2022 के चुनाव परिणामों ने दुनिया भर में विश्लेषकों को चौंकाया, जानें किसे मिली हार, किसके सिर सजा ताज?
2022 में कई देशों में चुनाव हुए जिसमें कई देशों में सत्ताधारी पार्टी अपनी कुर्सी बचाने में सफल हुए तो कई जगहों पर विश्व के प्रमुख नेताओं को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।

2022 में कई देशों में चुनाव हुए जिसमें कई देशों में सत्ताधारी पार्टी अपनी कुर्सी बचाने में सफल हुए तो कई जगहों पर विश्व के प्रमुख नेताओं को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। 2022 में इजरायल में लिकुड पार्टी के प्रमुख बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर से कुर्सी हासिल की। इटली में सबको चौंकाते हुए दक्षिणीपंथी पार्टी की जॉर्जिया मेलोनी की जीत हुई जबकि फिलीपींस में मार्कोस जूनियर राष्ट्रपति पद जीतने में कामयाब हुए वहीं ब्राजील में वामपंथी लूला डा सिल्वा ने बोल्सोनारो को हराकर द. अमेरिका महाद्वीप में दक्षिणपंथी पार्टी का आखिरी किला ध्वस्त कर दिया।

बेंजामिन नेतन्याहू
बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर इजरायल के पीएम बनने वाले हैं। बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हरज़ोग को फोन करके देश में सरकार बनाने का दावा किया है। लंबे समय तक इजरायल के प्रधानमंत्री रहे 73 वर्षीय बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को नवंबर महीने में हुए चुनाव में 120 सदस्यीय नेसेट (इजरायली संसद) की 64 सीटों पर सफलता मिली। इसमें बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को अकेले 32 सीटें मिली हैं। 2019 में भ्रष्टाचार के आरोप में नेतन्याहू द्वारा पीएम पद से इस्तीफा देने के बाद से इजरायल में राजनीतिक अस्थिरता का दौर जारी है। 5 साल के अंदर यह पांचवां चुनाव था।

जॉर्जिया मेलोनी
इटली में सितंबर में हुए चुनाव में पोस्ट-फासिस्ट विचारधारा वाली ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी के गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ। इटली की राजनीति में कई सालों बाद ऐसा हुआ जब किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ। इसके बाद इटली को जॉर्जिया मेलोनी के रूप में नई प्रधानमंत्री मिली। जॉर्जिया मेलोनी उग्र राष्ट्रवादी और यूरोपीय एकता के उलट विचार रखने वाली नेत्री मानी जाती हैं। मेलोनी मुसोलिनी की प्रशंसक हैं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर भी तारीफ कर चुकी हैं। मेलोनी यूरोपीय संघ को शरणार्थी समस्या का कारण मानती हैं। अपने चुनावी कैंपेन में उन्होंने कहा था- मुस्लिम देशों में गृहयुद्ध में त्रस्त महिलाओं और बच्चों की तस्वीरें दिखाई जाती हैं। लेकिन हमारे देश में ये अनाथ बच्चे और विधवा महिलाएं नहीं, बल्कि पुरुष शरणार्थी बनकर आते हैं, और तमाम तरह के अपराधों में लिप्त रहते हैं। मैं इन पुरुषों को शरणार्थी नहीं मानती।

मार्कोस जूनियर
फिलीपींस में मार्कोस जूनियर राष्ट्रपति बनने में सफल हुए। फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर को जनता विद्रोह के कारण पिता के साथ 1991 में देश छोड़कर भागना पड़ा था लेकिन विडंबना देखिए अब उसी देश की जनता ने मार्कोस जूनियर को भारी बहुमत से देश के राष्ट्रपति पद पर बैठा दिया है। मार्कोस के पिता फर्डिनैंड मार्कोस सीनियर ने 1965 से 1986 तक देश पर राज किया था। उनके शासनकाल को देश के धन की लूट और मानवाधिकारों के खुलेआम उल्लंघन के लिए याद किया जाता है। लेकिन अब सोशल मीडिया पर धुआंधार प्रचार अभियान चला कर मार्कोस जूनियर की टीम ने फिलीपींस के नई पीढ़ी के दिमाग से इस छवि को हटाने में सफलता पा ली है।

लूला-डा सिल्वा
लूला डी सिल्वा ब्राजील के नए राष्ट्रपति बने हैं। उन्होंने चुनाव में बोल्सोनारो को हरा दिया। राष्ट्रपति पद के लिए हुआ यह चुनाव बहुत ही क्लोज था, जिसमें बोल्सोनारो को 49 फीसदी वोट मिले तो वहीं लूला डी सिल्वा ने 51 फीसदी वोट हासिल किए। लूला डी सिल्वा ने 2018 में भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था। चुनाव के दौरान ही उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामले के आरोपों के चलते उन्हें जेल भेज दिया गया था। इसके बाद सेना के पूर्व कप्तान बोल्सोनारो ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत हासिल की थी।

अनवर इब्राहिम
मलेशिया में चुनाव परिणाम के बाद शुरू हुए गतिरोध के बाद लंबे समय तक देश में विपक्षी नेता रहे अनवर इब्राहिम ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली। वह देश के 10वें पीएम बने हैं। मलेशिया में पहली बार त्रिशंकु संसद का निर्माण हुआ था और किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ था। 20 नवंबर को हुए चुनाव में अनवर इब्राहिम के समर्थन वाले गठबंधन पकतान हरापात ने सबसे ज्यादा 82 सीटें जीती थीं। 75 वर्षीय अनवर इब्राहिम सुधारवादी नेता के तौर पर जाने जाते हैं जिन्हें भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर लगभग एक दशक तक जेल में रखा गया।

ऋषि सुनक
यूके में ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री बन इतिहास रच दिया। वह पहले एशियाई मूल और अश्वेत नेता हैं, जो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं। सुनक ने 45 दिनों तक सत्ता में रहने वाली लिज ट्रस की जगह ली। ऋषि सुनक पिछले एक साल में ब्रिटेन के तीसरे प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ब्रिटेन को आर्थिक संकट से निकालने की शपथ ली। ऋषि सुनक सिर्फ 7 साल के राजनीतिक करियर में प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे।
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