G7 Summit: दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, फिर भी भारत नहीं है जी7 का सदस्य.. क्यों जलता है पश्चिम?
G7 पिछले कुछ सालों में अपना वर्चस्व खोता जा रहा है, क्योंकि चीन, भारत, ब्राजील जैसे देशों ने आर्थिक मोर्चे पर लगातार तरक्की की है। वहीं, जी7 का वैश्विक जीडीपी में भी योगदान कम हुआ है। ट्रंप इसे पुराना संगठन बता चुके हैं।

G7 Summit India: दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देशों में सात देशों के नेता इस हफ्ते जापान के हिरोशिमा में होने वाले 'ग्रुप ऑफ सेवन' यानि जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंच गये हैं।
हिरोशिमा.. जापान का वो शहर, जिसे दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका ने परमाणु बम गिराकर तबाह कर दिया था, वो अब नये सिरे सज-संवर चुका है और जापान के विकास की कहानी को बयां कर रहा है।
जी7 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी हिरोशिमा के लिए निकल गये हैं, लेकिन एक सवाल जो हर किसी के मन में उठता है, कि दुनिया का सबसे विशालकाय लोकतांत्रिक देश होने के बाद भी भारत, जी7 का स्थाई सदस्य क्यों नहीं है, जबकि अर्थव्यवस्था के मामले में भारत, दुनिया में पांचवें नंबर पर पहुंच चुका है और कुछ सालों में तीसरे नंबर पर पहुंच जाएगा।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत को जी7 देशों के इस ग्रुप में शामिल करने की मांग कर चुके हैं और यही मांग ब्रिटेन के पूर्व प्रधाननमंत्री बोरिस जॉनसन भी कर चुके हैं। वहीं, फ्रांस और जापान से भी भारत के काफी मजबूत संबंध हैं, फिर भी भारत इस ग्रुप का हिस्सा क्यों नहीं बना है, आईये समझने की कोशिश करते हैं।

अतिथि देश के तौर पर शामिल होता है भारत
भारत इस संगठन का हिस्सा नहीं है, लेकिन पिछले कई सालों से बतौर मेहमान जी-7 में भाग लेता रहा है। पीएम मोदी से पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी, जी-7 की बैठकों में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होते थे।
आपको बता दें कि जी-7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं और इस बार जी-7 की मेजबानी जापान कर रहा है, जबकि पिछले साल जर्मनी ने इसकी मेजबानी की थी।
साल 2020 अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी7 समूह को 'पुराना समूह' बताते हुए इसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को शामिल करने की मांग की थी। कोविड की वजह से जी-7 के 46वें शिखर सम्मेलन को स्थगित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, कि G7 समूह पुराना हो चुका है, और अपने वर्तमान प्रारूप में यह वैश्विक घटनाओं का सही तरीके से प्रतिनिधित्व करने में सक्षम नहीं है।
2019 में 45वें जी7 समिट का आयोजन फ्रांस में किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित गया था। उस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, कि अब वक्त आ गया है, जब जी7 ग्रुप को जी10 या फिर जी11 बना दिया जाए। ट्रंप ने जी7 ग्रुप में भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के अलावा रूस को भी शामिल करने की मांग की थी।
हालांकि, उसके बाद भी अभी तक भारत इसका हिस्सा नहीं बन पाया है। हालांकि, जी7 को लेकर भारत का रूख हमेशा से सकारात्मक रहा है।

जी7 से कैसा रहा है भारत का रिश्ता?
आलोचकों का हमेशा से कहना रहा है, कि जी-7 से भारत और ब्राजील जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को दूर रखना, इसकी सबसे बड़ी नाकामी है, जिसे जल्द से जल्द दूर करना चाहिए।
आलोचकों का कहना है, कि जी7 कुल मिलाकर पश्चिमी देशों के वर्चस्व से भरा हुआ एक संगठन है, और पश्चिमी देशों के मन में अभी भी अपने आप को सर्वोच्च मानने की गलतफहमी बनी हुई है और इसी वजह से अभी तक भारत को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
इसका नतीजा ये हुआ, कि पिछले कुछ सालों में भारत, ब्राजील और चीन जैसे देशों के आर्थिक उदय ने जी7 के महत्व को कम कर दिया है और वैश्विक जीडीपी में जी7 की भागीदारी लगातार कम होती जा रही है। लिहाजा, इस समूह के अस्तित्व पर ही अब संकट छाने लगा है। खासकर, यूक्रेन युद्ध ने जिस तरह से यूरोप को प्रभावित किया है, उससे निपटने में जी7 अभी तक कारगार उपाय नहीं कर पाया है।
आने वाले सालों में भारत अपनी इकॉनोमी को बढ़ाकर 5 ट्रिलियन डॉलर करना चाहता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल, भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 3 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है।
हालांकि, पिछले तीन सालों से कोरोना वायरस की वजह से लगाए गये लॉकडाउन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा झटका दिया था, बावजूद इसके भारत का लक्ष्य बदला नहीं है।
अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत भी जी7 ग्रुप में शामिल होना चाहता है, ताकि भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजार में रियायत के साथ ही आधुनिक टेक्नोलॉजी मिल सके। ऐसे में अगर भारत जी7 ग्रुप का हिस्सा बनता है, तो निश्चित तौर पर उसे वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बनाने में कामयाबी हासिल होगी।
वर्तमान जियो-पॉलिटिक्स में भारत की मजबूत दावेदारी को पूरी दुनिया मान चुकी है और तमाम देशों ने अब कहना शुरू कर दिया है, कि आने वाला दशक भारत का है। वहीं, अगले कुछ सालों में भारत, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होग और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत पहले ही बन चुका है, लिहाजा भारत विकास की रफ्तार को और तेज करने के लिए इस ग्रुप को काफी अहमियत भी देता है।
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ग्लोबल साउथ में भारत की दमदार भागीदारी
ग्लोबल साउथ में चीन और जापान के बाद भारत सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहीं, इस साल ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कोमोरोस, कुक आइलैंड्स, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया और वियतनाम के नेताओं को जापान ने इस शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है।
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ये है, कि जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा, तथाकथित ग्लोबल साउथ में विकासशील देशों तक अपनी भागीदारी और सहयोग को बढ़ाना चाहते हैं।
वहीं, इस साल ताइवान के खिलाफ बीजिंग के बढ़ते खतरों पर भी जी7 की बैठक में ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसको चीन लगातार घेर रहा है और आशंका है, कि उसपर कभी भी चीन हमला कर सकता है। इसके साथ ही, जी7 का मुख्य फोकस, चीन पर सप्लाई चेन को लेकर अपनी निर्भरता कम करने को लेकर है, जिसमें भारत काफी अहम भूमिका निभा सकता है।












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