दो महिला प्रधानमंत्रियों ने पुतिन का बढ़ाया सिरदर्द, यूक्रेन के बाद रूस करेगा स्वीडन- फिनलैंड पर हमला?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने से ठीक पहले मांग की थी, कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानि नाटो, पूर्वी यूरोप के भीतर अपना पैर पसारना फौरन बंद करे।
मॉस्को, मार्च 06: यूक्रेन में लगातार भीषण लड़ाई जारी है और अभी तक पुतिन को यूक्रेन में जीत हासिल नहीं हुई है, लेकिन दो और ऐसे देश हैं, जिन्होंने रूस का सिरदिर बढ़ाना काफी तेज कर दिया है। यूक्रेन पर रूस के हमला करने के पीछे की वजह साफ थी, कि यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं किया जाए, लेकिन रूस के दो और पड़ोसी देश, फिनलैंड और स्वीडन की जनता ने नाटो में शामिल होने की बहुमत से इच्छा जताई है। जिसके बाद सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या व्लादिमीर पुतिन अब स्वीडन और फिनलैंड पर भी हमला करेंगे?

क्यों भारी गुस्से में हैं पुतिन?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने से ठीक पहले मांग की थी, कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानि नाटो, पूर्वी यूरोप के भीतर अपना पैर पसारना फौरन बंद करे। दरअसल, नाटो का गठन ही शीतयुद्ध के वक्त रूस को रोकने के लिए हुआ था, लिहाजा रूस हमेशा से नाटो गठबंधन के खिलाफ रहा है और रूस का कहना है कि, नाटो रूस के नजदीक नहीं आए और रूस के पड़ोसी देशों को नाटो अपने संगठन में शामिल नहीं करे। रूस हमेशा से कहता आया है, कि नाटो गठबंधन से रूस की सुरक्षा को खतरा है, लेकिन नाटो लगातार रूस की सीमा के पास जाने की कोशिश करता रहा है। भारत के रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल शशि अस्थाना ने इंडिया टूडे से बातचीत के दौरान कहा कि, ''यूक्रेन युद्ध अमेरिका और नाटो का डबल गेम है और इन दोनों ने यूक्रेन को 'मरने' के लिए छोड़ दिया है''। उन्होंने कहा कि, 'नाटो असल में यूक्रेन को संगठन में शामिल भी नहीं करना चाहता है और इसका ऐलान भी खुलेआम नहीं करता है।' लेकिन, ये बातें पुतिन के गुस्से को काफी भड़का रही हैं।

क्या है नाटो, कब हुआ था गठन?
साल 1949 में द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के फौरन बाद नाटो का गठन किया गया था, और गठन के वक्त नाटो गठबंधन में 12 संस्थापक देश थे और इसके संस्थापक देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे देश शामिल थे। नाटो गठबंधन की सबसे खास बात ये है, कि किसी एक सदस्य देश के खिलाफ सशस्त्र हमले की स्थिति में, अन्य नाटो सहयोगी उनके बचाव में आएंगे। इस वक्त नाटो गठबंधन में 30 देश शामिल हैं और अगर इन 30 देशों में किसी भी एक देश पर हमला होता है, तो सभी 30 देश मिलकर हमला करेंगे। यानि, एक देश को 30 देश से लड़ना होगा और रूस को इसी बात का डर है। वहीं, सोवियत संघ से युद्ध के विस्तार होने के बाद उत्पन्न खतरों की वजह से ही नाटो का गठन किया गया था और इसीलिए रूस को नाटो से सख्त ऐतराज रहा है।

नाटो को रूस का जबाव
1955 में, सोवियत संघ ने नाटो के खिलाफ एक अन्य सैन्य साझेदारी का निर्माण किया था, जिसमें रूस के पड़ोस में स्थित कई कम्युनिस्ट शासित देशों को शामिल किया गया था, जिसे वारसॉ संधि भी कहा जाता है और इसमें पूर्वी यूरोपीय कम्युनिस्ट देश शामिल हुए थे। लेकिन, सोवियत रूस के पतन के बाद से, कई पूर्व वारसॉ संधि के सदस्यों ने नाटो के साथ सेना में शामिल होने का विकल्प चुना है - जैसे अल्बानिया और पोलैंड। लेकिन गठबंधन के विस्तार ने रूस के साथ तनाव पैदा कर दिया है, जैसा कि राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट कर दिया है, कि वह नाटो में शामिल होने के लिए पूर्वी ब्लॉक से किसी भी आकांक्षा को अपनी सीमाओं के लिए एक खतरे के रूप में देखते हैं।

