Hezbollah: इजराइली हमले में मारा गया नसरल्लाह का भाई सफीद्दीन, हिज्बुल्लाह की टॉप लीडरशिप में अब कौन बचा?

The deaths of Hassan Nasrallah and other commanders have raised questions about Hezbollah's leadership and its future capabilities in the ongoing conflict with Israel.

Israel-Hezbollah War: लेबनान पर इजराइली हमे लगातार जारी हैं और कई एक्सपर्ट्स को डर है, कि लेबनान भी अगली गाजा बनने के कगार पर पहुंच रहा है, जहां हर तरफ बर्बादी ही पसरी है। इजराइल का मुख्य लक्ष्य लेबनान की धरती से हिज्बुल्लाह के संपूर्ण विनाश की है।

27 सितंबर को निशाना बनाकर किए गये हमले में इजराइली सेना ने आतंकवादी समूह के प्रमुख हसन नसरल्लाह की हत्या कर दी थी। वहीं, हमले में हिज्बुल्लाह के कई और कमांडर भी मारे गए हैं। अब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है, कि नसरल्लाह के उत्तराधिकारी को भी मार गिराया गया है।

Israel-Hezbollah War

मंगलवार को लेबनानी लोगों को संबोधित एक वीडियो संदेश में, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है, कि इजराइल ने "हिज्बुल्लाह की क्षमताओं को कम कर दिया है, हमने हजारों आतंकवादियों को मार गिराया है, जिनमें
(लंबे समय से हिज्बुल्लाह के नेता हसन) नसरल्लाह, और नसरल्लाह के उत्तराधिकारी, और उसके उत्तराधिकारी और उत्तराधिकारी के भी उत्तराधिकारी शामिल हैं।"

उन्होंने कहा, "आज हिज्बुल्लाह पिछले कई सालों की तुलना में कमजोर है।"

हालांकि इजराइली प्रधानमंत्री ने मारे गए कमांडर का नाम नहीं बताया, लेकिन माना जा रहा है कि नसरल्लाह की मौत के बाद हाशेम सफीद्दीन, हिज्बुल्लाह की कमान संभालने वाा था, लेकिन पिछले हफ्ते बेरूत में हवाई हमले में उसे भी मार दिया गया। सऊदी अरब के एक अखबार ने उसके मारे जाने की रिपोर्ट दी है।

तीन लेबनानी सुरक्षा सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया है, कि हमले के बाद उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। हालांकि, हिज्बुल्लाह ने सार्वजनिक रूप से उसकी मौत पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यहां तक ​​कि इजराइली रक्षा बलों के प्रवक्ता ने भी इस बात की पुष्टि नहीं की है, कि सफीद्दीन मारा गया है या नहीं। आईडीएफ के प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हगारी ने मीडिया से कहा, "हमने बेरूत में हिज्बुल्लाह के खुफिया मुख्यालय पर हमला किया... यह खुफिया विभाग के प्रमुख अबू अब्दुल्ला मोर्तदा का मुख्यालय है।"

उन्होंने कहा कि हाशेम सफीद्दीन मुख्यालय में था। उन्होंने कहा, "इस हमले के परिणामों की अभी भी जांच की जा रही है, हिज्बुल्लाह विवरण छिपाने की कोशिश कर रहा है। जब हमें पता चलेगा, तो हम जनता को अपडेट करेंगे।"

ऐसे में आइये जानते हैं, कि हिज्बुल्लाह का शीर्ष नेतृत्व कितना कमजोर हो गया है और टॉप लीडरशिप के सफाये से इस आतंकवादी संगठन पर कितना असर पड़ा है?

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हाशेम सफीद्दीन कौन था?

अपने चचेरे भाई हसन नसरल्लाह की तरह, 60 वर्षीय सफीद्दीन भी हिज्बुल्लाह के शुरुआती सदस्यों में से एक है, जो 1980 के दशक में इस समूह में शामिल हुआ था। वो नसरल्लाह के साथ-साथ तेजी से आगे बढ़ रहा था और संगठन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहा था। वो संगठन को राजनीतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नेता के रूप में सेवा कर रहा था, लेकिन अब उसकी मौत की रिपोर्ट है।

हिज्बुल्लाह में वो तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते हुए जिहादी परिषद में शामिल हो गया, जो सैन्य गतिविधियों को नियंत्रित करती है, वहीं वो गवर्निंग कंसल्टेटिव असेंबली में भी शामिल हो गया।

यह बताया गया है, कि अब हिज्बुल्लाह के इस नेता के ईरान के साथ घनिष्ठ संबंध थे और जिसे उसने ईरानी शहर कोम में इस्लामिक पढ़ाई के दौरान विकसित किए थे। उसने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के कुद्स फोर्स के कमांडर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी के साथ भी घनिष्ठ संबंध विकसित किए, जिनकी 2020 में बगदाद में अमेरिकी हवाई हमले में मृत्यु हो गई थी। इसके अलावा, सफीद्दीन के बेटे रेजा हाशेम सफीद्दीन की शादी ईरानी जनरल की बेटी ज़ैनब सुलेमानी से हुई है।

मई 2017 में, अमेरिका ने हिज्बुल्लाह में उसकी प्रमुख भूमिका के लिए हाशेम सफीद्दीन को आतंकवादी घोषित कर दिया था और उसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया था।

हिज्बुल्लाह की टॉप लीडरशिप में अब कौन बचा है?

