चीनी मीडिया ने अब भारत के विपक्षी नेताओं को धमकाया, गलवान पर राहुल ने पूछा था पीएम मोदी से सवाल

गलवान घाटी का वीडियो जैसे ही चीन की तरफ से शेयर किया गया था, ठीक वैसे ही भारत में राजनीतिक भूकंप मच गया था और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पीएम मोदी से गलवान घाटी को लेकर सवाल पूछा था।

बीजिंग/नई दिल्ली, जनवरी 05: चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी एक बार फिर से भारतीय नेताओं को लेकर आक्रामक है और ग्लोबल टाइम्स ने भारत के विपक्षी नेताओं को धमकाने की कोशिश की है। पिछले महीने भारतीय सांसदों को चिट्ठी लिखने वाले चीन ने इस बार भारत के विपक्षी नेताओं को मसीहत दी है, कि वो सीमा विवाद के मुद्दे पर कोई सवाल नहीं करें। आपको बता दें कि, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने पीएम मोदी से गवलान घाटी को लेकर सवाल पूछे थे, उसी को लेकर चीन भड़क गया है।

भारतीय विपक्ष पर भड़का चीन

भारतीय विपक्ष पर भड़का चीन

चीन की सरकार का भोंपू ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में भारतीय विपक्ष को नसीहत देने की कोशिश की है और कहा है कि, भारतीय नेताओं को चीन विरोधी भावना से नये साल की मिटाई को बुलेट में बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। आपको बता दें कि, नये साल के मौके पर भारत और चीन के सैनिकों ने एक दूसरे को मिठाइयां बांटी थी, लेकिन उसी दिन चीन की तरफ से एक वीडियो जारी कर दिया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि, चीन के सैनिक गलवान घाटी में मौजूद हैं और वहां पर चीन का ध्वज फहरा रहे हैं, जिसके बाद भारत में राजनीतिक बवाल मच गया था।

फिर से बढ़ा भारत-चीन में विवाद

फिर से बढ़ा भारत-चीन में विवाद

गलवान घाटी का वीडियो जैसे ही चीन की तरफ से शेयर किया गया था, ठीक वैसे ही भारत में राजनीतिक भूकंप मच गया था और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पीएम मोदी से गलवान घाटी को लेकर सवाल पूछ लिया था। राहुल गांधी के अलावा भी कई विपक्षी नेताओं ने भारत सरकार से गलवान घाटी की स्थिति को साफ करने के लिए कहा था। जिसके बाद अब ग्लोबल टाइम्स ने भारत के विपक्षी नेताओं को नसीहत देने की कोशिश की है।

विपक्ष पर बरसा ग्लोबल टाइम्स

विपक्ष पर बरसा ग्लोबल टाइम्स

ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में लिखा है कि, ''2022 के पहले दिन चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 10 स्थानों पर बधाई और मिठाइयों का आदान-प्रदान किया। करीब 20 महीने पहले चीन-भारत सीमा गतिरोध शुरू होने के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेजीं। कई मीडिया इसे एक संकेत के रूप में देखते हैं कि चीन-भारत संबंध स्थिर हो रहे हैं। इसके अलावा, इस आयोजन ने चीन-भारत कोर कमांडर स्तर की बैठक के आगामी अगले दौर के साथ-साथ चीन-भारत संबंधों के आगे सुधार और विकास के लिए एक बेहतर माहौल तैयार किया है। लेकिन, ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि, भारत का विपक्ष मोदी सरकार से सवाल पूछ रहा है कि, और सरकार पर चीन के सामने आत्मसमर्पण करने का आरोप लगा रहा है''।

''लोग कर रहे हैं सराहना''

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि, सीमा पर चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच प्रमुख त्योहारों पर मिठाइयों के आदान-प्रदान की परंपरा रही है। यह पिछले दो वर्षों में सीमा संघर्ष होने के बाद रुका हुआ था, लेकिन फिर से शुरू हुई परंपरा के संदेशों को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया गया है। एक चीनी नागरिक ने कहा कि, गोलियों से बेहतर है कि एक दूसरे को मिठाई भेजें। लेकिन दुर्भाग्य से, भारत में विपक्ष ने मोदी प्रशासन पर "चीन के सामने आत्मसमर्पण करने" का आरोप लगाते हुए इस घटना को प्रचारित करने का एक मौके की तरह लिया।''

भारत में कौन हैं चीनी कट्टरपंथी?

भारत में कौन हैं चीनी कट्टरपंथी?

