पाकिस्तान में ईंशनिंदा के बहाने अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, हिन्दू शख्स पर टूट पड़ी भीड़, पुलिस ने बचाया

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहने वाले एक हिंदू व्यक्ति, अकबर राम को उसके खिलाफ 'ईशनिंदा' का आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने कहा कि पुलिस के सही समय पर हस्तक्षेप करने और आरोपी को हिरासत में लेने से 'उसकी जान बच गई।' दरअसल ईशनिंदा की खबर के सामने आने के बाद भीड़ नाराज हो गई जिसके बाद उसे सैकड़ों लोगों से बचाकर जेल भेज दिया गया।

Blasphemy Pakistan

लाहौर से लगभग 400 किलोमीटर दूर रहीम यार खान जिले निवासी अकबर राम को पुलिस ने वहीं के एक व्यक्ति फैसल मुनीर द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद गिरफ्तार किया था। कथित तौर पर उसने अपने आरोप को साबित करने के लिए पुलिस के सामने दो गवाह भी पेश किए।

फैसल मुनीर जो एक मोटर मैकेनिक है, ने दावा किया कि अकबर राम उसकी दुकान पर आया और मुसलमानों के पवित्र स्थानों और इस्लाम के खिलाफ 'अपमानजनक' टिप्पणी की। पुलिस ने राम पर पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून और पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस के तहत मामला दर्ज किया है।

रहीम यार खान के कोटसमाबा थाने के निरीक्षक सफदर हुसैन ने सोमवार को बताया कि पुलिस ने ईशनिंदा के आरोप में 11 अगस्त को संदिग्ध अकबर राम को गिरफ्तार किया और गांव में कानून-व्यवस्था खराब न हो, इसलिए उसे तत्काल न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया।

हुसैन ने कहा कि अगर हम ईशनिंदा के संदिग्ध को थाने में रखते तो इलाके में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती थी, क्योंकि वह मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोपी है।

खबरों के मुताबिक, अकबर राम का परिवार गुस्साई भीड़ से अपनी जान बचाने के लिए गांव से भाग गया है। पुलिस के बयान से साफ है कि आरोपी के कथित बयानों से कहीं ज्यादा पुलिस को हिंदू शख्स की कथित तौर पर की गई टिप्पणियों की शिकायत के बाद उसकी जान बचाने की चिंता थी।

पुलिस ने स्पष्ट रूप से कहा कि भीड़ मांग कर रही थी कि उसे उनके हवाले कर दिया जाए और इसलिए उसकी गिरफ्तारी से उसकी जान बच गई। इसके अलावा, पुलिस ने यह भी कहा कि उन्हें जेल में स्थानांतरित कर दिया गया और पुलिस स्टेशन में नहीं रखा गया क्योंकि उन्हें कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का डर था।

फिलहाल, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अकबर राम ने इस्लाम या इस्लामी पूजा स्थलों का अपमान किया था। हालांकि, महज एक शिकायत और भीड़ द्वारा न्याय की धमकी के आधार पर, परिवार को अपनी जान बचाने के लिए गांव से भागना पड़ा।

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