इजराइली हमलों में हसन नसरल्लाह के साथ साथ इब्राहिम अकील, अली कराकी जैसे वरिष्ठ नेता भी मारे जा चुके हैं। और कई विशेषज्ञों का मानना ​​है, कि इन हत्याओं ने लेबनान स्थित आतंकवादी समूह को बहुत बड़ा झटका दिया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है, कि उनके पास दिशा या नेतृत्व की कमी है।

71 साल का नईम कासिम, जो 1991 से हिज्बुल्लाह का उप महासचिव है और जिसे हिज्बुल्लाह का नंबर-2 माना जाता रहा है, अब वो हिज्बुल्लाह की कमान संभाल सकता है। कासिम को हिजdबुल्लाह के दिवंगत महासचिव अब्बास अल-मुसावी की जगह पर उप-महासचिव नियुक्त किया गया था, जिनकी 1992 में एक इजराइली हेलीकॉप्टर हमले में मौत हो गई थी, और नसरल्लाह के नेता बनने के बाद भी वे इस पद पर बने रहे।

नबातियेह गवर्नरेट के कफर किला में जन्मे, शिया राजनीतिक सक्रियता में उनका लंबा इतिहास रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है, कि समूह के भीतर उसने कौन सी भूमिकाएं निभाई हैं, लेकिन ऐसा कहा जाता है, कि उसने हिज़्बुल्लाह के शैक्षिक नेटवर्क के एक हिस्से की देखरेख की है और समूह की संसदीय गतिविधियों की देखरेख में भी शामिल रहा है।

सोमवार को, नसरल्लाह की हत्या के बाद, उसने एक सार्वजनिक भाषण भी दिया था, जिसमें उसने कहा था, कि "हिज्बुल्लाह के लड़ाके जमीनी ऑपरेशन में इजराइल का सामना करने के लिए तैयार हैं।" उसने कहा था, कि "हम किसी भी संभावना का सामना करेंगे और अगर इजराइली जमीन से प्रवेश करने का फैसला करते हैं, तो प्रतिरोध बल जमीनी लड़ाई के लिए तैयार है।"

हिजबुल्लाह के बाहरी ऑपरेशन के प्रभारी तलाल हामिह और हिज्बुल्लाह की सुरक्षा इकाई के प्रमुख खोदोर नादर भी अभी जीवित हैं। इसके अलावा, बद्र क्षेत्रीय प्रभाग के कमांडर अबू अली रिदा भी जीवित है। हालांकि, इन लोगों के वर्तमान ठिकाने के बारे में कोई नहीं जानता।

हिज्बुल्लाह की राजनीतिक शाखा से, इब्राहिम अमीन अल-सैय्यद, जो समूह की राजनीतिक परिषद के प्रमुख के रूप में काम करता है, वो और लेबनानी संसद में हिज्बुल्लाह के ब्लॉक के प्रमुख मोहम्मद राद भी अभी जिंदा है।

क्या हिज्बुल्लाह में अभी भी इजराइल से लड़ने की क्षमता है?

कुछ नेताओं के जिंदा रहने की वजह से, कई लोग पूछ रहे हैं, कि क्या यह हिज़्बुल्लाह के अंत का संकेत है। इसका उत्तर सीधे हां या नहीं में नहीं है। लंदन में एक नीति संस्थान चैथम हाउस की एसोसिएट फेलो लीना खातिब ने टाइम्स ऑफ इजराइल से कहा है, कि "नसरल्लाह के मारे जाने या अक्षम होने से हिज्बुल्लाह का पतन नहीं होगा, लेकिन यह समूह के मनोबल के लिए एक बड़ा झटका होगा। यह इजराइल की सुरक्षा और सैन्य श्रेष्ठता और पहुंच को भी रेखांकित करेगा।"

अन्य विशेषज्ञों का भी मानना ​​है, कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी, कि इन हत्याओं से हिज्बुल्लाह को कोई खास नुकसान पहुंचेगा या नहीं। चैथम हाउस थिंकटैंक के मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम के प्रमुख सनम वकील ने एक्स पर लिखा कि "हिज्बुल्लाह और हमास दोनों ही हार गए हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से खत्म नहीं हुए हैं। लड़ाई जारी रहने से निस्संदेह लड़ाकों की एक और पीढ़ी को संगठित किया जाएगा, भले ही वे कट्टरपंथी न बनें।"

वरिष्ठ पत्रकार जैक खोरी ने भी हारेत्ज़ द्वारा प्रकाशित एक लेख में इसी तरह का विचार व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है, कि "यह हिज्बुल्लाह नेता की पहली टारगेटेड हत्या नहीं है, जिसे इजराइल ने अंजाम दिया है ... यह जल्दी ही पता चल गया, कि उनके प्रतिस्थापन ने और ज्यादा उग्रवादी नेता पैदा किया है।"

कई विश्लेषक हिज्बुल्लाह के पूर्व प्रमुख अब्बास अल-मुसावी की हत्या की तरफ इशारा करते हैं, जिसे इजराइल ने मार दिया था। उसके मारे जाने के बाद भी समूह के सदस्यों ने हार मानने के बजाय समूह के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। कुछ लोगों का मानना ​​है, कि कमांडरों की मौत से हिज्बुल्लाह का संकल्प और मजबूत होगा। इससे क्षेत्र में हिज्बुल्लाह से जुड़े अन्य खिलाड़ियों की भी अधिक भागीदारी देखने को मिलेगी और हूती विद्रोही और इराकी कताइब हिज्बुल्लाह भी इस क्षेत्र में सक्रिय होगा।

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