मोसाद की तर्ज पर ऑपरेशन, पाकिस्तान में RAW ने चुन-चुनकर मारे आतंकी.. द गार्जियन के दावे पर क्यों उठे सवाल?
Guardian Report on Indian Operation in Pakistan: ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट में भारतीय और पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के नामों को गुमनाम रखते हुए दावा किया गया है, कि भारत सरकार, विदेशी धरती पर रहने वाले आतंकवादियों को खत्म करने की व्यापक रणनीति के तहत पाकिस्तान में टारगेट किलिंग्स में शामिल रही है।
ब्रिटिश अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों में जिन आतंकवादियों की हत्याएं हुए हैं, वो भारत के इशारे पर की गई हैं और इसके पीछे भारत की खुफिया एजेंसी शामिल हैं। हालांकि, गार्डियन की इस रिपोर्ट पर अब भारत सरकार की भी प्रतिक्रिया आ गई है।

ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट में में दावा किया गया है, उसने दोनों देशों के अधिकारियों से इंटरव्यू लिए हैं और पाकिस्तान के जांचकर्ताओं ने उसे दस्तावेज दिए हैं, जिससे पता चलता है, कि भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) पाकिस्तान में हुए टारगेट किलिंग्स में शामिल रही हैं।
द गार्डियन की रिपोर्ट में क्या दावे किए गये?
द गार्डियन की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय, यानि PMO सीधे तौर पर रॉ को नियंत्रित करता है और 2019 के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा उपाय के रूप में इन गैर-न्यायिक हत्याओं को अंजाम दिया गया है।
हालांकि, आरोप मुख्य रूप से गंभीर आतंकी आरोपों का सामना करने वाले व्यक्तियों से संबंधित हैं, जबकि पिछले दिनों भारत को कनाडा में एक सिख कार्यकर्ता सहित असंतुष्टों की मौत और पिछले साल अमेरिका में एक अन्य सिख पर असफल हत्या के प्रयास के संबंध में वाशिंगटन और ओटावा से सार्वजनिक आरोपों का भी सामना करना पड़ा है।
अमेरिका के नक्शे-कदम पर पाकिस्तान?
हालांकि, इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि भारत में इलेक्शन से ठीक पहले आई इस रिपोर्ट को पाकिस्तान समर्थित पत्रकारों ने लिखा है और रिपोर्ट में खुद कहा गया है, कि आईएसआई ने उसे दस्तावेज सौंपे हैं, लिहाजा माना जा रहा है, कि जिस तरह से फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में पहली बार खालिस्तानी आतंकी पन्नून की हत्या की कोशिश को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी और फिर अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाना शुरू किया था, उसी तरह की ये कोशिश पाकिस्तान की भी है और उसने अपने पालतू पत्रकारों को इस काम में लगा दिया है।
लेकिन, कई एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है, कि एक तो पाकिस्तान अमेरिका नहीं है और दूसरी बात ये, कि ये रिपोर्ट नरेन्द्र मोदी की सरकार को जेम्स बांड की तरह इमेज बनाती है और चुनाव में मोदी सरकार को इसका जबरदस्त फायदा मिल सकता है, क्योंकि मोदी सरकार लगातार कहती रही है, कि 'दुश्मन को घर में घुसकर मारेंगे' और ये रिपोर्ट उसी दावे की पुष्टि है।
2020 से 20 हत्याएं करने का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि पाकिस्तान में 2020 से लगभग 20 हत्याएं अज्ञात बंदूकधारियों ने की हैं और इन हत्याओं में कथित तौर पर भारतीय खुफिया जानकारी शामिल थी। इन अभियानों में कथित तौर पर पाकिस्तान के भीतर और विदेशों में खालिस्तान आंदोलन से जुड़े सिख अलगाववादियों को निशाना बनाया गया।
इस रिपोर्ट में पाकिस्तानी जांचकर्ताओं का आरोप है, कि मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से संचालित होने वाले भारतीय खुफिया स्लीपर सेल ने इन हत्याओं को अंजाम दिया है।
जबकि, इस रिपोर्ट में भारतीय खुफिया अधिकारियों के हवाले से लिखा गया है, कि साल 2019 में पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन को लेकर भारत का नजरिया बदल गया और भारत ने विदेशों में आतंकवादियों को मारने की मोसाद की तर्ज पर काम करना शुरू किया।
द गार्जियन की इस रिपोर्ट में कहा गया है, कि इन हत्याओं को संयुक्त अरब अमीरात से कॉर्डिनेट किया गया था, जहां रॉ ने ऑपरेशन के विभिन्न पहलुओं की निगरानी और अपराधियों की भर्ती के लिए स्लीपर सेल की स्थापना की है। इन हत्याओं के एवज में भुगतान कथित तौर पर दुबई के रास्ते किया गया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है, कि हत्याओं को लेकर कॉर्डिनेशन अन्य देशों में भी किए गये हैं।
मोसाद और केजीबी की तरह रॉ का ऑपरेशन?
रिपोर्ट में कहा गया है, कि विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान सार्वजनिक रूप से हत्याओं को स्वीकार करने से हिचकता रहा है, क्योंकि ज्यादातर वो आतंकी मारे गये हैं, जो या तो प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़े हुए हैं, या फिर जो वांटेड आतंकवादी हैं और जिन्हें इस्लामाबाद लंबे समय से शरण देने से इनकार करता रहा है।
रिपोर्ट में भारतीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया है, कि इस तरह के ऑपरेशन में हाई लेवल मंजूरी की जरूरत होती है।
भारतीय अधिकारी ने कहा, कि भारत ने इजराइल की मोसाद और रूस की केजीबी जैसी खुफिया एजेंसियों से प्रेरणा ली है, जो विदेशी धरती पर हत्याओं से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा, कि सऊदी पत्रकार और असंतुष्ट जमाल खशोगी की हत्या, जिनकी 2018 में सऊदी दूतावास में हत्या कर दी गई थी, रॉ के अधिकारियों ने सीधे तौर पर उसका उदाहरण दिया है।
आपको बता दें, कि जमाल खशोगी की हत्या को लेकर अमेरिका का आरोप है, कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इस हत्या के आदेश दिए थे, जिसके बाद उन्हें तुर्की के सऊदी अरबू दूतावास में मार दिया गया था।
अधिकारी ने कहा, कि "2018 में हुए जमाल खशोगी की हत्या के कुछ महीने बाद भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय में खुफिया विभाग के शीर्ष अधिकारियों के बीच इस बात पर बहस हुई थी, कि इस मामले से कैसे कुछ सीखा जा सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक बैठक में कहा, कि अगर सउदी ऐसा कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं?"
भारतीय अधिकारी ने कहा, कि "सऊदी अरब ने जबरदस्त काम किया है और इस तरीके से ना सिर्फ दुश्मन से छुटकारा पा लिया जाता है, बल्कि दुश्मनों और आपके खिलाफ काम करने वालों को एक भयायह चेतावनी भी जाती है। हर खुफिया एजेंसी ऐसा करती रही है। अपने शत्रुओं पर शक्ति का इस्तेमाल किए बिना हमारा देश मजबूत नहीं हो सकता।"
रिपोर्ट पर भारत ने क्या कहा?
वहीं, द गार्जियन की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने सभी आरोपों से इनकार कर दिया है और भारत ने कहा है, कि ये रिपोर्ट दुर्भावनापूर्ण और भारत के खिलाफ चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा का हिस्सा हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के उस बयान को फिर से दोहराया है, कि किसी भी देश में टारगेट किलिंग्स में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है।












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