BrahMos: भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीद सकता है तुर्की का जानी दुश्मन, अर्दोआन के होश ठिकाने लगाएंगे PM मोदी?
BrahMos vs S-400: तुर्की के सबसे बड़े दुश्मन ग्रीक ने भारतीय ब्रह्मास्त्र, यानि दुनिया के सबसे खतरनाक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइस ब्रह्मोस खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है और अगर भारत और ग्रीक के बीच ये समझौता हो जाता है, तो तुर्की की नींद हमेशा के लिए उड़ जाएगी।
साल 2023 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ग्रीक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध को लेकर दरवाजा खोल दिया गया था और उस दौरान दोनों देशों ने डिफेंस सेक्टर में नये करार करने पर सहमति जताई थी।

भारतीय ब्रह्मोस पर आया ग्रीक का दिल
ग्रीक और तुर्की में कुछ कुछ ऐसे ही संबंध हैं, जैसे संबंध भारत और पाकिस्तान के बीच रहे हैं। और हाल ही में, ग्रीक मीडिया में एजियन सागर और क्रेते सागर में तुर्की के नापाक मंसूबों का मुकाबला करने के लिए "भारत से रणनीतिक हथियार", ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की आवाजें तेज हो गई हैं।
प्रधान मंत्री मोदी की ग्रीक यात्रा, 1983 में इंदिरा गांधी की ग्रीक की यात्रा के बाद चार दशकों में किसी भारतीय प्रधान मंत्री की पहली यात्रा थी। ग्रीक के प्रधान मंत्री क्यारीकोस मित्सोटाकिस ने फरवरी 2024 में भारत की यात्रा की थी और उसके बाद से ही ग्रीक की मीडिया में लगातार ब्रह्नोस खरीदने को लेकर चर्चा की जा रही है।
ग्रीक मीडिया एजियन ने, क्रेते और साइप्रस के बीच संपूर्ण भौगोलिक सीमा में देश की नौसैनिक शक्ति को बढ़ाने के लिए ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइल हासिल करने के लिए एक मजबूत मामला बना रहा है।
ग्रीक सिटी टाइम्स ने एक लेख में तर्क दिया है, कि "पूर्वी एजियन द्वीपों (जिसे तुर्की अपना मानता है और आरोप लगाता है, कि ग्रीक ने उसपर अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है) को ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस करना होगा। जिसके बाद तुर्की नौसैनिक जहाजों के पास इस क्षेत्र में आने पर बचने के लिए कुछ सेकंड्स का ही समय होगा।
ग्रीक के एक्सपर्ट्स ब्रह्मोस पर क्या कह रहे हैं?
ग्रीक के दो अहम डिफेंस एक्सपर्ट, जिनमें थिसली विश्वविद्यालय के इमैनुएल मारियोस इकोनोमो और निकोस के. किरियाज़िस शामिल हैं, उन्होंने ब्रह्मोस के अधिग्रहण की वकालत की है। उन्होंने कहा है, कि तुर्की की आक्रामकता को काउंटर करने के लिए भारत से ब्रह्मोस मिसाइल हासिल करनी चाहिए।
इकोनोमो और किरियाज़िस का तर्क है, कि ग्रीक के पूर्वी एजियन द्वीपों पर ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती तुर्की नौसेना के लिए इन द्वीपों की तरफ एंट्री रोक देगी।
उनका दावा है, कि ब्रह्मोस पारंपरिक बड़े नौसैनिक जहाजों की तुलना में लागत प्रभावी समाधान प्रदान करता है, जिसके बारे में उनका तर्क है, कि वे एडवांस मिसाइल प्रणालियों के प्रति काफी संवेदनशील हैं। उनका अनुमान है, कि एक ब्रह्मोस मिसाइल की कीमत लगभग 3.5 मिलियन डॉलर होगी, जिससे लॉन्चर और रडार के साथ 150 मिसाइलों का पैकेज तुलनात्मक रूप से ग्रीक के लिए एक सस्ता मगर काफी असरदार विकल्प होगा।
दुनिया में तेजी से बढ़ रही ब्रह्मोस की डिमांड
आपको बता दें, कि ब्रह्मोस मिसाइल 1980 के दशक के अंत में रुतोव डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित सोवियत काल की एंटी-शिप मिसाइलों (ओनिक्स) का एक संशोधन है। यह नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम को मिलाकर लिया गया है।
साल 2016 में भारत और रूस के बीच ब्रह्मोस मिलाइलों को किसी तीसरे देश को बेचने को लेकर सहमति बनी थी, जिसके बाद फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीद लिया है और उसने और नये ब्रह्मोस मिसाइल के लिए ऑर्डर दिया है। जबकि, अभी दक्षिण कोरिया, अल्जीरिया, ग्रीक, मलेशिया, थाईलैंड, मिस्र, सिंगापुर, वेनेजुएला, संयुक्त अरब अमीरात, चिली, दक्षिण अफ्रीका और वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल को बेचने को लेकर बात चल रही है।
टेक्नोलॉजी के लिहाज से ब्रह्मोस मिसाइल सॉलिड प्रणोदक बूस्टर के साथ रैमजेट-संचालित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भूमि-आधारित कनस्तरों, पनडुब्बियों, जहाजों और अब विमान से लॉन्च किया जा सकता है। यह मैक 2.8 से 3.0 की रफ्तार से चलता है, लेकिन मैक 5.0 से भी तेज गति से चलने के लिए इसे अपग्रेड किया जा रहा है, जिसके बाद ये सुपरसोनिक से हाइपरसोनिक मिसाइल बन जाएगी।
इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है, कि ब्रह्मोस मिसाइल जमीन से काफी कम ऊंचाई पर ऊड़ान भरती है, लिहाजा दुनिया का कोई डिफेंस सिस्टम इस ट्रैक नहीं कर पाते हैं। टर्मिनल चरण के दौरान मिसाइल जमीन से महज 10 मीटर नीचे तक उड़ सकती है।

