्मनी जा रही थी और जर्मनी के अस्पताल में नवेलनी को भर्ती कराया गया। कई महीनों तक अस्पताल में रहने के बाद जब साल 2021 में एलेक्सी नवेलनी रूस लौटे, तो मॉस्को एयरपोर्ट पर ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा सुना दी गई।

व्लादिमीर पुतिन के ज्यादातर राजनीतिक विरोधी अब रूस के बाहर रहते हैं, वहीं देश के अंदर के राजनीतिक विरोधी मुंह बंद कर रहते हैं और जिंदा रहते हुए पुतिन के ज्यादातर कार्यों में हां में हां मिलाते हैं।

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