जीवंत, सशक्त, समृद्ध, सम्पन्न... दुनिया को भारतीय वोटर्स का संदेश, जिंदा ही नहीं, जिगरवाला है भारतीय लोकतंत्र
Lok Sabha elections 2024: भारतीय को पहचाने बगैर भारत की सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक चरित्र पर सवाल उठाने वाले पश्चिम को भारतीय लोकसभा चुनाव के नतीजे ने करारा थप्पड़ लगाया है, जो भारतीय लोकतंत्र को लोकतांत्रिक इंडेक्स में नीचले पायदान पर धकेलने की कोशिश करते रहे हैं।
याद होगा, कि कैसे अमेरिका ने भारतीय लोकतंत्र पर सवाल उठाए थे, कैसे जर्मनी ने सवाल पूछने का दुस्साहस किया था और कैसे स्वीडन के एक यूनिवर्सिटी ने अपने लोकतांत्रिक इंडेक्स में भारतीय लोकतंत्र को खतरे की लिस्ट में रखा था। लेकिन भारतीय मतदाताओं ने अपने मतों से दिखाया, कि वो अपनी मर्जी से सरकार चुनते हैं, गिराते हैं, जिन नेताओं के पास घमंड हो जाए, उन्हें जमीन पर लाते हैं और जिन नेताओं को अपनी गलती पर अहसास हो जाए, फिर से उनकी झोली भर देते हैं।
इसमें कोई शक नहीं, कि आज ग्लोबल स्टेज पर भारत महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है, दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला अर्थव्यवस्खा बन चुका है, सबसे ज्यादा मैनपावर भारत के पास है, सबसे ज्यादा श्रम भारत के पास है और दुनिया इस बात को जानती है, कि आने वाला कल भारत का है.. तो क्यों ना भारत के दामन पर कुछ बदनामी के छींटे फेंक दिए जाएं।
आज की दुनिया को नरेन्द्र मोदी जैसा ही नेता चाहिए, जो उन्हीं के अंदाज में उनसे निपटे.. लेकिन, विकसित कर रहे भारत का ये रवैया भला ताकतवार देशों को कैसे पसंद आए, लिहाजा उन्होंने भारत की जनता की तरफ से पूर्ण बहुमत से चुनी सरकार पर कीचड़ उछाले।

यह सिर्फ ग्लोबल पॉलिटिक्स को लेकर नहीं है, बल्कि ग्लोबल पॉलिटिक्स में नरेन्द्र मोदी को लेकर बनी धारणाओं के बारे में भी है। क्योंकि, भारत में लोकसभा चुनाव का ऐलान होने के साथ ही नरेन्द्र मोदी को लेकर काफी आलोचनात्मक टिप्पणियां आने लगीं। खास तौर पर पश्चिमी देशों ने उन्हें लगातार निशाने पर रखा। यहां तक ही, उन्होंने भारत की न्यायिक प्रक्रिया, चुनावों के समय और चुनाव के स्वतंत्र और निष्पक्ष स्वभाव पर भी सवाल उठाए।
और भारतीय मतदाताओं ने जो नतीजे सुनाए हैं, उससे सभी आलोचकों को जवाब मिल जाना चाहिए, कि भारत का लोकतंत्र जीवित है, पारदर्शी है, निष्पक्ष और सक्रिय है। इस चुनाव में सत्ताधारी पक्ष ने अपने बहुमत को कम होते देखा। सत्ता पक्ष ने किसी भी तरह जीत हासिल करने के लिए हिंसा का सहारा नहीं लिया, न ही उन्होंने संसद तक मार्च किया। उन्होंने यह नहीं कहा, कि चुनाव 'चुराए गए' हैं, बल्कि उन्होंने गर्व से जो भी चुनाव परिणाम आए, उन्हें जनता का मत माना और सिर झुकाकर स्वीकार किया।
विपक्ष ने भी मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाए बगैर जनादेश को स्वीकार किया। वास्तव में, कांग्रेस अध्यक्ष ने नतीजों को स्वीकार करते हुए पहली बात यही कही।
लेकिन, सवाल ये है, कि क्या कथित पश्चिमी एजेंसियों, पोलस्टर्स और बुद्धिजीवियों को भारतीय चुनाव कितना संतुष्ट करेगा? और क्या वो अभी भी कहेंगे, कि भारतीय लोकतंत्र खतरे में है?
