G20 Presidency कैसे बदल देगा भारत का भविष्य, भारतवासियों के लिए बड़ा मौका, किस सेक्टर को क्या उम्मीदें?
India's G20 presidency: भारत को हमेशा से विरोधाभासों की भूमि के रूप में वर्णित किया गया है। चाहे वह भारत की संस्कृति हो, विविधता हो, या जनसंख्या का विशाल आकार हो, भारत को समझना जितना जटिल है, उतना ही आकर्षक भी है।
अब लगभग दो दशकों से, देश की आर्थिक वृद्धि के इंजन प्रभावशाली ढंग से काम कर रहे हैं। कंपनियां बड़ी हो गई हैं और कई कंपनियों ने वैश्विक छाप छोड़ी है।
इसलिए, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 85 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के 75 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाले जी20 मंच की भारत की अध्यक्षता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये भारत के भविष्य के लिए नया रास्ता खोलता है, लिहाजा भारत पूरी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और अलग अलग सेक्टर्स ने भी जी20 से काफी उम्मीदें लगा रखी हैं।
गोदरेज इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नादिर बी. गोदरेज ने कहा, कि "पहले, विश्व मंच पर हमारा प्रभाव सीमित था, लेकिन अब वह बदल गया है। भारत का कारोबारी जगत बहुत अधिक इसको लेकर आश्वस्त हैं।"
दरअसल, कई मायनों में, इस नई कहानी की शुरुआत 1990 के दशक की शुरुआत में अर्थव्यवस्था के खुलने से शुरू होती है और अब भारत, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग का केन्द्र बनने की तरफ है।

भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव
जी20 शिखर सम्मेलन, भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती ताकत का प्रतिबिंब है। केवल एक दशक में, भारत दसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से अब पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। लेकिन, इसका वैश्विक नीतियों पर आनुपातिक प्रभाव नहीं पड़ा है।
ईवाई इंडिया में पार्टनर (सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र) अजीत पई कहते हैं, कि "भारत की G20 की अध्यक्षता आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरण और डिजिटल क्षेत्रों में वैश्विक नीतियों पर एजेंडा और कथा पर अधिक प्रभाव डालने के लिए उपयुक्त समय पर है।" उन्होंने कहा, कि "यह तब है, जब हम बढ़े कर्ज, धीमी वृद्धि और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता के साथ ध्रुवीकरण वाली दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती बड़ती हुई अर्थव्यवस्था हैं।''
उनका कहना है, कि पिछले साल जी20 मंच ने भारत ने जो घनिष्ठ समन्वय स्थापित किया है, उससे कई फायदे हुए हैं। मसलन, "18 से अधिक मंत्रिस्तरीय बैठकें, 80 कार्य समूह स्तर पर, और 33 इंगेजमेंट समूह की बैठकों के अलावा कई साइड इवेंट आयोजित किए गए हैं। इन बातचीतों ने न केवल भारतीय अधिकारियों और व्यवसायों को वैश्विक वित्त और विकास के विभिन्न पहलुओं में अंतर्दृष्टि प्रदान की है, बल्कि वैश्विक निर्णय लेने वाले लोगों तक पहुंच भी प्रदान की है।"

भारत के व्यापारिक संबंध होंगे मजबूत
ग्लोबल इकोनॉमी में जी20 देशों की 85 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लिहाजा इस मंच के जरिए पिछले एक साल में भारत ने अलग देशों के साथ कारोबारी संबंध काफी मजबहूत किए हैं।
भारत ने लगातार वैश्विक कारोबारियों को देश में इन्वेस्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया है और एक्सपर्ट़्स का भी मानना है, कि भारत ने इसके जरिए व्यापारिक संबंधों को काफी मजबूत किया है।
यह सब भारतीय व्यवसायों के लिए व्यापार और निवेश के अवसरों में तब्दील होने की उम्मीद है जो वैश्विक विस्तार में भी मदद करेगा। इसके अलावा, जी20, घरेलू उद्योग को न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार में, बल्कि व्यापार समझौतों जैसे नीतिगत मामलों पर चर्चा में भी प्रमुख स्थान दे सकता है। इससे भारतीय कंपनियों को जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी बड़ी भूमिका मिल सकती है।
भारत की कोशिशें
गोदरेज के डायरेक्टर नादिर बी. गोदरेज का मानना है, कि भारत को आने वाले सालों में इससे काफी लाभ मिलने वाले हैं। उन्होंने इसे एक कदम और आग बताया और कहा, कि "चीन+1 [रणनीति] इसका केवल एक हिस्सा है। एक देश के रूप में, रिसर्च एंड डेलवपमेंट (अनुसंधान और विकास) पर बहुत काम किया गया है और अब हमें अपना ध्यान बुनियादी हिस्से पर केंद्रित करने की आवश्यकता होगी।"
वह कहते हैं। उनके विचार में, डिजिटल स्टैक भारत के लिए एक बड़ी सफलता है और इसे शेष विश्व में ले जाया जा सकता है। गोदरेज कहते हैं, ''जी20 कार्यक्रम उस वक्त हो रहा है, जब भारत विकास के एक दिलचस्प चरण में है और चीन सहित अधिकांश देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।''
लंबे समय से, चीन को कम श्रम लागत के कारण बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारी लाभ मिला है। पाई वने कहा, कि "यदि श्रम-गहन विनिर्माण उनके लिए काम करता है, तो हम ज्ञान-गहन विनिर्माण में अपनी पहचान बना सकते हैं।"
भारत ने जी20 रोजगार कार्य समूह के तहत क्रॉस-कंट्री तुलनीयता को बढ़ावा देने के लिए व्यवसायों को वर्गीकृत करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संदर्भ विकसित करने पर आम सहमति बनाई है।

