फ्रांस के सबसे बड़े इस्लामिक स्कूल की रोकी गई फंडिंग तो भड़के मुसलमान, धमकी देते हुए कहा, अगर...
फ्रांसीसी सरकार देश के सबसे बड़े मुस्लिम हाई स्कूल की फंडिंग रोकने जा रही है। स्कूल प्रशासन पर आरोप है कि वहां बच्चों को इस्लामिक मूल्यों के तहत शिक्षा प्रदान की जा रही थी।
इस स्कूल को सरकार द्वारा सबसे अधिक धन हासिल होता है लेकिन अब वहां जल्द ही सारी सब्सिडी रोक दी जाएगी। एक स्थानीय अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि कि फ्रांस प्रशासनिक विफलताओं और 'संदिग्ध शिक्षण प्रथाओं' के आधार पर अपने सबसे बड़े मुस्लिम हाई स्कूल की फंडिंग रोक रहा है।

फ्रांस के उत्तरी शहर लिले में 20 साल पहले स्थापित एवरोज स्कूल के खिलाफ यह कदम उठाया गया है। इस स्कूल में 800 से भी अधिक छत्र पढ़ाई करते हैं। ये फैसला एक परामर्श आयोग की सिफारिश के बाद लिया गया है, जिसने इसके वित्तपोषण और मुस्लिम नैतिकता की शिक्षा दोनों की जांच की थी।
2008 से ही यह फ्रांस की सरकार के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर है और इसे सरकारी फंडिंग मिल रही है। स्कूल के छात्र फ्रांसीसी पाठ्यक्रम का पालन करते हैं। इसके साथ ही उन्हें धर्म की शिक्षा भी दी जाती है।
फ्रांस में निजी स्कूल सरकार के साथ एक अनुबंध के तहत राज्य सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते वे सभी छात्रों के लिए खुले हों और राज्य के शिक्षा दिशानिर्देशों का पालन करते हों।
फ्रांसीसी गृह मंत्रालय के स्थानीय ऑफिस ने कहा था कि स्कूल में दी जाने वाली शिक्षा फ्रांस के मूल्यों के अनुरूप नहीं है। गृह मंत्रालय के स्थानीय ऑफिस ने स्कूल से कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने पर अधिक जानकारी देने से मना कर दिया है।
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि मुसलमानों को दबाने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। स्कूल के प्रिंसिपल एरिक डुफोर ने कहा कि उन्हें अभी तक गृह मंत्रालय के स्थानीय ऑफिस से कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की अधिसूचना नहीं मिली है।
उन्होंने कहा है कि स्कूल सरकार के इस फैसले के खिलाफ अदालत का रुख करेगा। उन्होंने कहा, 'जहां बात फ्रांस के मूल्यों की आती है तो हम किसी भी दूसरे स्कूल की तुलना में उसे अधिक प्रमुखता से लागू करते हैं।' उन्होंने कहा कि सरकारी फंड के बिना स्कूल अपनी बजट संबंधी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा।
स्कूल एक छात्र के पिता मोहम्मद दाउदी ने कहा कि उन्होंने इस स्कूल को इसलिए चुना क्योंकि यहां अच्छी पढ़ाई होती है और यह शिक्षा के क्षेत्र में काफी आगे है। दाउदी ने कहा कि, 'यह अपमानजनक और अन्यायपूर्ण है। मैं 15 सालों से विदेश में रह रहा हूं और अगर स्कूल बंद हुआ तो मैं अपने बच्चे को कनाडा के पब्लिक स्कूल में पढ़ाना पसंद करूंगा।'
उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि यह फ्रांस के मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'हम सब कुछ फ्रांसीसी मूल्यों के हिसाब से करते हैं, और फिर भी हमें परेशान किया जा रहा है।'












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