विपक्ष का इस्तीफा... आक्रामक इमरान... बदहाल अर्थव्यवस्था, कब तक टिकेगी पाकिस्तान में शहबाज सरकार?

शहबाज शरीफ के सामने अमेरिका, भारत, सऊदी अरब के साथ संबंधों को बेहतर करने की चुनौती है, तो इमरान खान जनता को ये बता रहे हैं, कि शहबाज शरीफ अमेरिका के 'गुलाम' हैं।

इस्लामाबाद, अप्रैल 16: पाकिस्तान के 23वें प्रधानमंत्री बनने के लिए संसद से बहुमत हासिल करने के बाद सांसदों को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ अमेरिका, चीन और भारत को सकारात्मक संकेत भेज रहे हैं। लेकिन सवाल पहले से ही घूम रहे हैं कि उनकी नवगठित सरकार कब तक चलेगी? ये सवाल इसलिए भी हैं, क्योंकि इमरान खान के सभी सांसदों ने संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और पूर्व प्रधानमंत्री अब चुनाव की मांग कर रहे हैं और दूसरी तरफ शहबाज शरीफ फिलहाल चुनाव करवाने के मूड में नहीं हैं।

शहबाज सरकार का भविष्य

शहबाज सरकार का भविष्य

अपनी विदेश नीति के लक्ष्यों को परिभाषित करते हुए पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि, उनकी नई सरकार शांति, सुरक्षा और विकास के साझा लक्ष्यों के लिए अमेरिका के साथ काम करेगी। उन्होंने चीन के साथ अच्छे संबंधों के महत्व पर भी जोर दिया और द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर करने के लिए पिछली सरकार की आलोचना भी की। शहबाज शरीफ ने कहा, "यह दोस्ती स्थायी है और मेरी सरकार चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर प्रगति करेगी।" शहबाज शरीफ की कोशिश चीन के साथ संबंधों को फिर से सुधारने की है, जो इमरान खान सरकार में पटरी से उतर गई थी और चीन ने भी शहबाज शरीफ सरकार में विश्वास जताया है और उन्हें इमरान खान से बेहतर बताया है।

अमेरिका से कैसे सुधरेंगे संबंध?

अमेरिका से कैसे सुधरेंगे संबंध?

विश्लेषकों का कहना है कि शहबाज शरीफ को अमेरिका के साथ संबंधों में सुधार के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे, जो पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में काफी निचले स्तर पर पहुंच गया था, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि विपक्षी दलों के साथ मिलीभगत करके अमेरिका ने उनकी सरकार को गिराया था। वहीं, इमरान खान अभी भी लगातार अमेरिका पर अपनी सरकार को गिराने का आरोप लगा रहे हैं और रैलियों में खुले तौर पर शहबाज शरीफ और तमाम पार्टियों को 'अमेरिका का गुलाम' कह रहे हैं। इमरान खान के आक्रामक रवैये ने पहली बार पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी को पाकिस्तान की सेना और आईएसआई के खिलाफ खड़ा कर दिया है, लिहाजा अब पाकिस्तानी आर्मी भी बैकफुट पर है और अमेरिका के साथ कैसे संबंधों को फिर से सुधारा जाए, इसके लिए माथापच्ची जारी है।

पाकिस्तानी सेना पर ही सवाल

पाकिस्तानी सेना पर ही सवाल

विश्लेषकों का कहना है कि, इमरान खान ने भारतीय विदेश नीति की जमकर तारीफ कर पाकिस्तानी सेना को ही ब्लैकमेल करने की कोशिश की और जब इमरान खान ने लगातार जोर देकर कहा, कि अमेरिका उन्हें सत्ता से बाहर करना चाहता है, क्योंकि उन्होंने अमेरिका को पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों तक पहुंचने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, तो उनका इशारा पाकिस्तानी सेना की तरफ था। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के एक सीनेटर और सीनेट की रक्षा समिति के अध्यक्ष मुशाहिद हुसैन सैयद ने एशिया टाइम्स से बात करते हुए कहा कि, "अमेरिका के साथ संबंधों के संबंध में वास्तव में पिछले महीने जो हुआ, वह एक अस्थाई अलगाव था, पिछले शासन के कार्यकाल के अंत में पाकिस्तान-अमेरिकी संबंधों में जो कुछ भी हुआ है, उसका स्थाई प्रभाव नहीं होना चाहिए।' नवाज शरीफ के सीनेटर ने उम्मीद जरूर जताई है, लेकिन क्या ये इतना आसान है? क्योंकि, नवाज शरीफ को भी देश की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए आईएमएफ से लोन चाहिए और आईएमएफ पर अमेरिका का वर्चस्व है और अगर शहबाज शरीफ अमेरिका से तालमेल बिठाने में विफल रहे, तो फिर उनके लिए सरकार चलाना टेढ़ी खीर साबित होगा।

क्या अमेरिका से मिलेगी माफी?

क्या अमेरिका से मिलेगी माफी?

इमरान खान ने आरोप लगाते हुए कहा था, कि अमेरिका ने धमकी दी है, कि अगर इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया जाता है, तो अमेरिका पाकिस्तान को माफ कर देगा। इस आरोप में कितनी सच्चाई है, ये नहीं पता। लेकिन, शहबाज शरीफ के सीनेटर मुशाहिद हुसैन सैयद ने कहा कि, 'दोनों पक्षों को क्षेत्रीय शांति, आपसी संपर्क, आतंकवाद, अफगानिस्तान, जलवायु परिवर्तन और सैन्य संबंधों जैसे पारस्परिक हितों के क्षेत्रों में सहयोग के लिए काफी कड़ी मेहनत करनी होगी' उन्होंने कहा कि, "सबसे बढ़कर, चूंकि बाइडेन प्रशासन लोकतंत्र को लेकर काफी बात करता है और अभी भी पाकिस्तान एक जीवंत लोकतंत्र बना हुआ है, शायद सबसे स्वतंत्र मुस्लिम लोकतंत्र, तो अमेरिका के साथ संबंध शुरू होने की एक संभावना तो है ही'।

सीपीईसी में कैसे निवेश करेगा पाकिस्तान?

