श्रीलंका में हथिनी ने जुड़वां बच्चों को दिया जन्म, 1941 के बाद पहली बार हुई यह दुर्लभ घटना
श्रीलंका के मुख्य हाथी अनाथालय में मंगलवार को एक हथिनी ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, जो अपने आप में एक दुर्लभ घटना है। हथिनी का नाम सुरंगी है और उसने दो स्वस्थ नर बछड़ों को जन्म दिया है।
कोलंबो, 1 सितंबर। श्रीलंका के मुख्य हाथी अनाथालय में मंगलवार को एक हथिनी ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, जो अपने आप में एक दुर्लभ घटना है। हथिनी का नाम सुरंगी है और उसने दो स्वस्थ नर बछड़ों को जन्म दिया है। हाथी विशेषज्ञ जयंता जयवर्धने के अनुसार, 1941 के बाद से श्रीलंका की कैद में पैदा हुए ये पहले जुड़वां हाथी हैं। पिनावाला हाथी अनाथालय की प्रमुख रेणुका भंडारनायके ने मीडिया को बताया कि दोनों बच्चे और मां एकदम स्वस्थ हैं।

दूसरी बार मां बनी सुरंगी
उन्होंने कहा कि बच्चे अपेक्षाकृत छोटे हैं, लेकिन स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि सुरंगी ने 2009 में एक नर बछड़े को जन्म दिया था और यह दूसरी बार मां बनी है। इन बच्चों का पिता 17 वर्षीय पांडू भी हाथी अनाथालय में रह रहे 81 हाथियों में से एक है। यह अनाथालय 1975 में बेसहारा जंगली हाथियों की देखभाल के लिए बनाया गया था। यह अनाथालय सैलानियों का प्रमुख पर्यटन केंद्र है जिसे कोरोना वायरस के कारण फिलहाल सैलानियों के लिए बंद कर दिया गया है। पिछले साल, वन्यजीव अधिकारियों ने कहा कि श्रीलंका में जंगल में पैदा हुए पहले ज्ञात जुड़वां बच्चों को द्वीप के पूर्व में मिनेरिया अभयारण्य में देखा गया था।

हाथियों की देखभाल के लिए सरकार ने बनाए कड़े नियम
सरकार ने बहुसंख्यक बौद्ध राष्ट्र में पवित्र माने जाने वाले जानवरों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम बनाए हैं। कई अमीर श्रीलंकाई लोग, कई बौध भिक्षु हाथियों को पालतू जानवर के रूप में रखते है, लेकिन ऐसी कई खबरें आई हैं कि वे उनकी अच्छी तरह देखभाल नहीं कर पाते। सरकार ने ऐसे लोगों को ध्यान में रखते हुए कड़े नियम बनाए हैं। नियम तोड़ने वालों को हाथी को सरकारी देखरेख में सौंपना होगा और ऐसे व्यक्ति को 3 साल की सजा का भी प्रावधान है।

जंगली हाथियों को पकड़ने पर मौत की सजा का प्रावधान
सरकारी आंकड़े के अनुसार श्रीलंका में 200 पालतू और लगभग 7,500 जंगली हाथी हैं। जंगली हाथियों को पकड़ना श्रीलंका में अपराध है और इसके लिए मौत की सजा भी दी जा सकती है, लेकिन ऐसे मामले सामने कम ही आ पाते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले 15 वर्षों में वन्यजीव पार्कों से 40 से अधिक हाथियों के बच्चे चोरी हो चुके हैं।












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