आखिरकार 2 साल बाद खत्म हुई रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या, बांग्लादेश-म्यांमार के बीच समझौता
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नई दिल्ली। तकरीबन दो साल के बाद आखिरकार शरणार्थियों के मुद्दे पर बांग्लादेश और म्यांमार के बीच आपसी सहमति बन गई है। दोनों ही देश 650000 रोहिंग्या शरणार्थियों को फिर से अपने देश में स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए हैं। ये सभी शरणार्थी म्यांमार के रखाइन शहर में हिंसा भड़कने के बाद दर-बदर हो गए थे और उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन दो साल की मुश्किल के बाद आखिरकार दोनों देश उन्हें फिर से बसाने के लिए तैयार हो गए हैं, दोनों देशों के बीच करार हो गया है जिसके बाद रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या खत्म हो सकती है।

शरणार्थियों के मुद्दे पर पहली बार दोनों देशों के बीच बैठक हुई, इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच नैपिदा में मंगलवार को बैठक हुई, जहां दोनों देशों के बीच करार हुआ कि शरणार्थियों की समस्या को अब खत्म किया जाए और उन्हें एक बार फिर से बसाया जाए। इस बात की बांग्लादेश के अधिकारियों की ओर से पुष्टि की गई है। इस करार के अनुसार बांग्लादेश इसके लिए पांच ट्रांसिट कैंप बनाएंगा जहां शरणार्थियों शुरुआत में दो रिसेप्शन सेंटर पर म्यांमार की ओर से आने वाले शरणार्थियों का स्वागत किया जाएगा।
म्यांमार इन लोगों को अस्थायी रूप से ला फो कुंग में शरण देगा और जो लोग वापस आएंगे उनके लिए घर बनवाएगा। वहीं म्यांमार उन लोगों को भी फिर से बसाएगा जो अपने घरों से बेघर हो गए थे। दोनों ही देशों ने इन शरणार्थियों की पहचान के लिए एक फॉर्म भरवाने का भी फैसला लिया है। इस समस्या के दौरान जो बच्चे अनाथ हो गए या किसी वजह से अकेले रह गए हैं उनके लिए भी इंतजाम किए जाएंगे।












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