मौत, मातम, कब्र, बारूद और बर्बादी.. गाजा में तबाही का खौफनाक वीडियो देखिए, क्या आज होगा युद्धविराम?
Israel-Hamas War: हमास ने जब 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल पर दिल दहलाने वाला हमला किया था, तो उसने वो हमला क्या सोचकर किया होगा, कि वो उस हमले के साथ एक अलग फिलीस्तीन का निर्माण कर लेगा, लेकिन पिछले सात महीनों से गाजा में जो तबाही की बिजलियां गिरी हैं, उसे देखने के बाद आज सवाल ये उठता है, कि आखिर इन सात महीनों में क्या हासिल हुआ है।
क्योंकि, इस युद्ध के सात महीने बाद भी हर पक्ष एक ही नतीजे पर पहुंचे हैं, कि बातचीत से युद्धविराम हासिल करने के नतीजों तक पहुंचा जाए। तो फिर जब बातचीत से ही किसी नतीजे तक पहुंचना है, तो फिर लाखों टन बारूद गिराने से क्या हासिल हुआ है?

क्या हासिल हुआ हमास को 1200 से ज्यादा इजराइलियों को मारकर और क्या हासिल हुआ इजराइल को, 32 हजार से ज्यादा गाजा निवासियों पर मौत की बिजलियां गिराकर।
युद्ध के इन सात महीनों के बाद गाजा पट्टी से जो वीडियो निकलकर सामने आए हैं, उसमें मौत का मातम है, मलबे बन चुके ईंट पत्थरों के घरों की खामोशी है, वीडियो में जितनी गहराई तक आंखें देख पाती हैं, हर तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा नजर आता है, ऐसा लगता है, कि किसी फिल्म का दृश्य है।
यूनाइटेड नेशंस ने इस वीडियो को जारी किया है और एक मिनट तीन सेकंड के इस वीडियो को देखकर ऐसा लगता है, मानो पूरा शहर अब खंडहर में तब्दील हो चुका है।
UNRWA प्रमुख फिलिप लेज़ारिनी ने कहा, कि गाजा शहर एक साल से भी कम समय में "तबाही और विनाश से भरी" जगह में तब्दील हो गया है। जो शहर कभी स्कूलों, बाजारों और लोगों के चहल पहल से गूंजता रहता था, वो अब "मौत और भूतों का शहर" बन चुका है। फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी के प्रमुख लाज़ारिनी ने यह भी कहा, कि युद्धग्रस्त फिलिस्तीनी क्षेत्र के पुनर्निर्माण अब सिर्फ "ईंट और पत्थर" से नहीं होने वाला है, क्योंकि सिर्फ घर नहीं टूटे हैं, बल्कि अब लोगों की जिंदगी टूट चुकी है, उनके हौसले, उनकी हिम्मत टूट चुकी है।
गाजा पट्टी में हो पाएगा युद्धविराम?
हमास के लीडर तुर्की और कतर जैसे देशों के फाइव स्टार होटलों में बैठकर बैठकें करते हैं, जिनका नतीजा आज तक नहीं निकल पाया है, लेकिन उनके इशारों में गाजा के हजारों युवा हाथों में बंदूक लेकर कभी ना खत्म होने वाली जंग में अपना जान गंवा देते हैं। लेकिन, हर बार तबाही मचने के बाद नतीजा वहीं पहुंचता है, कि चलो बैठकर बात करते हैं और इस बार भी वही बातचीत हो रही है, कि कैसे गाजा में युद्धविराम हासिल किया जाए, तो फिर सवाल ये है, कि जब बिना किसी नतीजे के युद्धविराम तक ही पहुंचना था, तो फिर सात महीनों की लड़ाई से क्या हासिल हुआ?
गाजा पट्टी को तबाह करने वाले युद्ध के लगभग सात महीने बाद युद्धविराम और बंधकों को लेकर समझौता करने के लिए पश्चिमी और अरब देशों के अधिकारी सऊदी अरब में बैठक कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, मिस्र और कतर, जनवरी से ही संघर्ष विराम वार्ता में मध्यस्थता कर रहे हैं, जिसमें अन्य देश भी शामिल हैं।
आखिरी बार समझौते के कारण नवंबर में लड़ाई एक सप्ताह के लिए रुक गई थी, जिसके दौरान इस्लामवादी हमास ने 100 से ज्यादा बंधकों को रिहा कर दिया था और इजराइल ने लगभग तीन गुना ज्यादा फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा कर दिया था।
लिहाजा, इस बार जो युद्धविराम वार्ता हो रही है, आइये जानते हैं, कि उसमें क्या हो सकता है?

