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ट्रम्प ने कार्यकाल के आखिर में बदल दिया H1-B वीजा नियम, भारतीयों पर होगा बड़ा असर

H1-B Visa Update: वाशिंगटन डीसी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के आखिरी दिनों में H-1B वीजा में कम्प्यूटरीकृत लॉटरी सिस्टम को समाप्त कर इसकी जगह वेतन आधारित चयन प्रक्रिया लागू कर दी है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा कानून में बदलाव का भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर करने वाला है। ट्रम्प ने विदेशों से नौकरी के लिए अमेरिका आने वाले प्रोफेशनल की संख्या कम करने के लिए ये प्रस्ताव दिया था। बड़ी संख्या में भारतीय आईटी प्रोफेशनल अमेरिका जाते हैं।

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    बाइडेन प्रशासन से हैं उम्मीदें

    बाइडेन प्रशासन से हैं उम्मीदें

    राष्ट्रपति ट्रम्प के कार्यकाल के इस बड़े नियम को अगले 60 दिनों में लागू कर दिया जाएगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका के अगले राष्ट्रपति जो बाइडेन, जो कि 20 जनवरी को कार्यकाल संभालने वाले हैं, वह इस कानून को वापस लेते हैं या नहीं। बाइडेन पहले ट्रम्प के इस कदम का विरोध कर चुके हैं और उम्मीद की जा रही है कि वे इसे पलट देंगे।

    ट्रम्प प्रशासन ने 3 नवम्ब को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से कुछ दिन पहले ही H-1B वीजा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया था और इस पर लोगों से सुझाव मांगे गए थे। इस प्रस्ताव के बारे में कहा गया था कि लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन आधारित व्यवस्था शुरू करने से देश में अमेरिकी कर्मचारियों के भत्तों पर पड़ने वाले दबाव में कमी आएगी जो कि विदेशी पेशेवरों के कम भत्ते में काम करने के कारण पड़ती है।

    ज्यादा वेतन वालों मिलेगा पहले वीजा

    ज्यादा वेतन वालों मिलेगा पहले वीजा

    नए नियमों के मुताबिक अब एच1 बी वीजा में उन्हें वरीयता दी जाएगी जिनका अपने पेशे के अनुसार वेतन ज्यादा होगा। इसके लिए वेतन के चार स्तर बनाए गए हैं। कम्पनियों को विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करते समय सबसे पहले लेवल-4 (जो कि सबसे ज्यादा सेलरी वाले हैं) के अंदर आने वालों का चयन करना होगा। इसके बाद कम्पनी को लेवल-3 और फिर नीचे के क्रम में जाना होगा जब तक कि 85000 एच1 बी वीजा की सीमा पूरी नहीं हो जाती।

    पहले अमेरिकी कम्पनियों को विदेशी पेशेवर कम कीमत पर मिल जाते थे। ट्रम्प प्रशासन का कहना था कि ऐसा करने से अमेरिकी लोगों को कम वेतन पर काम करने पर मजबूर होना पड़ता है या फिर कम्पनियां उनकी जगह कम वेतन पर काम करने वाले विदेशी पेशेवरों को वरीयता देती हैं। ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि अगर विदेशी पेशेवरों की भी वेतन की राशि बढ़ा दी जाए तो कम्पनियां अमेरिकी लोगों को रोजगार देंगी।

    अदालत में चुनौती देने की तैयारी

    अदालत में चुनौती देने की तैयारी

    कानूनी जानकारों का कहना है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा लाया गया यह बदलाव अदालत में ठहर नहीं पाएगा। ट्रम्प प्रशासन उस नियम को नहीं नष्ट कर सकता जिसने सभी कौशल स्तर पर लोगों को काम पर रखने की अनुमति दी है। पहले भी डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा लाए गए कई नियमों को अदालतों में खारिज किया जा चुका है।

    कुक बैक्सर इमिग्रेशन एलएलसी के मैनेजिंग पार्टनर चार्ल्स कुक ने ट्वीट किया नया एच1 बी लॉटरी सिस्टम विनियमन अभी लागू हुआ है। यह अब एक अवैध रूप से वेतन पर आधारित लॉटरी है। इस बकवास को खत्म करने के लिए जल्द ही मुकदमा दायर किया जाएगा। ट्रम्प और उनके राष्ट्रवादी प्रशंसकों के लिए 'रूल ऑफ़ लॉ' कोई मायने नहीं रखता है।

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