व्यापार प्रतिबंध, हॉस्पिटल में इलाज बंद: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों का भारत कैसे कर रहा विरोध?
Hindu attacks in Bangladesh: भारत और बांग्लादेश, दो दक्षिण एशियाई पड़ोसी देश, जिनके बीच दोस्ताना संबंध हुआ करते थे, अब एक दूसरे से उलझ रहे हैं। शेख हसीना, जिन्हें कई लोग नई दिल्ली के सहयोगी के रूप में देखते थे, उन्हें अगस्त महीने में हुए हिंसक छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़कर भागना पड़ा और उन्होंने भारत में शरण ले रखा है।
शेख हसीना को शरण दिए जाने के बाद दिल्ली को लेकर ढाका में काफी नाराजगी है और एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अब ये संबंध कमजोर हो गए हैं। बांग्लादेश में इस्कॉन के पूर्व हिंदू भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद ये संबंध और भी खराब हो गए हैं।

इसके अलावा, नई दिल्ली का आरोप है, कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है।
हिंदुओं के खिलाफ बांग्लादेश में होने वाली हिंसा ने भारतीयों में काफी गुस्सा भर दिया है और भारत में अलग अलग तरीकों से गुस्से का इजहार किया जा रहा है। आइये जानते हैं, कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में जो खटास आ रही है उसके क्या प्रभाव हो सकते हैं?
व्यापार संबंधों पर असर
नई दिल्ली और ढाका ऐतिहासिक रूप से मजबूत व्यापारिक साझेदार रहे हैं। बांग्लादेश, दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। हालांकि, दोनों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के कारण यह साझेदारी खतरे में पड़ रही है।
सोमवार को, असम के श्रीभूमि जिले के निर्यातक और आयातक संघ ने सुतारकंडी भूमि बंदरगाह के माध्यम से बांग्लादेश के साथ सभी व्यापारिक गतिविधियों को सस्पेंड करने की घोषणा की है। एसोसिएशन के एक नेता इमदादुल हक चौधरी ने एएनआई को कहा, कि "हमने देश में अशांति के कारण सुतारकंडी भूमि बंदरगाह के माध्यम से बांग्लादेश के साथ सभी व्यापार को सस्पेंड करने का फैसला किया है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक सभी व्यापारिक गतिविधियां रोक दी जाएंगी। हालांकि इस फैसले से काफी नुकसान होगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह जरूरी है।"
उन्होंने कहा, कि निलंबन से बांग्लादेश का पत्थर, चावल, कोयला और ताजे फलों जैसे सामानों के दैनिक निर्यात पर असर पड़ेगा।
पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी कहा है, कि राज्य "अनिश्चितकालीन निर्यात प्रतिबंध" लगाएगा। उन्होंने कहा, कि यदि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार देश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, तो व्यापार प्रतिबंध और कड़े हो जाएंगे।
इसके अलावा, असम में कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ भी सोमवार को किए गये एक विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे, जिसमें बांग्लादेशी सामान जलाए गए। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि पुरकायस्थ ने काली बाड़ी रोड पर बिशारजन घाट पर व्यक्तिगत रूप से व्यापार मार्ग को ब्लॉक किया और बांग्लादेश से आने वाले सामान को आग लगा दी।