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि, ''मिठाई को भी बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता है। यह इस बात का प्रतीक है कि चीन-भारत संबंध स्थिर हो रहे हैं, लेकिन समय-समय पर इसमें गड़बड़ी हुई है। इसका एक कारण यह है कि कुछ कट्टरपंथी चीन विरोधी लोग हैं जो 1962 के सीमा संघर्ष के कारण चीन-भारत संबंधों को कमजोर नहीं कर सकते हैं, लेकिन भारत में तेजी से ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति बढ़ने की वजह से ऐसा हुआ है और ये लोग "विरोध के लिए विरोध करते हैं।'' आगे लिखा गया है कि, " हालांकि ऐसी आवाजें भारत की मोदी सरकार की विदेश नीति को प्रभावित नहीं कर पाई हैं, लिहाजा मोदी सरकार का विरोध बढ़ रहा है। भारतीय समाज में एक माहौल बनता दिख रहा है, जो चीन की तो प्रशंसा करता है, लेकिन चीन के साथ सहयोग को पॉलिटिकल और डिप्लोमेटिक तरीके से गलत बताता है''।

'अमेरिकीकृत हुई भारत की घरेलू राजनीति'

'अमेरिकीकृत हुई भारत की घरेलू राजनीति'

ग्लोबल टाइम्स ने इसके अलावा भारत की राजनीति पर भी निशाना साधने की कोशिश की है और लिखा है कि, भारत की घरेलू राजनीति भी अमेरिका की तरह ही तेजी से विभाजित होती जा रहगी है और कुछ कट्टरपंथी राजनेता अपने फायदे के लिए चीन-भारत संबंधों पर बेईमानी से अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कीचड़ उछाल रहे हैं।'' ग्लोबल टाइम्स आगे लिखता है कि, भारत के ऐसे नेता लोगों के बीच चीन विरोधी भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे नेताओं से यह नहीं होता है कि, भारत को एक बड़ी शक्ति बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को साकार करने में मदद करें।

ग्लोबल टाइम्स में मोदी की तारीफ

ग्लोबल टाइम्स में मोदी की तारीफ

इसके अलावा ग्लोबल टाइम्स में पहली बार भारत की मोदी सरकार की तारीफ की गई है और लिखा है कि, 2019 में पीएम मोदी ने 2025 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि "21 वीं सदी भारत की सदी है।" ये सभी दिखाते हैं कि भारत की पहली प्राथमिकता अब विकास है, युद्ध में शामिल होना नहीं है।'' इसके साथ ही ग्लोबल टाइम्स मे भारत को सलाह देते हुए कहा गया है कि, भारत के नेताओं और नीति निर्धारण करने वाले नेताओं को चीन के साथ रिश्ते को खुले दिमाग से संभालना चाहिए। इसके साथ ही ग्लोबल टाइम्स ने भारत सरकार को ऐसी लोकलुभावन आवाज से निपटने की सलाह दी है, जो चीन विरोधी हैं और जो मुद्दों पर हावी हो रही हैं।

'भारत का फायदा उठाने की कोशिश'

'भारत का फायदा उठाने की कोशिश'

इसके साथ ही ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि, भारतीय मीडिया ऑउटलेट अमेरिका और पश्चिमी देशों की चीन विरोधी नीति को काफी विस्तार से दिखाता है और इसका असर भारत के पढ़े लिखे और संभ्रांत परिवारों पर पड़ता है और उनमें चीन विरोधी मानसिकता भरने लगती है और भारत के अभिजात वर्क के बीच चीन विरोधी भावना प्रबल होती जा रही है। इसके साथ ही लिखा गया है कि ''हाल के सालों में अमेरिका और पश्चिमी देशों ने इंडो-पैसिफिक में अपने कार्यक्रम बढ़ाए हैं और क्वाड का निर्माण किया है, लेकिन भारत के अभिजात वर्ग को ये समझना चाहिए कि, अमेरिका की असली मंशा भारत को चीन के खिलाफ भड़काकर खुद को फायदा पहुंचाना है।

'भारतीय समाज में चीन को लेकर गलत राय'

'भारतीय समाज में चीन को लेकर गलत राय'

इसके साथ ही ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि, भारतीय समाज में एक कहावत है कि चीन भारत के विकास को देखने को तैयार नहीं है। लेकिन ऐसी धारणा साफ पानी नहीं रोक सकता। वास्तव में, जब भारत के साथ संबंध विकसित करने की बात आती है तो चीन ने हमेशा "ड्रैगन और हाथी एक साथ डांस" के महत्व पर जोर दिया है। 1988 में, जब पूर्व चीनी नेता देंग शियाओपिंग ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मुलाकात की थी, तो उन्होंने बताया कि जब तक चीन और भारत को विकसित नहीं किया जाता है, तब तक ये शताब्दी ऐशिया की शताब्दी नहीं होगी। चीन, भारत और अन्य पड़ोसी देशों के विकसित होने तक कोई वास्तविक एशिया-प्रशांत सदी या एशियाई सदी नहीं आ सकती है।"

भारतीय प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र

भारतीय प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र

इसके साथ ही ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक का भी जिक्र किया है और लिखा है कि, ''जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2019 में भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी, तो शी जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया था कि, चीन अपने साथ साथ भारत का भी विकास चाहता है और दोनों देशों को अपने-अपने लक्ष्य हासिल करने में एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।" इसके साथ ही अंत में ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय नेताओं को चेतावनी देते हुए लिखा है कि, ''भारतीय नेताओं को मिठाईयों को गोली में नहीं बदलना ताहिए, क्योंकि इससे भारत को फायदा नहीं, बल्कि नुकसान ही होगा''।

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