कोरोना वायरस: विशेषज्ञों का कहना- दुनिया मांगेगी चीन से हिसाब-किताब, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उठने लगे विरोध के सुर
बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पार्टी, चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के लिए कोरोना वायरस महामारी ने एक मुश्किल समय पैदा कर दिया है। जो लोग पिछले कई वर्षो से कहते थे कि चीन दुनिया के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है, अब कहीं न कहीं इस बात पर यकीन करने लगे हैं। जिस तरह से जिनपिंग ने कोविड-19 संकट के मसले पर दुनिया को खतरे में डाला और अपनी जिम्मेदारी से भागे, उसकी वजह से अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पीठ टूट चुकी है। पश्चिमी देशों के विशेषज्ञों की मानें तो चीन और सत्ताधारी कम्युनिस्ट से अंतरराष्ट्रीय समुदाय हिसाब मांग रहा है और उन्हें देना होगा।

चीन से अब मांगा जा रहा है हर्जाना
चीन भले ही दुनिया के सामने आत्मविश्वास से लबरेज नजर आता हो लेकिन कहीं न कहीं अंदर ही अंदर घरेलू चिंताओं को छिपाने की कोशिशें की जा रही है। मार्च में देश में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) का वार्षिक अधिवेशन होना था और इसके दो सत्र आयोजित होने थे। इसके अलावा चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसलटेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) की भी मीटिंग होनी थी। इन मीटिंग्स में सरकार के फैसलों और बजट पर मोहर लगाई जाती है। लेकिन अब दोनों ही मीटिंग्स को टाल दिया गया है। चीन की आर्थिक दर भी 27 साल में सबसे कम हुई है। इस बात की आशंका भी है कि कई देश अब चीन में स्थित सप्लाई चेन को बंद करने पर सोच रहे हैं। दुनिया का नेतृत्व करने के बजाय अब चीन आलोचना, पूछताछ और वैश्विक जांच के बीच खुद को घिरा हुआ पा रहा है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका चीन के खिलाफ कोविड-19 संकट की चपेट में आने की जांच करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, यह ऐसा कुछ जिसे बीजिंग सख्ती से खारिज कर देगा। फिर भी एक देश के लिए यह अपमानजनक है। उधर, जर्मनी सहित कई देशों ने कोरोना की वजह से हुए आर्थिक नुकसान के लिए चीन को हर्जाना भरने को कहा है।












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