तुर्की को काउंटर करना है ग्रीक का मकसद
तुर्की की मीडिया का कहना है, कि ब्रह्मोस मिसाइल समुद्री तट से 300 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बना सकती है, इस प्रकार यह एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र को कवर कर सकती है। इसमें दावा किया गया है, कि क्षेत्र में ब्रह्मोस मिसाइलों की मौजूदगी से ग्रीक आर्मडा के लिए काम आसान हो जाएगा।
ग्रीक की मीडिया का दावा है, कि "ब्रह्मोस, अमेरिका की कुख्यात टॉमहॉक क्रूज मिसाइल या यूक्रेनी नौसैनिक नेपच्यून मिसाइल जैसी सबसोनिक मिसाइलों की तुलना में काफी ज्यादा विनाशकारी प्रहार करता है, जिसने अप्रैल 2022 में स्नेक आइलैंड में रूसी बेड़े के प्रमुख, प्रसिद्ध मिसाइल क्रूजर मोस्कवा को डुबो दिया था।"
भले ही 2023 में आए घातक भूकंपों के बाद तुर्की और ग्रीक के बीच कुछ नरमी आई थी, लेकिन हाल ही में तुर्की ने अपनी आक्रामकता बढ़ा दी है। "ब्लू होमलैंड" अवधारणा तुर्की की क्षेत्रीय आकांक्षाओं को उसकी मौजूदा सीमाओं से परे विस्तारित करती है। राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के लंबे समय से चले आ रहे शासनकाल के दौरान ग्रीक को लेकर काफी नफरत भरी गई है।
दूसरी तरफ, भारत के भी तुर्की के साथ तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। कश्मीर मुद्दे पर अंकारा बार बार नई दिल्ली पर निशाना साधता रहता है और पाकिस्तान का पक्ष लेता रहता है, लिहाजा भारत के ग्रीक के साथ काफी अच्छे संबंध बने हैं। भारत ने भी तुर्की के होश ठिकाने लगाने के लिए ग्रीक से डिफेंस एग्रीमेंट्स किए हैं, लिहाजा एजियन सागर में ब्रह्मोस जल्द ही एक वास्तविकता बन सकता है।












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