‘बोलने से पहले सोच लिया कीजिए’, फ्रांस ने अमेरिकी राष्ट्रपति को दिया झटका, पुतिन मुद्दे पर हुआ अलग
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को साफ तौर पर कहा कि, वो जो बोलते हैं, उन्हें अपने शब्दों पर ध्यान देना चाहिए।
पेरिस/वॉशिंगटन, मार्च 28: फ्रांस के राष्ट्रपति ने 'पुतिन को सत्ता से बेदखल' करने के अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडने के बयान से खुद को अलग कर लिया है और फ्रांस ने साफ तौर पर कहा है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति को बोलने से पहले सोच लेना चाहिए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ साफ कहा है, कि राष्ट्रपति जो बाइडेन को बोलने से पहले सोचना चाहिए, कि वो किन शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बाइडेन को फ्रांस ने दिखाया आइना
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को साफ तौर पर कहा कि, वो जो बोलते हैं, उन्हें अपने शब्दों पर ध्यान देना चाहिए। आपको बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पोलैंड दौरे के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को 'कसाई' और 'युद्ध अपराधी' कहा है। वहीं, बाइडेन ने ये भी कहा था, कि व्लादिमीर पुतिन को राष्ट्रपति पद से हटा देना चाहिए और बाइडेन के इस बयान का रूस की तरफ से कड़ा विरोध किया गया, जिसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से बाइडेन के बयान पर सफाई पेश करते हुए कहा गया, कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान का वो मतलब नहीं था और अमेरिका का रूस में सत्ता परिवर्तन से कोई मतलब नहीं है। वहीं, शनिवार को भी जो बाइडेन ने कहा था, कि रूस में शासन निरंकुश हो चुका है और अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की महत्वाकांक्षाएं अनियंत्रित हो गईं, तो यूरोप में दशकों तक युद्ध हो सकता है।

पुतिन पर निजी हमले कर रहे बाइडेन
आपको बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इन दिनों रूस पर काफी आक्रामक हैं और पुतिन के खिलाफ लगातार निजी हमले कर रहे हैं और विशेषज्ञों का मानना है कि, 3 महीने के बाद अमेरिका में सीनेटर्स चुनाव होने वाले हैं और यूक्रेन युद्ध ने बाइडेन की लोकप्रियता को काफी कम कर दिया है, लिहाजा सीनेटर्स चुनाव में स्थिति सुधारने के लिए बाइडेन इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। पुतिन ने शनिवार को पुतिन के बारे में कहा: 'भगवान के लिए यह आदमी सत्ता में नहीं रह सकता।' उन्होंने रूसी राष्ट्रपति को 'पूर्ण शक्ति और नियंत्रण की लालसा' रखने वाले शख्स के तौर पर वर्णित किया है। जबकि, फ्रांस के राष्ट्रपति लगातार रूसी राष्ट्रपति से संपर्क में हैं और लड़ाई खत्म करने के लिए मध्यस्थता की कोशिश में लगे हुए हैं। वहीं, तमाम यूरोपीय देश में सिर्फ फ्रांस ही एक ऐसा देश है, जिसकी विदेश नीति बहुत हद तक अमेरिकी प्रभावों से आजाद है।

फ्रांस करवा रहा है शांति समझौता
इस वक्त यूक्रेन युद्ध को शांत करवाने की कोशिश में जो तीन देश विशेष भूमिका निभा रहे हैं, उनमें फ्रांस के अलावा इजरायल और तुर्की हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों लगातार फ्रांस और यूक्रेनी राष्ट्रपति के संपर्क में हैं। हालांकि, फ्रांस और अमेरिका के बीच के संबंध भी काफी अच्छे हैं, लेकिन 'फ्रांस-3' को दिए गये अपने इंटरव्यू में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि वह कीव और मॉस्को के बीच शांति समझौते और युद्ध के एक राजनयिक अंत की तरफ दोनों देशों को कदम बढ़ाने के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं। लेकिन, कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति के पुतिन विरोधी बयानबाजी से यूक्रेन युद्ध आग में घी डालने जैसा काम है। वहीं, रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर पुतिन के अपमान का भी आऱोप लगाया, जब उन्होंने रूस के नेता को 'युद्ध अपराधी' कहा था।

अमेरिका पर भड़का रूस
बाइडेन के रूस में सत्ता परिवर्तन के बयान के बाद अमेरिका और रूस के बीच संबंध काफी खराब हो चुके हैं और क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने जवाब में संवाददाताओं से कहा, "यह बाइडेन द्वारा तय नहीं किया जाना है। और यह केवल रूसी संघ के लोगों की पसंद होनी चाहिए।' वहीं, वारसॉ में बाइडेन की अलिखित टिप्पणी के मद्देनजर, विदेश संबंध परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड हास ने अनुमान लगाया है कि, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को राष्ट्रपति बाइडेन की टिप्पणियों और रूसी गुस्से को ठंडा करने के लिए सामने आना चाहिए।

बाइडेन ने स्थिति को खतरनाक बनाया?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है, कि अब अमेरिका सरकार को अपने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन रूसी अधिकारियों से बात करनी चाहिए और उनके सामने अमेरिका का पक्ष रखना चाहिए। रिचर्ड हास ने ट्वीटर पर कहा कि, 'बाइडेन की टिप्पणियों ने स्थिति को ज्यादा से ज्यादा कठिन और खतरनाक से खतरनाक बना दिया है'। उन्होंने कहा कि, "कम स्पष्ट है कि नुकसान को कैसे पूर्ववत किया जाए, लेकिन मेरा सुझाव है कि उनके (बाइडेन के) मुख्य सहयोगी अपने समकक्षों (रूस) तक पहुंचें और पूरी स्थिति को लेकर रूस के सामने अमेरिका की स्थिति स्पष्ट करें और उन्हें बताएं, कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान का वो मतलब नहीं था'। आपको बता दें कि, पोलैंड और यूक्रेन के रंगों से जगमगा रहे वारसॉ में रॉयल कैसल के कोबल्ड प्रांगण में बाहर बोलते हुए बाइडेन ने पुतिन पर शासन करने के लिए 'क्रूर बल और दुष्प्रचार का उपयोग' करने का आरोप लगाया। बाइडेन ने कहा, 'यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नियम-आधारित प्रणाली के लिए सीधी चुनौती से कम नहीं है।












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