तालिबान के 60 हजार लड़ाकों के सामने आखिर कैसे घुटने टेकने पर मजबूर हो गई 3 लाख अफगान सैनिकों की सेना, जानें
आज तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। तालिबान के इतनी शक्ति से उभरने की दो वजहें बिल्कुल साफ हैं।
काबुल, 18 अगस्त। आज तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। तालिबान के इतनी शक्ति से उभरने की दो वजहें बिल्कुल साफ हैं। एक तो अमेरिका के साथ हुई डील में उन्हें इस बात का भरोसा मिल गया था कि अमेरिकी सेना से अब उन्हें कोई खतरा नहीं है और दूसरी ये कि बीते 20 सालों में अमेरिका ने अफगान सेना को पैसा और ट्रेनिंग देकर तैयार किया है वो कम से कम इस काबिल तो नहीं है कि तालिबान का मुकाबला कर सके।

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अमेरिका और अफगान फौज पर उठ रहे सवाल
तालिबान के पूरे देश पर कब्जे के बीच आज अमेरिका और अफगानिस्तान फौज की काबीलियत पर उठ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि तालिबान अफगान सेना का मुकाबला नहीं कर सकते। हमने उन्हें बेहतर ट्रेनिंग दी है।
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अमेरिका ने 3 लाख अफगान सैनिकों को किया तैयार
अमेरिका ने तकरीबन 3 लाख अफगान सैनिकों को ट्रेनिंग दी है, जबकि तालिबान के पार कुल 35 हजार लड़ाकों की फौज होने की बात कही जा रही है। स्लीपर सेल और कुछ अन्य सहयोगियों को मिला दें तो यह आंकड़ा 60 हजार के पार नहीं जाता। इसके बाद भी उन्होंने पूरे देश को नियंत्रण में लिया है तो इसकी वजह साफ है। तालिबान न सिर्फ अफगानिस्तान की एक-एक इंज जमीन बल्कि वहां के कबीलों और उनकी परंपराओं, जरूरतों और अर्थव्यवस्था से वाकिफ है। अमेरिका, रूस, या चीन के रहमो करम पर अफगानिस्तान नहीं चलेगा। अफगान लोगों को अपना मुस्तकबिल अपने हाथों में लेना होगा और जब तक ऐसा नहीं होता तालिबान आते जाते रहेंगे और दुनिया तमाशबीन बनी रहेगी।
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