क्या युद्धविराम पर समझौता हो पाएगा?
फ्रांस के विदेश मंत्री स्टीफन सेजॉर्न ने सोमवार को कहा, कि रियाद में अरब और पश्चिमी मंत्रियों के साथ योजनाबद्ध वार्ता से पहले, बातचीत आगे बढ़ रही है। इस बीच हमास का एक प्रतिनिधिमंडल नवीनतम युद्धविराम प्रस्ताव और उस पर इजराइल की प्रतिक्रिया पर चर्चा करने के लिए काहिरा में मौजूद है, जबकि अमेरिका, मिस्र जैसे मध्यस्थों ने समझौते के लिए कोशिशें तेज कर दिए हैं।
लेकिन, अपने सार्वजनिक बयानों में, दोनों पक्ष अभी भी सबसे बड़े मुद्दों पर अलग-अलग हैं और महीनों से दोनों पक्षों पर समझौता करने के विदेशी दबाव को बहुत कम सफलता मिली है।
प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है, कि इजरायल का सैन्य अभियान गाजा के आखिरी शहर राफा की ओर जाएगा, जहां इजरायली सैनिकों ने अभी तक प्रवेश नहीं किया है, और जहां दस लाख विस्थापित लोगों की आबादी और बढ़ गई है।
सहायता एजेंसियों के साथ-साथ इजराइल के पश्चिमी सहयोगियों को डर है, कि वहां हमले से युद्ध के कारण गाजा में मानवीय संकट विनाशक स्थिति से भी आगे बढ़ जाएगा, जिससे युद्धविराम के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ गया है। लगातार चल रही लड़ाई से गाजा में गंभीर मानवीय स्थिति को सुधारने का कोई भी प्रयास करना और भी मुश्किल हो गया है, विश्व खाद्य कार्यक्रम ने पिछले सप्ताह कहा था, कि गाजा एन्क्लेव के उत्तरी हिस्से अकाल युग में प्रवेश कर चुके हैं।
युद्धविराम की राह में मुश्किलें क्या हैं?
दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा मतभेद युद्धविराम की शर्तों को लेकर है। इजराइल ने कहा है, कि वह बंधकों और कैदियों की अदला-बदली के दौरान लड़ाई को अस्थायी रूप से रोकने के लिए तैयार है। लेकिन नेतन्याहू ने तब तक सैन्य अभियान समाप्त नहीं करने का दृढ़ संकल्प किया है, जब तक कि वह राफा पर हमले के साथ हमास पर "पूर्ण विजय" हासिल नहीं कर लेते हैं।
इसके बाद उन्होंने गाजा पट्टी पर पूरी तरह से इजराइली सेना का नियंत्रण हासिल करने की कल्पना की है, यानि युद्ध खत्म होने के बाद, जब हमास का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा, उसके बाद भी इजराइली सेना का नियंत्रण गाजा पट्टी पर रहेगा।
लेकिन, हमास का कहना है कि वह केवल स्थायी युद्धविराम पर आधारित एक समझौते को स्वीकार करेगा, जिसके तहत गाजा पट्टी से सभी इजराइली सैनिकों की वापसी है। लेकिन, इजराइल का कहना है, कि अगर हमास को पूरी तरह से खत्म नहीं किया गया, तो वो पलटकर फिर से इजराइल पर 7 अक्टूबर जैसा हमला करेगा।

बंधक और कैदी
प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके वरिष्ठ मंत्रियों का कहना है, कि समझौता कुछ भी हों, लेकिन उनमें सभी 133 इजराइली बंधकों की रिहाई सबसे पहली शर्त है। इजराइल का कहना है, कि अगर बंधकों की मौत हो चुकी है, तो उनके शव उसे चाहिए।
लेकिन, बंधकों को रिहा करने के बदले में हमास, ज्यादा से ज्यादा संख्या में हमास नेताओं की रिहाई चाहता है, जो इजराइली जेलों में बंद हैं।
लिहाजा, युद्धविराम पर जो बातचीत हो रही है, उसमें इस बात की चर्चा हो रही है, कि एक इजराइली बंधक के बदले इजराइल कितने हमास नेताओं को रिहा करेगा, ये रिहाई कितने चरणों में होगी और क्या ऐसे हमास नेताओं को रिहा किया जा सकता है, जो इजराइल में भीषण हमलों को अंजाम देने में सीधे तौर पर शामिल हैं?
इसके अलावा हमास बर्बाद हो चुके गाजा पट्टी के पुनर्निमाण के लिए भी आर्थिक मदद भी चाहता है, ताकि इजराइली हमबारी में जो तबाही मची है, उन घरों और बाजारों का फिर से निर्माण किया जा सके। लेकिन, इजराइल का शर्त है, कि अगर गाजा के लिए हमास कोई आर्थिक पैकेज चाहता है, तो इजराइल उसे देने के लिए तैयार है, लेकिन शर्त ये है, कि हमास को अपने सभी हथियार डालने होंगे, जाहिर तौर पर ये एक ऐसा प्वाइंट है, जिसपर समझौता होना मुमकिन नहीं है।












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