2014 में EIU लोकतंत्र सूचकांक में भारत को 27वें स्थान पर रखा गया था। और 2023 तक भारत की रैंकिंग गिराकर 41 करते हुए भारत को 'त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र' करार दिया गया था।
वहीं स्वीडन के एक विश्वविद्यालय ने लोकतंत्र को मापने का इंडेक्श तैयार किया है, जिसका नाम है V-Dem। और 2018 में इसने भारत को 'चुनावी निरंकुशता' घोषित किया था। लेकिन 4 जून के नतीजे इस तरह के इंडेक्स पर ना सिर्फ एक तमाचा है, बल्कि ये भी बताता है, कि इन इंडेक्स को तैयार करने वालों को भारत की समझ ही नहीं है। क्योंकि, भारतीयों ने जिस तरह से वोट किया है, या इससे पहले भी भारतीयों ने जिन उम्मीदों के साथ वोट किया था, वैसी वोटिंग किसी दोषपूर्ण लोकतंत्र में नहीं होता है।
सत्तारूढ़ बीजेपी को करीब 37 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले हैं। और अगर इसकी तुलना वास्तविक निरंकुश देशों से करें, तो रूस में पुतिन को 87 प्रतिशत वोट मिले हैं और ईरान में विजेता राष्ट्रपति को 72 प्रतिशत वोट मिले थे। और वास्तविक निरंकुशता यही है, लेकिन अमेरिका की नजरों में भारत खटकता है।
लिहाजा, यह महज एक बदनाम करने वाला अभियान है और मंगलवार के नतीजे यह चेतावनी देने वाले हैं, कि भारत का लोकतंत्र खतरे में नहीं है और भारतीय मतदाता गुमराह नहीं हैं। वे वास्तव में काफी समझदार हैं, और उन्हें पता है कि कैसे वोट करना है।
दिल्ली में सभी सात सीटें बीजेपी के खाते में गईं, लेकिन विधानसभा चुनावों में स्थिति इसके उलट है, और आम आदमी पार्टी को वहां भारी बहुमत हासिल है।
कर्नाटक के मामले में भी यही स्थिति है, जहां पिछले साल मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार के लिए वोट दिया था, वहां इस साल बीजेपी ने राज्य से लोकसभा चुनावों में ज्यादातर सीटें जीती हैं। यह कुछ हद तक ओडिशा पर भी लागू होता है, जहां बीजेपी ने संसदीय चुनावों में 21 लोकसभा सीटों में से 20 सीटें जीतीं और विधानसभा चुनाव में 24 साल पुरानी नवीन पटनायक सरकार को भारी बहुमत से बाहर कर दिया।
अमेरिका को क्यों सीखना चाहिए सबक?
