कैसे सुषमा स्वराज ने पीएम मोदी के आने से पहले देश को दिलाई कूटनीतिक कामयाबी
वाशिंगटन। पीएम नरेंद्र मोदी के अमेरिका पहुंचने से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अमेरिका में थी। यहां पर वाशिंगटन में उन्होंने अमेरिकी विदेश सचिव जॉन कैरी के साथ मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अमेरिका और भारत की ओर से संयुक्त बयान जारी किया गया। इस बयान के जरिए अमेरिका से भारत ने पाक को एक कड़ा संदेश दिया है।

पाकिस्तान के साथ पिछले माह विदेश सचिव स्तर की वार्ता कैंसिल होने के बाद यह दूसरा मौका था जब सुषमा ने पाक के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। पिछली बार की ही तरह इस बार भी उन्होंने साफ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस बार सुषमा ने न सिर्फ पाक में मौजूद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का जिक्र किया बल्कि अमेरिका के लिए खतरा बन चुके हक्कानी नेटवर्क की याद भी अमेरिका को दिलाई।
सुषमा और केरी के बीच हुई मुलाकात के बाद अमरीका ने साझा बयान में भारत के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का वादा किया है। सुषमा ने कैरी के साथ मुलाकात में पाक में पनप रहे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हक्कानी नेटवर्क का भी जिक्र किया। साथ ही इस मुलाकात में मुंबई हमलों का भी जिक्र हुआ।
सुषमा ने केरी के साथ मीटिंग में लश्कर और हक्कानी के साथ ही बाकी आतंकी समूहों को भी दक्षिण एशिया के लिए बड़ा खतरा बताया गया। न सिर्फ इतना बल्कि उन्होंने पाक में बैठे मुंबई हमलों के जिम्मेदार लोगों को सजा दिए जाने की मांग के मुद्दे पर भी चर्चा हुई थी।
पीएम मोदी के अमेरिका पहुंचने से पहले भारत और अमेरिका का यह साझा बयान रणनीतिक मोर्चे पर तो भारत की जीत है ही साथ ही कूटनीतिक तौर पर भी एक सफलता माना जा सकता है। सुषमा के साथ कैरी की मीटिंग के बाद अमेरिका ने भी इस बात का अहसास किया है कि पाक में मौजूद आतंकी संगठन दक्षिण एशिया के साथ ही अमेरिका के लिए भी खतरा बन सकते हैं।
अमेरिका और भारत के इस साझा बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने के लिए सहमति जताई है। दोनों देश मानने लगे हैं कि पाक के सुरक्षित ठिकानों से गतिविधियां चला रहे लश्कर-ए-तैयबा और बाकी गुट काफी खतरनाक हैं।












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