रूस की धमकियों के बावजूद नाटो का सदस्य बनने जा रहा यह देश, अब पुतिन क्या करेंगे?

रूस की परवाह किए बगैर फिनलैंड ने आखिरकार नाटो की सदस्यता लेने जा रहा है। राष्ट्रपति शाऊली निनिस्टो ने कहा कि वे रूस की धमकियों के बावजूद बिना देरी किए नाटो का हिस्सा बनेंगे।

हेलिंस्की, 12 मईः रूस की परवाह किए बगैर फिनलैंड ने आखिरकार नाटो की सदस्यता लेने जा रहा है। राष्ट्रपति शाऊली निनिस्टो और प्रधान मंत्री सना मारिन ने गुरुवार को एक संयुक्त बयान देते हुए कहा कि वे रूस की धमकियों के बावजूद बिना देरी किए सुरक्षा गठबंधन में शामिल होंगे। नाटो में शामिल होने का उद्देश्य देश को 'संपूर्ण विनाश' और 'सबसे अप्रिय परिणामों' से सुरक्षित रखना है।

हमारा मकसद किसी से दुश्मनी नहीं

हमारा मकसद किसी से दुश्मनी नहीं

राष्ट्रपति सौली नीनिस्टो ने कहा कि हमारा मकसद किसी से दुश्मनी नहीं है। फिनलैंड के औपचारिक फैसले की घोषणा रविवार को की जाएगी। हालांकि औपचारिक रूप से नाटो में शामिल होने की प्रक्रिया को पूरा होने में अक्टूबर तक का समय लग सकता है। फिनलैंड का यह निर्णय पुतिन को परेशान करने वाला है क्योंकि यूक्रेन द्वारा नाटो की सदस्यता लेने की चाहत के बाद ही रूस ने अपने इस पड़ोसी देश पर हमला किया था।

रूसी नेतृत्व को आइना देखना चाहिए

रूसी नेतृत्व को आइना देखना चाहिए

राष्ट्रपति सौली नीनिस्टो से जब यह पूछा गया कि इस फैसले के बाद अब वे रूस से क्या कहेंगे तो उनकी प्रतिक्रिया थी, 'आप इसका कारण बने हैं। आपको आइने में अपनी शक्ल देखनी चाहिए' फिनलैंड के इस फैसले के बाद अब रूस की सीमाओं पर पश्चिमी देशों की उपस्थिति 754 मील से बढ़कर 1584 मील तक की हो जाएगी। फिनलैंड, रूस के साथ 830 मील की सीमा साझा करता है। अब तक रूस के संग मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए वह नाटो से बाहर रहा है।

यूक्रेन पर हमले के बाद बदला फैसला

यूक्रेन पर हमले के बाद बदला फैसला

इससे पहले रूस से युद्ध में यूक्रेनी सरकार के कदम पीछे न हटने के बाद फिनलैंड और स्वीडन ने नाटो जॉइन करने की बात कही थी। यूक्रेन पर रूस के हमले से फिनलैंड और स्वीडन दोनों देशों का यह पुराना विश्वास टूट गया है कि ताकतवर पड़ोसी से टकराव टालने का सबसे अच्छा तरीका किसी भी सैन्य संगठन से बाहर रहना है।

स्वीडन भी नाटो का बन सकता है हिस्सा

स्वीडन भी नाटो का बन सकता है हिस्सा

नार्डिक देश के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध में रूस के हाथों पराजय के बाद से फिनलैंड अभी तटस्थ रुख अख्तियार किए था। अभी स्वीडन की ओर से आधिकारिक ऐलान बाकी है। ऐसा कहा जा रहा है कि अगले सप्ताह स्वीडन भी फिनलैंड का अनुसरण करते हए जल्द कोई कदम उठा सकता है।

रूस ने दी थी धमकी

रूस ने दी थी धमकी

इससे पहले रूस सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने स्वीडन और फिनलैंड के नाटो में शामिल होने पर कड़ी चेतावनी भी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर स्वीडन और फिनलैंड को नाटो में शामिल के इच्छुक हैं तो रूस को परमाणु हथियारों समेत अपने बलों को मजबूत करना होगा। साथ ही रूस को बाल्टिक सागर में अपनी नौसेना और वायु सेना को मजबूती के साथ तैनात करना होगा।

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