नाटो ही है यूक्रेन युद्ध की प्रमुख वजह?
एक्सप्रेस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन नाटो का भागीदार तो है, लेकिन यूक्रेन को नाटो का सदस्य नहीं बनाया गया है। यूक्रेन पिछले कई सालों से नाटो में शामिल होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन नाटो के कई देश रूस की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहते हैं और पिछले कुछ सालों में नाटो देशों के बीच भी काफी मनमुटाव रहा है। वहीं, अब तक यूक्रेन पर रूस ने हमला कर दिया है, तब लगातार मांग की जा रही है, कि यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाया जाए, लेकिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन साफ कर चुके हैं, कि अगर बीच में कोई भी आने की कोशिश करता है, तो फिर ऐसी तबाही मचाई जाएगी, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है और अमेरिका भी इस बात से डरा है। लेकिन, अमेरिका की तरफ से ये भी नहीं कहा जा रहा है, कि यूक्रेन को नाटो में शामिल नहीं किया जाएगा।

क्या फिनलैंड-स्वीडन होंगे शामिल?
यूक्रेन में रूसी सेना जिस तरह से तबाही मचा रही है, उसे देखते हुए फिनलैंड और स्वीडन को नाटो गठबंधन में शामिल करने की मांग की जाने लगी है, जो अभी तक नाटो के सदस्य नहीं हैं। फिनलैंड और स्वीडन के राजनीतिक वर्ग अब नाटो में शामिल होने के लिए गंभीरता से विचार करने लगे हैं और इन दोनों देशों की जनता का एक बड़ा हिस्सा अब नाटो में शामिल होने का समर्थन करने लगा है। यूक्रेन युद्ध से पहले स्वीडन के लोगों का रूझान नाटो को लेकर ज्यादा नहीं था, लेकिन यूक्रेन की बर्बादी देखने के बाद अब स्वीडन के नाटो में शामिल होने की बात का बहुमत से समर्थन किया गया है।

स्वीडन-फिनलैंड में सर्वे
पहली बार, स्वीडन के अधिकांश लोगों ने नाटो सदस्यता का समर्थन करने के लिए सर्वे में वोट डाला है। आफ्टनब्लाडेट अखबार के एक सर्वेक्षण के अनुसार, स्वीडन की 51 प्रतिशत जनता ने नाटो में शामिल होने की बात पर मुहर लगाई है। वहीं, फिनलैंड में भी इसी हफ्ते एक सर्वेक्षण किया गया है, जिसमें 53 प्रतिशत लोगों ने फिनलैंड के नाटो गठबंधन में शामिल होने का समर्थन किया है और अगर दोनों देशों के सर्वे को इसमें शामिल कर लिया जाता है, तो यह संख्या बढ़कर 66 प्रतिशत हो जाती है। हालांकि, फिनलैंड और स्वीडन के लिए नाटो में शामिल होने का दरवाजा खुला हुआ है, लेकिन इन दोनों ही देशों के नेताओं ने अभी तक नाटो गठबंधन में शामिल होने की मांग नहीं की है।

फिनलैंड ने खोला रूस के खिलाफ मोर्चा?
वहीं, यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर चर्चा के लिए शुक्रवार को फिनलैंड के राष्ट्रपति सौली निनिस्टो ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की है। वहीं, इस हफ्ते की शुरुआत में फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मारिन ने भी संवाददाताओं से कहा था कि, उनका देश इस बात का मूल्यांकन कर रहा है कि "रूस ने कौन सी रेखा को पार किया है और वह कौन सी रेखा है जिसे रूस पार नहीं करेगा"। वहीं, आगे उन्होंने कहा कि, "हम मूल्यांकन कर रहे हैं, कि अगर रूस कुछ सीमा रेखा को पार करता है, तो क्या हम अकेले या दूसरों के साथ मिलकर इसका सामना करते हैं?"।

स्वीडन-फिनलैड को चेतावनी
वहीं, यूक्रेन पर हमला करने के ठीक बाद रूसी विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर अपने उन पड़ोसी देशों को गंभीर चेतावनी दी है, जो नाटो में शामिल होने का सपना देख रहे हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़खारोवा ने कहा कि, "फिनलैंड और स्वीडन को अन्य देशों की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी सुरक्षा का आधार नहीं बनाना चाहिए और नाटो में उनके प्रवेश के हानिकारक परिणाम हो सकते हैं और उन्हें भी सैन्य और राजनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।" रूसी विदेश मंत्रालय ने बाद में ट्वीटर के जरिए भी स्वीडन और फिनलैंड को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी है।

रूस की धमकी से डरेंगे दोनों देश?
वहीं, रूसी विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर स्वीडन और फिनलैंड को चेतावनी देते हुए ट्वीटर पर लिखा है कि, "हम उत्तरी यूरोप में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक सैन्य गुटनिरपेक्ष नीति के लिए फिनिश सरकार की प्रतिबद्धता को एक महत्वपूर्ण कारक मानते हैं।" ट्वीट में आगे कहा गया है कि, 'फिनलैंड के NATO में शामिल होने के गंभीर सैन्य और राजनीतिक परिणाम होंगे।' आपको बता दें कि, स्वीडन और फिनलैंड दोनों आर्कटिक सर्कल में रूस की सीमा से जुड़ते हैं और रूस को स्वीडन और फिनलैंड को लेकर भी वही डर है, जैसा डर यूक्रेन को लेकर है। यूक्रेन के अलावा ये दोनों देश भी काफी वक्त से नाटो में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे रूस सीधे तौर पर अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
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