कोरोना संकट में रॉकस्टार बनीं पेरु की 35 वर्षीय वित्त मंत्री, गरीबों के लिए जो किया उसकी हो रही तारीफ
नई दिल्ली। दुनियाभर में फैले कोरोना संकट के बीच कई देशों के राजनेता आगे आए हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं। आज हम आपको पेरू की 35 वर्षीय वित्त मंत्री मारिया एंटोनियो अल्वा से मिलवाने जा रहे हैं जिन्होंने विनाशकारी महामारी के दौरान पेरु की आम जनता के लिए एक महत्वाकांक्षी रिकवरी पैकेज का संचालन कर दुनिया के सामने एक मिसाल पेश की है। आज हर कोई मारिया एंटोनियो अल्वा की प्रशंसा कर रहा है और सोशल मीडिया पर वह एक रॉकस्टार बनकर सामने आई हैं।

पेरु की 35 वर्षीय वित्त मंत्री ने जीता जनता का दिल
गौरतलब है कि पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमितों की संख्या 36 लाख के पार पहुंच चुकी है और 2.52 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। COVID-19 महामारी से पेरु भी अछूता नहीं है और देश में अब तक 51 हजार से अधिक लोग संक्रित हैं जबकि 1444 लोगों की मौत हो चुकी है। इस संकट की घढ़ी में पेरु की 35 वर्षीय वित्त मंत्री अपने नागरिकों के लिए मददगार बनकर सामने आई हैं। छोटे व्यवसायों और आम नागरिकों के लिए अपनी उदारता के लिए उनकी तारीफ हो रही है।

कोरोना पर काम कर रहे विशेषज्ञ ने की तारीफ
कोरोना महामारी के दौर में जनता से अच्छे तालमेल, छोटे व्यवसायों और कमजोर परिवारों की मदद के लिए एक बेहतरीन राहत पैकेज तैयार कर पेरू की वित्त मंत्री मारिया एंटोनिएटा अल्वा स्टार बन गई हैं। मारिया एंटोनियो अल्वा के प्रोफेसर और हार्वर्ड के अर्थशास्त्री रिकार्डो हौसमैन ने कहा कि पेरू देश मैक्रो प्रतिक्रिया के संदर्भ में एक स्पष्ट नेता है। बता दें कि रिकार्डो हौसमैन पेरु सहित अन्य 10 देशों के साथ मिलकर कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर मारिया अल्वा नहीं होती तो आप पेरु में बहुत अलग परिणाम की कल्पना कर सकते थे। अल्वा को राष्ट्रपति मार्टिन विजकार्रा के मंत्रिमंडल में एक केंद्रीय व्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

असमानता और गरीबी खत्म करना चाहती हैं आल्वा
पूर्व वित्तमंत्री रहे कार्लोस ओलिव ने अल्वा के बारे में कहा कि वह संवाद करने में बहुत अच्छी हैं और वर्तमान संदर्भ में यह बहुत महत्वपूर्ण है। अल्वा एकमात्र महिला नेता हैं जो सहस्राब्दी वित्त मंत्रियों के समूह का हिस्सा है, जिसमें अर्जेंटीना के 37 वर्षीय मार्टिन गुजमैन, डोमिनिकन गणराज्य के जुआन एरियल जिमेनेज (35) और इक्वाडोर के रिचर्ड मार्टिनेज (39) शामिल हैं। अल्वा के एक अन्य प्रोफेसर एनरिक वासक्ज ने बताया कि वह शुरू से ही एक छात्र के रूप में भी विरोधाभासों, निरंतर असमानता और गरीबी से परेशान थीं।

भारत से है खास जुड़ाव
बता दें कि पिछले साथ अक्तूबर में अल्वा को वित्त मंत्रालय की कमान मिली थी। पद संभालने के बाद सबसे पहले आल्वा सरकारी निर्माण कार्यों में आई मंदी को खत्म करना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने क्षेत्रीय और स्थानीय प्रशासन की ओर से खर्च बढ़ाने के लिए मदद की। इसक परिणाम यह हुआ कि पब्लिक इंवेस्टमेंट में रिकॉर्ड तेजी आई, साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भी भरोसा जीता। इसके अलावा उन्होंने गरीबों को मदद पहुंचाने के लिए आम सहमति से सीधे नकदी देने, पे-रोल सब्सिडी और सरकार की ओर से व्यापार लोन जैसे कई फैसले लिए। बता दें कि आल्वा का भारत से भी एक खास लगाव है, पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारत में लड़कियों के लिए शिक्षा के मौके पर अध्ययन किया था।
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