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5वीं के छात्र को जोड़-घटाव तक नहीं आता, सरकार का पैसा बर्बाद कर रहे- पूर्व पाकिस्तानी मंत्री हुए निराश

भारत और पाकिस्तान से तुलने करते हुए मिफ्ताह इस्माइल ने बताया कि जब भारत एक के बाद एक IIT बना रहा था हमारे यहां एक के बाद एक PM बदल रहे थे।

Miftah Ismail disappointed

Image: @MiftahIsmail Twitter

पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। पाकिस्तान विदेशी मुद्रा भंडार अब खत्म होने वाला है, लिहाजा सरकार ने विदेशी लेन-देन का भुगतान बंद कर दिया है। इसके अलावा देश उर्जा संकट का सामना कर रहा है। इसे लेकर शाहबाज सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए पूरे देश में रात 8 बजे के बाद तमाम दुकानों और बाजारों को बंद करने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि बिजली की बचत की जा सके। पाकिस्‍तान की इसी बदहाली पर सरकार में वित्‍त मंत्री रह चुके मिफ्ताह इस्‍माइल ने अपने हुक्मरानों को कोसा है।

भारत में बन रहे थे IIT, तब हम बदल रहे प्रधानमंत्री

भारत में बन रहे थे IIT, तब हम बदल रहे प्रधानमंत्री

अखबार डॉन के एक लेख में भारत और पाकिस्तान से तुलने करते हुए मिफ्ताह इस्माइल ने बताया कि जब भारत एक के बाद एक IIT बना रहा था हमारे यहां एक के बाद एक PM बदल रहे थे। मिफ्ताह ने कहा कि भारत ने साल 1951 पहली बार IIT की स्थापना की थी। इसके एक दशक बाद के अंत तक भारत के पास कुल 5 IIT थे। आज इन संस्थानों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आईटी संस्थानों में गिना जाता है। दूसरी तरफ हमारे यहां पहले दशक के अंत तक 7 प्रधानमंत्री बदले जा चुके थे।

'पाकिस्तान की नई पीढ़ी को स्मार्ट बनना होगा'

'पाकिस्तान की नई पीढ़ी को स्मार्ट बनना होगा'

इस्माइल ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी नई पीढ़ी को स्मार्ट बनाना होगा ताकि वे बाकी दुनिया से मुकाबला कर पाएं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग तो ऐसे विलाप करते हैं कि पाकिस्तान का आईटी निर्यात महज 3 अरब डॉलर है जबकि भारत का आईटी निर्यात 150 अरब डॉलर तक जा चुका है। भारत की आईटी इंडस्ट्री पाकिस्तान से 50 गुना ज्यादा बड़ी है। तो ये वे ये जान लें कि भारत ने बेहतर शिक्षा के बलबूते ये हासिल किया है। अगर कोई हमें आईटी क्षेत्र में ताकत बना सकता है तो वह है, बेहतर शिक्षा।

पाकिस्तान की 40 फीसदी आबादी निरक्षर

पाकिस्तान की 40 फीसदी आबादी निरक्षर

मिफ्ताह इस्माइल ने कहा कि अगर हम ऐसा सिस्‍टम बना दें जिसमें पाकिस्‍तान के मलिन इलाकों से कोई बच्ची यूनिवर्सिटी में गणित की पढ़ाई करे और मैडल हासिल करे तो हमें गरीबी या विदेशी मुद्रा भंडार के लिए चिंता नहीं करनी होगी। मिफ्ताह ने कहा कि दुर्भाग्य से, आजादी के 75 साल बाद, 10 में से लगभग 4 पाकिस्तानी निरक्षर हैं। वे कठिनाई और गरीबी के जीवन के लिए समर्पित हैं। इससे भी बुरी बात यह है कि साक्षरता दर में सुधार भी नहीं हो रहा है। हमारे यहां पाकिस्तान में शिक्षा की स्थिति भी बेहद खराब है।

पढ़ने में फिसड्डी हैं पाकिस्तानी बच्चे

मिफ्ताह ने कहा कि पाकिस्तानी बच्चे गणित और विज्ञान में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। 8 वीं कक्षा में बस 5 प्रतिशत छात्र हैं जिन्हें गणित की ठीक-ठाक समझ है। जबकि महज 10 फीसदी बच्‍चे ही विज्ञान के बेहद आसान प्रश्‍नों का जवाब दे पाते हैं। वह भी तब जब पाकिस्तान की कक्षा में क्‍लास 5 से ही विज्ञान की पढ़ाई शुरू हो जाती है। उन्होंने आगे कहा कि पांचवी कक्षा के बच्चों की हालत पहली क्लास के बच्चे जैसी है। वह बस कुछ अंको का जोड़ कर पाते हैं। मिफ्ताह ने आगे कहा कि अगर सच कहा जाए, तो सरकार बच्चों की शिक्षा पर जो पैसा खर्च करती है, उससे देश को कुछ नहीं मिल रहा है।

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