उर्जा सेक्टर में क्या फायदे होंगे?
जी20 के जरिए भारत ग्रीन एनर्जी के सेक्टर में भी तेजी से काम कर रहा है, ताकि भारत को जीवाश्म इंधन से मुक्ति मिल सके।
इस क्षेत्र की बड़ी कंपनियां, लगातार इसी दिशा में काम कर रही हैं। उदाहरण के लिए, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) को लें। ऑयल-टू-टेलीकॉम-टू-रिटेल दिग्गज ने अपनी 2023 की वार्षिक रिपोर्ट में 133 बार ग्रीन शब्द का उल्लेख किया है।
लिहाजा, इससे जाहिर हो रहा है, कि भारत का ऊर्जा सेक्टर जीवाश्म इंधन तो त्यागने के मोर्च पर काम कर रहा है और आने वाले वक्त में भारत को इससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में काफी मदद मिलेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले ही नई ऊर्जा में 10 अरब डॉलर के बड़े निवेश की घोषणा कर चुकी है।
हालांकि, यह एक लंबी यात्रा है जो एक बड़े मानसिकता परिवर्तन की मांग कर रही है। जब तक कार्बन कैप्चर और भंडारण वास्तविकता नहीं बन जाता, हम कभी भी डीकार्बोनाइज्ड नहीं होंगे। लेकिन, कम से कम इस दिशा में काम तो शुरू हो ही चुकी है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए रोडमैप
भारत की अध्यक्षता के दौरान चल रही G20 बैठकों में, देश ने खुद को तेज़ इलेक्ट्रिक चार्जर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी और बैटरी रीसाइक्लिंग के निर्माण के केंद्र के रूप में पेश किया है। अपनी प्रतिबद्धता पर जोर देने के लिए, भारत सरकार ने 2030 तक बसों के लिए 40 प्रतिशत, निजी कारों के लिए 30 प्रतिशत, वाणिज्यिक वाहनों के लिए 70 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों के लिए 80 प्रतिशत ईवी बिक्री का आक्रामक लक्ष्य निर्धारित किया है।
यानि, अगले 7 सालों में भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का जाल बिछ जाएगा और आज 10 से 15 सालों में, आज जिस तरह से सीएनजी गाड़ियां दिख रही हैं, उसी तरह से इलेक्ट्रिक गाड़ियां दिखेंगी।
एविएशन सेक्टर पर क्या होगा असर?
एविएशन सेक्टर, दुनिया के बाकी हिस्सों में अभी भी संघर्ष कर रहा है, लेकिन भारत एक एविशन सेक्टर में बुम आ चुका है।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू वाहकों ने जनवरी-जुलाई की अवधि में 88.19 मिलियन यात्रियों को यात्रा कराई, जबकि 2022 में यह संख्या 66.95 मिलियन थी। यह 31.72 प्रतिशत की प्रभावशाली वार्षिक वृद्धि और 24.67 प्रतिशत की मासिक वृद्धि है।
भारतीय एविएशन सेक्टर का विस्तार क्या है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं, कि नये विमान खरीदने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जो ऑर्डर दिए गये हैं, उसमें भारत से सबसे ज्यादा ऑर्डर दिए गये हैं। इंडिगो ने 500, एयर इंडिया ने 470 और अकासा एयर ने 4 विमान खरीदने का ऑर्डर दिया है।
भारत की नागरिक आबादी तेजी से बढ़ रही है और मिडिल क्लास विकास के रास्ते पर है, लिहाजा आने वाले दिनों में एविएशन सेक्टर में तेजी से विस्तार होगा।
रियल-एस्टेस सेक्टर को उम्मीदें
रियल एस्टेट सेक्टर ने भारत में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन पर बड़ा दांव लगा रखा है। रियल एस्टेट सेक्टर को लग रहा है, कि जी20 की वजह से विदेशी निवेशकों और अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) की रुचि भारत में बढ़ेगी।
रियल्टी प्रमुख रहेजा डेवलपर्स के निदेशक नयन रहेजा का कहना है, कि फोरम ने उन शहरों की दृश्यता बढ़ा दी है, जहां बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा, कि "जैसा कि यह भारत की क्षमता पर प्रकाश डालता है, शिखर सम्मेलन विदेशी और एनआरआई निवेश को बढ़ावा देगा।"
वहीं, गौड़ ग्रुप के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक और उद्योग निकाय क्रेडाई के अध्यक्ष मनोज गौड़ कहते हैं, कि शहरों पर इसका प्रभाव वह है, जो विकास हम देख रहे हैं। उन्होंने कहा, कि "इसने देश के आर्थिक विकास और इसकी विशाल निवेश क्षमता को प्रदर्शित किया है।" इसके अलावा, सतत विकास और हरित भवनों के इर्द-गिर्द U20, या अर्बन 20 द्वारा तैयार किया गया विज़न दस्तावेज़ भी महत्वपूर्ण है।
ध्रुव अग्रवाल, हाउसिंग डॉट कॉम, प्रॉपटाइगर डॉट कॉम और मकान के ग्रुप सीईओ हैं और उनका कहना है, कि जैसे-जैसे मांग बढ़ती है, इस सेक्टर को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार रहना चाहिए।












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