सीपीईसी में कैसे निवेश करेगा पाकिस्तान?

चीन के बारे में शहबाज शरीफ की पार्टी के सीनेटर मुशाहिद कहते हैं कि, प्रधानमंत्री शरीफ ने अपने कार्यालय के पहले दिन घोषणा की थी, कि "चीन पाकिस्तान का सबसे मजबूत दोस्त और सबसे करीबी साथी है", और यह कि सीपीईसी को "पाकिस्तान की गति" के साथ नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। उन्होंने भविष्यवाणी की कि शरीफ के तहत पाकिस्तान-चीन संबंध "मजबूत और लचीला" होंगे। लेकिन, सवाल ये हैं, कि सीपीईसी प्रोजेक्ट में निवेश करने के लिए पाकिस्तान पैसे कहां से लाएगा? क्या चीन पाकिस्तान को और लोन देगा? मुश्किल है...। क्योंकि, चीन के बैंकों ने अपनी सरकार को कहा है, कि चीन के कई अरब डॉलर विदेशों में फंसे हैं, जिससे देश की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। इमरान खान जब प्रधानमंत्री थे, उस वक्त भी चीन ने 6 अरब डॉलर का कर्ज पाकिस्तान को देने से मना कर दिया था, तो फिर सवाल ये है, कि जो आईएमएफ पाकिस्तान को एक अरब डॉलर नहीं दे रहा है, तो क्या चीन पाकिस्तान को 5 या 6 अरब डॉलर का कर्ज देगा?

कैसी रहेगी पाकिस्तान की विदेश नीति?

कैसी रहेगी पाकिस्तान की विदेश नीति?

पाकिस्तान की विदेश नीति पूरी तरह से सेना के कंट्रोल में रही है और पाकिस्तानी सेना ने पिछले एक साल में भारत, अमेरिका, अफगानिस्तान और सऊदी अरब के साथ संबंधों को सुधारने पर बल दिया है। लेकिन, पाकिस्तानी अवाम भारत और अमेरिका को लेकर अलग रूख रहती है। तो सवाल ये है, कि शहबाज शरीफ देश की जनता को नाराज कर अमेरिका और भारत के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश करेंगे या सेना को नाराज करेंगे? अगर शहबाज शरीफ सेना की सुनते हैं, तो अगले चुनाव में उन्हें भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा, क्योंकि इमरान खान का कैंपेन ही भारत और अमेरिका के खिलाफ है और अगर शहबाज शरीफ, सेना की बात नहीं सुनते हैं, तो अपनी कुर्सी को ही खतरे में डालते नजर आएंगे। वहीं, पाकिस्तान के एक विश्लेषक ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा, कि पाकिस्तान की सरकार की तुलना में पाकिस्तान की सेना अमेरिका से काफी जुड़ी है और शहबाज शरीफ की सरकार पर भी इसका प्रेशर रहेगा।

पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में कलह

पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में कलह

पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में इस वक्त कलह मचा हुआ है और डिप्टी स्पीकर कासिम खान सूरी, जिन्होंने संविधान का उल्लंघन करते हुए इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होने से रोक दिया था, उन्हें हटाने की कवायद शुरू हो गई है। दूसरी तरफ इमरान खान के सभी सांसद इस्तीफा दे चुके हैं और इस वक्त पाकिस्तानी संसद की स्थिति ये है, कि विपक्ष में सिर्फ 4 सांसद बैठे हुए हैं। इमरान खान बार बार संसद की वर्तमान कार्यवाही के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं और वो शहबाज शरीफ की सरकार को मान्यता नहीं देने की बात कह रहे हैं। तो फिर सवाल ये है, कि आखिर शहबाज शरीफ विपक्ष विहीन संसद को कैसे चलाएंगे?

सरकार संभाल पाएंगे शहबाज?

सरकार संभाल पाएंगे शहबाज?

पाकिस्तान की सड़कों पर अमेरिकी झंडे जलाए जा रहे हैं और पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी अब ये मानने लगी है, कि शहबाज शरीफ की सरकार अमेरिका के हाथों की कठपुतली है। कम से कम इमरान खान ने अपने आक्रामक कैंपेन से ये संदेश पाकिस्तानी अवाम तक पहुंचा दिया है। वहीं, पीटीआई के सीनेटर और स्टील मैग्नेट नौमान वजीर ने एशिया टाइम्स को बताया कि, शरीफ सरकार अल्पकालिक होगी और इस साल नए चुनाव होने की संभावना है। उन्होंने कहा, "यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ [करीबी संबंधों] की कसम खाने के बजाय, नई सरकार को एक क्षेत्रीय दृष्टिकोण का पालन करना चाहिए और रूस, चीन, ईरान, मलेशिया और भारत के साथ रिश्तों को सुधारने की तरफ बढ़ना चाहिए'। यानि, शहबाद शरीफ की सरकार का भविष्य कितने दिनों की है, ये कहना काफी मुश्किल है और इतना तो साफ दिख रहा है... कि शहबाज शरीफ की सरकार कांटों से भरे रास्ते पर कदम बढ़ा रही है।

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