FPV Drone जिसने तबाह किए रूस के बमवर्षक विमान वह कितने का आता है? यूक्रेन की दिमाग हिला देने वाली प्लानिंग
FPV Drone:1 जून, 2025 को यूक्रेन ने पांच अलग-अलग रूसी एयरबेस पर हमला करने का दावा किया, जिनमें 40 से ज़्यादा बमवर्षक विमान तबाह हो गए। हैरानी की बात यह है कि यह मिसाइलों से नहीं बल्कि छोटे लेकिन शक्तिशाली FPV ड्रोन से किया गया। इससे इन ड्रोन की बनावट और शक्ति पर सवाल उठते हैं।
क्या हैं FPV ड्रोन्स?
FPV ड्रोन या फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन एक अनूठी वॉर स्ट्रेटजी प्रदान करते हैं। वे सामने लगे कैमरे से वास्तविक समय का वीडियो भी रिकॉर्ड कर भेजते हैं। ऑपरेटर चश्मे या स्क्रीन का उपयोग करके उन्हें नियंत्रित करते हैं, जो ड्रोन के अंदर होने के अनुभव जैसा है। यह तकनीक सटीक नेविगेशन और टारगेट करने में काफी कारगर साबित है।

कैसे काम करते हैं FPV?
यूक्रेन में, FPV ड्रोन को कामिकेज़ ड्रोन में बदल दिया गया है, जो तीन चरणों में काम करते हैं। सबसे पहले, वे टैंक या विमान जैसे लक्ष्य का पता लगाने के लिए उड़ान भरते हैं। एक बार पहचाने जाने के बाद, वे उससे टकराते हैं, जिससे विस्फोट होता है। ये ड्रोन अक्सर ग्रेनेड या IED जैसे विस्फोटक से लैस होते हैं।
कितने का आता है FPV ड्रोन?
यूक्रेनी सेना इन ड्रोनों का उत्पादन घरेलू स्तर पर कम लागत पर कर रही है। प्रत्येक ड्रोन की कीमत भारतीय रुपए में 50,000 से एक लाख रुपये के बीच है। इन्हें मोटर, कैमरा और बैटरी के साथ 3डी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है। अगर देखा जाए तो एक लाख रुपए का एक हथियार कैसे करोड़ों रुपए के हथियार को पल भर में खत्म कर देता है। ये ड्रोन आधुनिक युद्ध में एक क्रांति के तौर पर देखे जा रहे हैं।
FPV ड्रोन के खतरे
FPV ड्रोन अपनी विशेषताओं के कारण बड़े खतरे पैदा करते हैं। आधुनिक युद्ध पारंपरिक टैंकों और मिसाइलों से आगे बढ़ रहा है। FPV ड्रोन जैसे छोटे लेकिन इंटेलैक्चुअल वेपन के तौर पर देखे जा रहे हैं। रूस पर हुआ ये हमला इस बदलाव का उदाहरण है क्योंकि यूक्रेन ने दिखाया कि कैसे सस्ते ड्रोन हाई-टेक बमवर्षकों विमानों को नेस्तानाबूद कर रहे हैं। ये बताता है कि इस पीढ़ी के युद्ध में बड़े हथियारों से ज्यादा, चालाक हथियारों का इस्तेमाल किस तरह बाजी पलट सकता है।
इन रूसी एयरबेसों पर हुआ हमला
1 जून को हुए हमले में सैकड़ों FPV ड्रोन रूसी एयरबेस में घुसकर वहां खड़े बमवर्षक विमानों को नष्ट करने में शामिल थे। रूस की उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों के बावजूद, ऐसे हमलों को रोकना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। पहले से टारगेट किए गए हवाई अड्डों में एंगेल्स एयरबेस, शैकोवका, मोजदोक, इंगोशेतिया का सैन्य क्षेत्र और ओरेल एयरफील्ड शामिल थे। इन ठिकानों पर Tu-95 और Tu-22M3 जैसे बमवर्षक विमान रखे गए थे, जिनका इस्तेमाल रूस यूक्रेन पर मिसाइल हमलों के लिए करता था।
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