क्रिप्टो करेंसी से लेकर क्लाइमेट चेंज तक... G-20 घोषणापत्र पर आगे बढ़ने को दिल्ली ने पीछे किए कुछ कदम
G-20 Summit: क्रिप्टो-करेंसी के लिए वैश्विक स्तर पर नियम-कानून बनाने के लिए एक वैश्विक ढांचे का निर्माण करने का आह्वान करने से लेकर जलवायु परिवर्तन पर सहमति देने तक, भारत, अपने G20 अध्यक्ष के हिस्से के रूप में, कई विवादास्पद मुद्दों पर आम सहमति विकसित करने के लिए काफी कड़ी मेहनत कर रहा है, भले ही भारत को इसके लिए कुछ मुद्दो से पीछे ही क्यों ना हटना पड़े।
गुरुवार को, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और फाइनेंसियल स्टेबिलिटी बोर्ड (एफएसबी) ने भारतीय जी20 प्रेसीडेंसी के अनुरोध पर एक नीति पत्र जारी किया है, जिसमें क्रिप्टो-एसेट पर पूर्ण प्रतिबंध के खिलाफ सिफारिश की गई है। इसके बजाय, इसने क्रिप्टो-परिसंपत्ति प्लेटफार्मों के लिए एक लाइसेंसिंग व्यवस्था शुरू करने का सुझाव दिया है, ताकि क्रिप्टो-संपत्ति को मनी-लॉन्ड्रिंग विरोधी और आतंकवाद विरोधी वित्तपोषण मानकों के दायरे में लाया जा सके।

जी20 पर भारत जारी करवा पाएगा घोषणापत्र?
क्रिप्टो करेंसी को भारत के समर्थन से पता चलता है, कि भारत ने अपने स्टैंड को कितना बदला है। क्योंकि, साल 2018 में, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वर्चुअल करेंसी पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारतीय वित्त मंत्रालय को एक मसौदा योजना सौंपी थी और एक महीने बाद, आरबीआई ने बैंकों को क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन करने से रोक दिया। हालांकि, इस फैसले को साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था।
लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी भारत के बैंकिंग रेगुलेटर्स क्रिप्टो-परिसंपत्तियों को लेकर अपनी समस्याओं के बारे में मुखर रहा है, और उन्हें "एक व्यापक-आर्थिक जोखिम" के रूप में पहचाना है।
पिछले साल जुलाई में, आरबीआई ने क्रिप्टो पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, और भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा था, कि क्रिप्टोकरेंसी पर "किसी भी प्रभावी रेगुलेशन या प्रतिबंध" के लिए "अंतर्राष्ट्रीय सहयोग" की आवश्यकता होगी, क्योंकि डिजिटल मुद्रा की प्रकृति में सीमाहीन है। यानि, डिजिटल मुद्रा में किस देश से कहां कारोबार हो रहा है, इसपर कंट्रोल करना अत्यंत मुश्किल है।
भारत सरकार ने पिछले साल "किसी भी वर्चुअल डिजिटल संपत्ति के ट्रांसफर से होने वाली किसी भी इनकम पर 30 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया था, साथ ही प्रत्येक लेनदेन पर स्रोत पर 1 प्रतिशत कर कटौती (टीडीएस) भी लगाई थी।
भारत की अध्यक्षता के दौरान, विभिन्न मुद्दों पर कई बैठकें अब तक एक भी संयुक्त विज्ञप्ति पर नहीं पहुंच पाई हैं। मुख्य रूप से दो पैराग्राफों को शामिल करने पर रूस और चीन की आपत्तियां थीं, जिनमें यूक्रेन से तनाव कम करने और यूक्रेन से रूसी सैनिकों के बाहर निकलने की बात थी, लेकिन रूस और चीन की आपत्तियों के बाद इसे हटा लिया गया।
भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने शुक्रवार को कहा, कि नई दिल्ली में नेताओं की एक घोषणा होगी जिसमें भारत खुद को वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में स्थापित करेगा। हालांकि, उन्होंने इस सवाल का जवाब नहीं दिया, कि क्या रूस-यूक्रेन मुद्दा संभावित रूप से संयुक्त घोषणा को पटरी से उतार देगा।
भले ही जलवायु परिवर्तन पर अंतिम घोषणा में पैराग्राफ और जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने को सऊदी अरब के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है, लेकिन समझा जाता है कि नई दिल्ली ने सऊदी की आपत्ति पर एक समझौता किया है जिसका संदर्भ " जस्ट क्लाइमेट ट्रांजिशन" को "जस्ट ट्रांजिशन" में बदल दिया जाए।












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