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चमगादड़ों ने अमेरिका में ली 5 लोगों की जान, CDC ने किया सावधान

नई दिल्ली, 9 जनवरी: अमेरिका में अचानक चमगादड़ों के काटने की वजह से मौतों की घटनाओं में बढ़ोतरी हो गई है। जबकि, दो साल तक वहां ऐसे एक भी मामले सामने नहीं आए थे। इन घटनाओं के बाद अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने लोगों को चेतावनी जारी करके चमगादड़ों के काटने या खरोचनें की वजह से होने वाली बीमारी से सावधान रहने को कहा है। सीडीसी की चिंता इस वजह से बढ़ गई है, क्योंकि कुछ लोगों ने टीके लगवाने में आनाकानी की थी, नहीं तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, अब सीडीसी ने लोगों को इसको लेकर तमाम तरह से एहतियात बरतने को कहा है। गौरतलब है कि अमेरिका इस समय चमगादड़ की वजह से फैले कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का भी सामना कर रहा है। इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है। भारत में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक रेबीज एक बीमारी है, पर इसकी रोकथाम पूरी तरह संभव है। यह एक वायरल संक्रमण है, जो इंसानों और जानवरों के लिए हमेशा ही घातक होता है।

अमेरिका ने किया चमगादड़ों से सावधान!

अमेरिका ने किया चमगादड़ों से सावधान!

अमेरिका में चमगादड़ों से होने वाली रेबीज बीमारी के चलते पांच लोगों की जान चली गई है। 2021 में चमगादड़ों की वजह से वहां हुए मौत का यह आंकड़ा एक दशक में सबसे ज्यादा है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक तीन लोगों की मौत तो पिछले साल 28 सितंबर से 10 नवंबर के बीच हुई है। जबकि, इससे पहले दो साल तक वहां चमगादड़ों की वजह से इंसानों को होने वाली रेबीज का एक भी केस नहीं आया था। दरअसल, अमेरिका इस समय कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट से बेहाल है और कोविड का भी सीधा कनेक्शन चमगादड़ों से जुड़ा बताया जाता है। ऐसी स्थिति में सीडीसी ने लोगों को चमगादड़ों के हमलों से बचने की चेतावनी जारी कर दी है, ताकि रेबीज वायरस का खतरा ना बढ़ जाए।

चमगादड़ पेश कर रहे हैं बड़ा खतरा-सीडीसी

चमगादड़ पेश कर रहे हैं बड़ा खतरा-सीडीसी

सीडीसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हाल में चमगादड़ों के काटने से जिन तीन लोगों की मौत हुई है, उनमें से दो व्यस्क और एक बच्चा भी शामिल हैं। इन सभी लोगों पर चमगादड़ों ने उनके घरों के पास ही हमला किया है। हालांकि, इन तीनों ही मामलों में लोगों ने पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सिस (पीईपी) नहीं ली, जो अगर लक्षणों की शुरुआत से पहले लिया जाए तो रेबीज को रोका जा सकता है। सीडीसी में रेबीज के एक्सपर्ट रायन वैलेस ने कहा है कि 'अमेरिका में हम रेबीज से होने वाले संक्रमण को काफी कम कर चुके हैं, लेकिन ताजा मामले चमगादड़ों की वजह से बड़ा खतरा पेश कर रहे हैं।'

अमेरिका में चमगादड़ की वजह से है रेबीज का खतरा

अमेरिका में चमगादड़ की वजह से है रेबीज का खतरा

आमतौर पर हम जानते हैं कि रेबीज वायरस का ताल्लुक कुत्तों या बंदर जैसे जानवरों के काटने या खरोंचने की वजह से होता है, लेकिन अमेरिका में चमगादड़ रेबीज के बहुत बड़े कारण रहे हैं। वैसे तो अमेरिका में रेबीज को काफी हद तक नियंत्रित किया जा चुका है, लेकिन पिछले साल पांच-पांच मामले आने से स्वास्थ्य एक्सपर्ट की चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। वैसे अमेरिका में 1996 से लेकर 2018 तक रेबीज के कुल 89 मामले सामने आए थे, जिनमें से 70% चमगादड़ों की वजह से थे।

रेबीज के लक्षण क्या हैं और यह कितना घातक है ?

रेबीज के लक्षण क्या हैं और यह कितना घातक है ?

