चीन के ‘प्यार’ में होंडुरास ने ताइवान का साथ छोड़ा, ताइपे की अपील- ड्रैगन के जाल में न फंसे
बीते साल होंडुरास की विदेश मंत्री ने कहा था कि उनका देश ताइवान के साथ संबंधों को मजबूत बनाने का सिलसिला जारी रखेगा। उन्होंने दावा किया था कि चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करना उनकी सरकार की प्रथामिकता में नहीं है।

Image: Oneindia
होंडुरास ने ताइवान के साथ अपने दशकों पुराने राजनयिक संबंधों को समाप्त कर दिया है। मध्य अमेरिकी देश होंडुरास ने चीन के साथ राजनयिक संबंध शुरू करने के लिए ये फैसला किया है। होंडुरास की राष्ट्रपति शियोमारा कास्त्रो ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उनकी सरकार चीन से राजनयिक संबंध स्थापित करना चाहती है। इसके लिए विदेश मंत्री एडवर्डो रिएना ने प्रयास करने शुरू कर दिए हैं। होंडुरन के विदेश मंत्री के पिछले सप्ताह चीन की यात्रा के बाद से ही होंडुरास के ताइवान के साथ संबंध समाप्त होने की उम्मीद की जा रही थी।
होंडुरास में दूतावास बंद करेगा ताइवान
ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने इस बीच कहा कि ताइपे, होंडुरास में अपना दूतावास बंद कर देगा और अपना राजदूत वापस ले लेगा। होंडुरन विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि होंडुरास की सरकार दुनिया में सिर्फ एक चीन के अस्तित्व को मान्यता देती है और रिपब्लिक ऑफ चाइना एकमात्र वैध सरकार है जो पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करती है। होंडुरास ने ताइवान को चीन का अविभाज्य हिस्सा भी बताया है। मंत्रालय ने कहा कि होंडुरास ने ताइवान को संबंध तोड़ने के अपने फैसले के बारे में सूचित कर दिया है और वह ताइपे के साथ कोई संबंध या आधिकारिक संपर्क नहीं रखेगा।
कास्त्रो ने चुनाव के दौरान किया ऐलान
आपको बता दें कि शियोमारा कास्त्रो ने होंडुरास और चीन के बीच संबंध स्थापित करने को लेकर 2021 में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि अगर वह चुनाव जीतती हैं तो चीन के साथ संबंधों पर ध्यान देंगी। हालांकि, चुनाव जीतने के बाद उनकी सरकार के लिए एक भ्रम जैसी स्थिति बन गई थी और वह इस मुद्दे को लगभग छोड़ दिया गया था। जनवरी 2022 में होंडुरास की विदेश मंत्री ने कहा था कि उनका देश ताइवान के साथ संबंधों को मजबूत बनाने का सिलसिला जारी रखेगा, लेकिन इस महीने एक ठोस राय कायम करते हुए राष्ट्रपति ने चीन संग संबंधों को शुरू करने का निर्देश दिया है।
ताइवान ने चीन पर लगाया आरोप
होंडुरास की घोषणा के तुरंत बाद, चीन ने घोषणा की कि वह तेगुसिगल्पा के साथ संबंध स्थापित करने जा रहा है। इस बीच ताइवान ने बीजिंग पर अपने कुछ शेष सहयोगियों को लुभाने के लिए जबरदस्ती करने और डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। ताइवान ने होंडुरास सरकार से सावधानी से विचार करने और चीन के जाल में न फंसने की अपील भी की है। आपको बता दें कि चीन उन देशों के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखता, जिन्होंने ताइवान को एक देश के तौर पर मान्यता दी है या ताइपे में दूतावास स्थापित किया है।
ताइवान के पास बचे 13 साथी
होंडुरास की ओर से चीन के साथ राजनयिक संबंध शुरू करने के बाद ताइवान के पास केवल 13 देशों की मान्यता रह जाएगी। ताइवान में त्साई इंग वेन के 2016 में राष्ट्रपति बनने के बाद से इस देश ने अपना नौवां राजनयिक सहयोगी गंवा दिया है। इनमें अधिकतर देश लैटिन अमेरिकी हैं, जबकि सिर्फ एक-एक यूरोपीय और अफ्रीकी देश शामिल हैं। एशिया के किसी भी देश ने ताइवान के साथ राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किया है। होंडुरास से पहले निकारागुआ ने ताइवान के साथ अपने राजनयिक संबंध खत्म कर दिया था।












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