फ्लाइटों की संख्या घटी, ट्रंक फंसे
बांग्लादेश में हिंदुओं पर होने वाले हमलों का गंभीर असर दोनों देशों के बीच फ्लाइटों के ऑपरेशन पर पड़ा है और पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश से कोलकाता के लिए उड़ानों की संख्या में काफी कमी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में बांग्लादेश से कोलकाता के लिए 205 उड़ानें उड़ीं। कोलकाता से बांग्लादेश के लिए भी इतनी ही उड़ानें उड़ीं। कोलकाता आने वाले यात्रियों की संख्या 21,234 थी और कोलकाता से बांग्लादेश जाने वाले यात्रियों की संख्या 21,001 थी।
लेकिन, नवंबर में बांग्लादेश से कोलकाता में 10,121 यात्रियों को लेकर सिर्फ 96 उड़ानें ही आईं। बदले में, कोलकाता से ढाका में सिर्फ 97 उड़ानें ही पहुंचीं, जिनमें 12,736 लोग सवार थे।
इसी तरह, सीमा पार करने वाले ट्रकों की संख्या में भी कमी आई है।
क्लियरिंग एजेंट संजीव मंडल ने टेलीग्राफ को बताया है, कि "पिछले कुछ दिनों में बशीरहाट के घोजाडांगा लैंड पोर्ट के जरिए प्रतिदिन लगभग 150-200 ट्रक बांग्लादेश में प्रवेश कर रहे हैं। पहले ये सामान्य संख्या प्रतिदिन लगभग 350-400 होती थी।" और पेट्रापोल में भी यही स्थिति है। पहले यहां से 400 ट्रक आते थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों में यह संख्या घटकर लगभग 200 रह गई है।
बांग्लादेश के पर्यटकों पर असर
मंगलवार (2 दिसंबर) को दोनों देशों के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब त्रिपुरा में ट्रैवल एसोसिएशन ने घोषणा की, कि वह बांग्लादेश में पर्यटकों से कोई बुकिंग स्वीकार नहीं करेगा। ऑल-त्रिपुरा होटल और रेस्तरां मालिकों के संघ ने कहा, कि होटल बांग्लादेशी पर्यटकों को कमरे नहीं देंगे और रेस्टोरेंट में उन्हें भोजन नहीं दिया जाएगा।
यह कार्रवाई उस दिन की गई, जब कथित तौर पर 50 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों ने अगरतला में बांग्लादेशी मिशन के परिसर में प्रवेश किया, जिससे परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों में दहशत फैल गई।
बुधवार (3 दिसंबर) को खबरें आईं, कि उल्लंघन के लिए तीन पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया जबकि सात प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
सरकार ने यह भी बताया है, कि भारत आने वाले बांग्लादेशी पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। अगस्त 2024 तक, बांग्लादेश और भारत के बीच यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या 2023 में 2.12 मिलियन से घटकर 1.29 मिलियन रह गई है।
इससे पहले, ढाका में एक भारतीय पर्यटक पर हमला होने की खबरें सामने आई थीं। पीड़ित सायन घोष ने कहा, कि उस पर उसकी धार्मिक पहचान के कारण हमला किया गया।

कोमा में मेडिकल सर्विस
भारत और बांग्लादेश के बीच बिगड़ते रिश्तों के बीच, उत्तरी कोलकाता के एक अस्पताल ने पिछले शनिवार को बांग्लादेशी मरीजों के बहिष्कार का आह्वान किया है। कोलकाता के मनिकतला इलाके में स्थित जीतेंद्र नारायण रे अस्पताल के प्रशासन ने कहा, कि जब तक बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले बंद नहीं हो जाते, तब तक किसी भी बांग्लादेशी नागरिक का इलाज उनके अस्पताल में नहीं किया जाएगा।
त्रिपुरा के अगरतला में स्थित स्वास्थ्य सेवा सुविधा आईएलएस अस्पताल ने भी यही किया है।
संस्थान के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है, कि "एक भारतीय के तौर पर हम आज आए लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं और उनका समर्थन करते हैं। हम यह दोहराना चाहते हैं, कि बांग्लादेशी लोगों ने हमारा अपमान किया है, हमारे लोगों के साथ बुरा व्यवहार किया है और हम उन्हें कोई सेवा नहीं देंगे।"
अस्पतालों की तरफ से लिए गये इन फैसलों का असर चिकित्सा पर्यटन पर असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, 2023 में लगभग 635,000 मेडिकल पर्यटक भारत आए थे, इनमें से लगभग 300,000-350,000 बांग्लादेश से थे।
लेकिन अशांति के कारण इन संख्याओं में पहले ही गिरावट आ चुकी है।
मौजूदा स्थिति पर बांग्लादेश ने क्या कहा?
मौजूदा उथल-पुथल के बीच, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भी माना है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में बदलाव आया है। हालांकि, इसने आपसी हितों की रक्षा के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखने को लेकर उम्मीद जताई है।
पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने खुद स्वीकार किया, कि पड़ोसी के साथ संबंध तनावपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, कि भारत ऐसी छवि बनाने की कोशिश कर रहा है कि उसके अधीन बांग्लादेश "अफगानिस्तान जैसा" बन रहा है। उन्होंने कहा कि इससे उनके देश के लिए एक नया रास्ता तय करने का पहले से ही मुश्किल काम और भी मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, "अगर आप बांग्लादेश को अस्थिर करते हैं, तो आप खुद को अस्थिर करते हैं, क्योंकि अस्थिरता के ये तत्व हर जगह, हमारे चारों ओर फैल जाएंगे।"












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