रेबीज के लक्षण आने में 3 से 12 हफ्तों का वक्त लग सकता है। सीडीसी के मुताबिक शुरुआती लक्षणों में फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं, जैसे कि कमजोरी, बुखार, सिरदर्द और बेचैनी, जहां पर चमगादड़ ने काटा है, वहां पर चुभन या खुजली। एक बार रेबीज के लक्षण सामने आ गए तो यह लगभग हमेशा ही घातक साबित हो सकता है। यह जानना जरूरी है कि चमगादड़ों के काटने या खरोंचने के निशान हमेशा दिखाई नहीं पड़ते, लेकिन वह भी संक्रमित सलाइवा से वायरस फैला सकता है। सीडीसी के मुताबिक अगर चमगादड़ के संपर्क में आए हैं तो फिर डॉक्टरों से संपर्क जरूर करें। अमेरिका में हर साल करीब 60,000 लोगों को रेबीज से बचाव के टीके लगाए जाते हैं। सीडीसी के मुताबिक लक्षण आने से पहले शुरू की गई रेबीज की रोकथाम का इलाज लगभग हमेशा ही प्रभावी रहता है।

रेबीज से मौत रोके जा सकते थे

रेबीज से मौत रोके जा सकते थे

अमेरिका में पिछले साल चमगादड़ों के हमले से जो पांच मौते हुईं हैं, उनमें पाया गया है कि दो में पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक एक व्यक्ति के तो घर में ही चमगादड़ों का बसेरा था और दूसरे ने हाथ से उसे पकड़ने की गलती की थी। एक मामले मामलों में पीड़ित ने चमगादड़ को काटने का बाद छोड़ दिया, जबकि अगर पकड़ कर रखते तो उसकी जांच की जा सकती थी। दूसरे मामले में पीड़ित ने काटने वाले चमगादड़ को पकड़ भी लिया और जांच के लिए दिया भी, लेकिन इलाज से मना कर दिया, क्योंकि उसे वैक्सीन से डर लगता था। जबकि उस चमगादड़ की रेबीज वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बाकी दो मामलों में लोग रेबीज के जोखिम को समझ ही नहीं पाए या उसके काटने और खरोंचने को महसूस ही नहीं कर पाए।

चमगादड़ों के काटने से कैसे बचें ?

चमगादड़ों के काटने से कैसे बचें ?

सीडीसी के मुताबिक अगर चमगादड़ के संपर्क के आते में हैं तो इसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने की कोशिश करें, ताकि इसकी जांच की जा सके। कभी भी इसे खुले हाथों से छूने या पकड़ने का जोखिम ना लें। अगर किसी तरह से आपके घर में कभी चमगादड़ आ जाता है तो बच्चों और पालतू जानवरों को उससे दूर रखें। उन रास्तों को खोल दें, जिसके जरिए वह बाहर जा सके। अगर सुरक्षित उपायों से उसे पकड़ सकते हैं तो पकड़ने की कोशिश करें। लेकिन, इसमें किसी भी तरह की असावधानी की गुंजाइशन न रहने दें। अगर कोई किसी तरह से उसके संपर्क में आ जाए तो एक्सपर्ट से फौरन सलाह लें। हालांकि, यह भी कहा गया है कि चमगादड़ हमारे दुश्मन नहीं हैं। वह कई कीड़े-मकोड़े को खाते हैं, जो दूसरी बीमारियां फैला सकते हैं। दिक्कत तब होती है, जब इंसान और चमगादड़ एक-दूसरे के संपर्क में आ जाते हैं। यह दोनों के लिए खतरा है।

जानवरों के काटने के बाद क्या उपचार करना चाहिए ?

जानवरों के काटने के बाद क्या उपचार करना चाहिए ?

वैसे रेबीज नाम की बीमारी कुत्ते,बंदर, बिल्ली,तेंदुआ, लोमड़ियां, चमगादड़, रकून और स्कंक जैसे जानवरों के काटने की वजह से भी हो सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक सबसे पहले घाव को साबुन और बहते पानी से 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। घाव पर उलब्ध एंटीसेप्टिक (स्प्रिट/आयोडिन आदि) लगाएं। घाव को खुला रहने दें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और एंटी रेबीज और इम्यूनोग्लोबिन सिरम के टीके लगवाएं।

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