रूस से तेल आयात पर अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत में पेट्रोल-डीजल होगा कितना महंगा ? जानिए

नई दिल्ली, 9 मार्च: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 14 साल पुराने रिकॉर्ड स्तर के आसपास मंडरा रही हैं और अब अमेरिका ने रूस से तेल आयात रोककर इसपर और दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, लेकिन वहां भी प्राकृतिक गैस की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी हैं। सवाल है कि अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जो फैसला लिया है, उसका असर इसकी कीमतों पर क्या होगा? सबसे बड़ी बात की भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों जो चुनावों की वजह से चार महीने से भी ज्यादा से नहीं बढ़ी हैं, उसमें अचानक कितनी बढ़ोतरी होगी?

अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा गैस का दाम

अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा गैस का दाम

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने देश के सांसदों और यूक्रेन के दबाव की वजह से आखिरकार रूस से तेल, गैस और ऊर्जा आयात पर प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है। लेकिन, अमेरिका को यह फैसला ऐसे समय में लेना पड़ा है, जब वह खुद ही पेट्रोलियम पदार्थों की रिकॉर्ड कीमतों को झेल रहा है। अमेरिका में गैस का औसत दाम ऐतिहासिक 4.17 डॉलर प्रति गैलन (85 रुपये प्रति लीटर के करीब) तक पहुंच गया है, जो कि 2008 के पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर गया है। कैलिफोर्निया के कुछ गैस स्टेशनों में तो इसकी खुदरा कीमत 7 डॉलर प्रति गैलन से भी ज्यादा हो चुकी है। ऊपर से राष्ट्रपति बाइडेन ने चेतावनी दी है कि आगे की राह और भी मुश्किल होने वाली है।

रूस से तेल-गैस आयात पर प्रतिबंध का अर्थ क्या है?

रूस से तेल-गैस आयात पर प्रतिबंध का अर्थ क्या है?

अमेरिकी प्रतिबंध का मतलब ये है कि अब वह रूस से कोई नया कच्चा तेल, कुछ पेट्रोलियम पदार्थ, एलपीजी और कोयले का आयात नहीं करेगा। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पहले से जो खरीद हो चुकी है, उसकी मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है। यानि जो सौदे पहले ही हुए हैं, उसपर इन प्रतिबंधों का असर नहीं दिखता नजर आ रहा है।

दूसरे देशों से क्या चाहेगा अमेरिका ?

दूसरे देशों से क्या चाहेगा अमेरिका ?

अमेरिकी प्रतिबंधों का दूसरे देशों पर रूस से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के आयात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। खुद घोषणा करते वक्त बाइडेन ने भी कहा है कि यह फैसला वह अपने यूरोपीय सहयोगियों से चर्चा के बाद कर रहे हैं और उनसे ना तो उम्मीद करते हैं और ना ही कहेंगे कि वह भी अपने आयातों पर पाबंदी लगाएं। उन्होंने कहा,'अमेरिका यह कदम उठाने में इसीलिए सक्षम है क्योंकि उसके पास खुद का मजबूत घरेलू ऊर्जा उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर है। और हम समझते हैं कि हमारे सभी सहयोगी और साझीदार इस समय हमारे साथ आने की स्थिति में नहीं हैं।'

रूसी तेल पर कितना निर्भर है अमेरिका ?

रूसी तेल पर कितना निर्भर है अमेरिका ?

अमेरिका दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा उत्पादक और शुद्ध निर्यातक है। 2021 में अमेरिका का 10% कच्चा तेल रूस से आयात हुआ था। वहीं यूरोपीय देशों में उसका हिस्सा 30% है। यूरोप के देश मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस के लिए रूस के भरोसे हैं। मसलन, अमेरिका को अब रूस से होने वाले आयात की भरपाई के लिए अपने स्टॉक की ओर देखना होगा और इसका चेन रियेक्शन देखने को मिल सकता है।

अमेरिकी प्रतिबंध से कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

अमेरिकी प्रतिबंध से कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

एक्सपर्ट मानकर चल रहे हैं कि जब तक रूस से कच्चे तेल की सप्लाई जारी रहेगी, उसकी कीमतों पर कोई ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन तथ्य यह है कि कच्चा तेल पहले से ही 14 साल की ऊंचाई के स्तर के करीब है। बुधवार यानि 9 मार्च, 2022 को (भारतीय समय के मुताबिक सुबह 10.30 बजे) ब्रेंट क्रूड 130.8 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से बिक रहा था। 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से इसकी कीमतों में 34% का उछाल आ चुका है। जानकारों की राय में तेल की कीमतें बहुत ही संवेदनशील चीजों पर निर्भर करती हैं। सप्लाई में जरा भी अड़चन आने से कीमतों पर बहुत ही विपरीत असर पड़ता है।

कभी भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का हो सकता है ऐलान

कभी भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का हो सकता है ऐलान

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब भारतीय उपभोक्ता चुनावी मौसम की वजह से थोड़ी राहत की सांस ले रहे हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) पिछले साल नवंबर महीने की शुरुआत से ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हुई हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद तेल कंपनियों के हाथों में है कि वह अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों के हिसाब से कब दाम बढ़ाने की घोषणा करती हैं और लाखों करोड़ रुपये का घाटा पूरा करने की दिशा में कदम उठाती हैं।

भारत में कितना महंगा होगा पेट्रोल और डीजल?

भारत में कितना महंगा होगा पेट्रोल और डीजल?

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें देखें तो पिछले साल 26 अक्टूबर को यह 86 डॉलर प्रति बैरल बिक रहा था। आज की कीमत के हिसाब से तेल कंनियों को घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 52 पैसे प्रति डॉलर के हिसाब से बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। जब नवंबर में चुनावों से पहले अंतिम बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई गई थीं, तब से यह करीब 50 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो चुका है। अगर राजधानी दिल्ली की बात करें तो इस समय पेट्रोल 95.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल 86.67 प्रति लीटर बिक रहा है। इस हिसाब से 26 रुपये प्रति लीटर तक दाम बढ़ाने का दबाव देखने को मिल सकता है। काफी कुछ केंद्र और राज्य सरकारों पर भी निर्भर है कि वह उपभोक्ताओं को टैक्स में राहत देती है या नहीं ?

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+