यह भारतीय मतदाताओं की समझदारी को दर्शाता है। यह अन्य देशों, जैसे कि अमेरिका में देखने को मिलने वाली समझदारी से बिलकुल अलग है। अमेरिका के 50 से ज्यादा राज्य, राष्ट्रपति चुनाव में मतदान कर सकते हैं, लेकिन सिर्फ सात स्विंग राज्य ही जीत हार का फैसला करते हैं। बाकी लोग कभी अपना विचार नहीं बदलते, चाहे वह रिकॉर्ड तोड़ने वाली मुद्रास्फीति हो या अंतहीन विदेशी युद्ध - एक नीला राज्य नीला ही रहेगा और एक लाल राज्य लाल ही रहेगा - फिर भी, अमेरिका अकसर भारतीय लोकतंत्र पर तंज कसता नजर आता है।
पश्चिम को भारतीय मतदाताओं को कम आंकना और उनका अपमान करना बंद कर देना चाहिए। उन्हें भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करना सीखना चाहिए। ग्लोबल साउथ के लिए, यह प्रेरणादायक है। लोकतंत्र का स्टॉक वैश्विक स्तर पर गिर रहा है, क्योंकि हम तख्तापलट और शत्रुतापूर्ण सत्ता अधिग्रहण देख रहे हैं। इसलिए यह चुनाव एक मजबूत संदेश देता है, कि लोकतंत्र कैसे काम करता है। यह सरकार का सबसे अच्छा रूप है, न केवल अमीर पश्चिमी देशों में बल्कि हर जगह।
अमेरिका को याद रखना चाहिए, कि उसके देश के लोकतंत्र पर सवाल उठ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप को उस जुर्म में सजा दी गई है, जिसे आमतौर पर अदालतों में पहली ही सुनवाई में खारिज कर दिया जाना चाहिए। लेकिन, बाइडेन बदले की राजनीति में हर हद पार कर रहे हैं, ये पश्चिमी मीडिया नहीं दिखाएगा।
ट्रंप ने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद सत्ता छोड़ने से कैसे इनकार कर दिया था और कैसे अमेरिकी संसद कैपिटल हिल पर कब्जा करने की कोशिश की थी, उसका घिनौना रूप पूरी दुनिया लाइव देख चुकी है।
इसलिए भारत को इस चुनाव पर गर्व होना चाहिए। इसने सभी को, खास तौर पर पश्चिम को यह संदेश दिया है, कि भारत का लोकतंत्र स्वस्थ है और वैश्विक दक्षिण को यह संदेश दिया है, कि भारतीय लोकतंत्र पूरी ताकत से काम कर रहा है।
-
प्यार में ये कैसा पागलपन? महेश भट्ट के लिए सड़क पर बिना कपड़ों के दौड़ीं ये फेमस एक्ट्रेस, फिर हुआ दर्दनाक अंत -
Sone ka Bhav: जंग के बीच सोने में बड़ी गिरावट! 7000 रुपये सस्ता, क्यों गिर रहा है भाव? आज का लेटेस्ट Gold Rate -
Weather Delhi NCR: दिल्ली में कब साफ होगा मौसम? दो दिन बाद फिर लौटेगी बारिश, IMD के अलर्ट ने बढ़ाई टेंशन -
Hyderabad Gold Silver Rate Today: ईद के मौके पर सोना-चांदी ने किया हैरान, जानें कहां पहुंचा भाव? -
Gold Rate Today: सोना सस्ता या अभी और गिरेगा? Tanishq से लेकर Kalyan, Malabar तक क्या है गहनों का भाव? -
Iran Espionage Israel: दूसरों की जासूसी करने वाले इजरायल के लीक हुए सीक्रेट, Iron Dome का सैनिक निकला जासूस -
Petrol Price Hike: ईरान जंग का पहला झटका! पावर पेट्रोल हुआ महंगा, इतना बढ़ा दाम, चेक करें लेटेस्ट रेट -
Weather UP: लखनऊ में 60KM की स्पीड से चलेंगी हवाएं! इन 26 जिलों में बारिश के साथ ओले गिरने का अलर्ट -
धामी मंत्रिमंडल में शामिल हुए ये 5 विधायक, दिल्ली से नाम हुए फाइनल, कुछ नामों ने चौंकाया, जानिए पूरी लिस्ट -
Surya Midha Net Worth: कौन हैं 22 साल के सूर्या मिधा? जकरबर्ग को पछाड़ बने सबसे युवा अरबपति? अथाह है संपत्ति -
Petrol Price: पेट्रोल के बाद Industrial Diesel भी महंगा, आपके शहर में कहां पहुंचा रेट? -
VIDEO: राष्ट्रपति ने प्रेमानंद महाराज को देखते ही किया प्रणाम! सादगी ने जीता दिल, क्या हुई आध्यात्मिक चर्चा?












Click it and Unblock the Notifications