'Hindu Lives Matter': ऑस्ट्रेलिया से US तक बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर प्रदर्शन, बाइडेन से अपील
Bangladesh Hindu: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर भारत के कथित सेक्युलर वर्ग ने भले ही खामोशी की चादर ओढ़ ली हो, लेकिन दुनियाभर के हिंदू एकजुट हो रहे हैं, और बांग्लादेश के चरमपंथियों के खिलाफ दुनियाभर के मानवाधिकार संगठनों की नींद तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जो हिंदुओं के खिलाफ होने वाली किसी भी हिंसा पर मौनव्रत धारण कर लेते हैं।
चाहे पाकिस्तान में हिंदुओं का कत्लेआम हो, या जबरन उनका धर्म परिवर्तन हो या फिर हर दूसरे दिन मंदिरों को तोड़े जाने की घटना हो, हर बार ये सेक्युलर तबका मुंह में पान डालकर बैठ जाता है, और इस बार भी बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गये 200 से ज्यादा हमलों पर ये जमात चुप बैठा हुआ है।

कट्टरपंथियों के खिलाफ एकजुट हो रहे हिंदू
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के खिलाफ रविवार को 300 से ज्यादा भारतीय अमेरिकियों और बांग्लादेशी मूल के हिंदुओं ने ह्यूस्टन के शुगर लैंड सिटी हॉल में विरोध प्रदर्शन किया। शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद इस्लामी चरमपंथियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को खतरनाक तरीके से निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है उससे लोग नाराज और निराश हैं और उन्होंने दक्षिण एशियाई देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और शांति की तत्काल बहाली की मांग की।
प्रदर्शनकारी बांग्लादेश में सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए तत्काल सुरक्षा की मांग कर रहे थे, उन्होंने बाइडेन प्रशासन से आग्रह किया, कि मानवता के खिलाफ इन जघन्य अपराधों को देखते हुए मूकदर्शक बने रहने से इनकार करें। उन्होंने बांग्लादेशी हिंदुओं को सतर्क रहने और मौजूदा स्थिति की निगरानी करने के लिए एकजुट होने और किसी भी आपात स्थिति में सामूहिक रूप से आवश्यक पहल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
#Hindus of Houston, USA held a rally against the atrocities on minority Hindus carried out by #Bangladeshi Muslims.#BangladeshiHindus #BangladeshHindus pic.twitter.com/ocgXeiiQ8e
— VIVEK SHARMA (@vivek2223) August 12, 2024
ह्यूस्टन में इस विरोध प्रदर्शन का शीर्षक "बांग्लादेश में हिंदुओं को बचाओ" था, जिसका आयोजन ग्लोबल वॉयस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज ने किया था, जो ह्यूस्टन के प्रमुख हिंदू समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक छत्र संगठन है, जिसमें मैत्री, विश्व हिंदू परिषद ऑफ अमेरिका, हिंदूएक्शन, हिंदूपैक्ट, ह्यूस्टन दुर्गाबाड़ी सोसाइटी, इस्कॉन, ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा और कई अन्य शामिल हैं।
लंदन में संसद भवन के सामने प्रदर्शन
ब्रिटेन और अमेरिका की सड़कों पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और हमलों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए गये हैं। लंदन में संसद भवन के सामने और अमेरिका में व्हाइट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 'हिंदुओं को बचाओ', 'हिंदुओं की जान मायने रखती है' लिखी तख्तियां थाम रखी थीं और 'न्याय' की मांग कर रहे थे।
Vishwa Hindu Parishad (VHP) Canada participates in a massive demonstration at Nathan's square in Toronto to protest against BRUTAL ATROCITIES ON HINDUS IN BANGLADESH. Let's join in even bigger numbers tomorrow at Dentonia Park, Danforth. Dharmo Rakshati Rakshitah!… pic.twitter.com/tBvfoIFQwO
— VHP Canada (@vhpcanada) August 10, 2024
कनाडा में भी हिंदुओं का प्रदर्शन
कनाडा में भी हिंदू, ईसाई, बौद्ध और यहूदी समुदायों के एक हजार से ज्यादा लोगों ने रविवार को बांग्लादेशी हिंदुओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए टोरंटो शहर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कनाडा सरकार से बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए अंतरिम बांग्लादेश सरकार पर दबाव डालने का आग्रह किया। समुदाय के नेताओं ने हिंदुओं पर हमलों पर भी अपनी चिंता जताई।
व्हाइट हाउस के बाहर भी प्रदर्शन
शुक्रवार को वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी और बांग्लादेशी झंडे लिए हुए थे और पोस्टर पकड़े हुए थे, जिसमें मांग की गई थी, कि बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों को "बचाया जाए।" उन्होंने "हमें न्याय चाहिए" के नारे लगाए और हाल ही में हिंसा में वृद्धि के बीच शांति का आह्वान किया। भीड़ में विभिन्न मानवाधिकार संगठनों के कार्यकर्ता, बांग्लादेशी प्रवासी और भारतीय-अमेरिकी हिंदू सहयोगी शामिल थे, जो वाशिंगटन, मैरीलैंड, वर्जीनिया और न्यूयॉर्क से आए थे।
प्रदर्शनकारियों ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस के हस्तक्षेप की मांग की, जिन्होंने गुरुवार को कार्यवाहक प्रशासन का नेतृत्व संभाला।
बांग्लादेश में रहने वाले बांग्लादेशी हिंदू शुभो रॉय ने स्थिति पर चिंता व्यक्त की और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी समाधान की मांग की। रॉय ने एएनआई से कहा, कि "हमें एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है, ताकि हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक बांग्लादेश में सम्मान के साथ रह सकें।"
उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं की दुर्दशा पर प्रकाश डाला, जो वर्षों तक व्यवस्थित हिंसा, भेदभाव और दमन सहने के बाद अपनी मातृभूमि से भाग गए थे। अब, वे अमेरिकी शक्ति के प्रतीक के सामने खड़े हैं, और मांग कर रहे हैं, कि दुनिया उन अत्याचारों पर ध्यान दे जो उन्होंने पीछे छोड़े हैं। रॉय ने कहा, "हमें महाभारत (भारत), अखिल भारत, अखंड भारत से दूर कर दिया गया। हम कभी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं थे। हमें फंसाया गया और भारत से दूर कर दिया गया।"
वहीं, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार को एक्स पर एक संदेश में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की "सुरक्षा और संरक्षण" का आह्वान किया है।
प्रदर्शनकारियों में से एक प्रियदर्श साहा ने अमेरिकी सांसदों से हिंदू, बौद्ध, ईसाई और अन्य स्वदेशी समूहों सहित बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों की वकालत करने का आग्रह किया। साहा ने कहा, "बाइडेन प्रशासन में बदलाव लाने, बांग्लादेशी अंतरिम सरकार को प्रभावित करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाने की क्षमता है।"
आपको बता दें, कि अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ 200 से ज्यादा हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं और बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 100-200 लोगों की तादाद में आने वाली इस्लामिवादियों की भीड़ आती है और हिंदुओं के घरों पर हमले कर देती है।












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