ईरान के हमले के डर से इजराइल से लेकर अमेरिका तक हड़कंप, बाइडेन ने जारी की एडवाइजरी, क्या होगा आगे?
Iran-Israel News: पश्चिम एशिया में युद्ध खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है और इजराइल और अमेरिका के मन में ईरान के हमले का खौफ इस कदर तक बढ़ गया है, कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने इजराइल में अपने कर्मचारियों के लिए यात्रा प्रतिबंधित कर दी है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि 11 दिन पहले सीरिया में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर हमला करने के इजरायल के कदम के जवाब में ईरान, इजराइल के ऊपर भीषण हमले की योजना बना रहा है। जिसे देखते हुए बाइ़डेन प्रशासन ने अमेरिकी अधिकारियों को इजराइल जाने से रोक दिया है।

अमेरिका को है ईरान के हमले का डर
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी चीन, तुर्की, सऊदी अरब और अन्य यूरोपीय देशों में अपने समकक्षों से बात की है और उनसे ईरान को इज़राइल पर हमला करने से रोकने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है, कि यह किसी के हित में नहीं है और कहा है, कि इन देशों को ईरान से आगे नहीं बढ़ने का आग्रह करना चाहिए।
इजराइल ने पिछले हफ्ते सीरिया के दमिश्क में ईरानी वाणिज्य दूतावास को निशाना बनाकर हवाई हमला किया था, जिसमें 13 ईरानी सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई थी, इसलिए तेहरान ने कार्रवाई करने और जवाबी हमला करने की कसम खाई है।
1 अप्रैल को इजराइल का ये हवाई हमला विशेष रूप से नाटकीय था, क्योंकि इसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के कुद्स फोर्स के दो जनरलों और पांच अन्य अधिकारियों की मौत हो गई थी। इसके अलावा, यह एक राजनयिक एन्क्लेव में हुआ, और अभी तक इजराइल ने कभी भी दूतावास में हमला नहीं किया है, यहां तक दी दमिश्क में भी नहीं।
हमले के बाद, ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीराब्दुल्लाहियन ने कहा था, कि इजराइल को "दंडित किया जाएगा और ईरानी दूतावास परहमले के लिए अमेरिका जिम्मेदार है और उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।"
हालांकि, अमेरिका ने हमले में किसी भी तरह का हाथ होने से साफ इनकार कर दिया है।
गुरुवार को, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने यह भी सुझाव दिया, कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इजरायल के हमले की निंदा की होती, तो दमिश्क में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर घातक इजरायली हवाई हमले पर किसी भी ईरानी सैन्य प्रतिक्रिया को टाला जा सकता था।
इजरायली हवाई हमले और उसके बाद जवाबी हमले की धमकियों के बाद, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है, कि ईरान इजरायल के अंदर लक्ष्यों पर बैलिस्टिक मिसाइलों या ड्रोन का उपयोग करके हाई इंटेंसिटी हमले कर सकता है। इस रिपोर्ट में एक सूत्र ने कहा है, कि यह "कब, अगर-मगर" का मामला नहीं है और ईरान हमला करने वाला है। हालांकि, फिलहाल यह कम स्पष्ट है, कि क्या तेहरान सीधे कार्रवाई करेगा या फिर अपने प्रॉक्सी नेटवर्क पर भरोसा करेगा।
कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स ये भी कह रहे हैं, कि इजराइल इसी फिराक में ही है, कि ईरान इस युद्ध में शामिल हो, ताकि फिर वो ईरान के परमाणु ठिकाने को नेस्तनाबूत कर दे। क्योंकि, ईरानी हमले के बाद वो भी जवाबी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हो जाएगा। लिहाजा, जंग फैलने की आशंका काफी ज्यादा बढ़ चुकी है, क्योंकि ईरान भी सैनिकों और हथियारों की संख्या में इजराइल से कम नहीं है।
अमेरिकी खुफिया विभाग के हवाले से ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि ईरान तेल अवीव में इजरायली सैन्य मुख्यालय किरया को निशाना बनाने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अन्य संभावित लक्ष्य मध्य इजराइल में पाल्माचिम या उत्तर में मेरोन में हवाई अड्डे, साथ ही इजराइली संसद या फिर यरूशलेम में प्रधान मंत्री का कार्यालय हो सकता है।
यहां तक कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी एक सूत्र के हवाले से खबर दी है, कि इजरायल भी अगले 24 से 48 घंटों के भीतर दक्षिणी या उत्तरी इजरायल में संभावित ईरानी हमले को रोकने की तैयारी कर रहा है।
युद्ध की आशंका इसलिए भी काफी ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के करीबी सोशल मीडिया अकाउंट इजराइल के हाइफ़ा हवाई अड्डे और डिमोना में इसकी परमाणु सुविधा पर नकली मिसाइल हमलों के वीडियो पोस्ट कर रहे हैं।
अमेरिकी अखबार ने आगे बताया है, कि ईरान गोलान - सीरिया के वो इलाके, जिसे इजराइल ने छीन लिया है, उसपर और यहां तक, कि गाजा में भी हमले की तैयारी कर सकता है। अधिकारियों से बात करते हुए अखबार ने कहा है, कि ईरान एक अन्य विकल्प पर विचार कर रहा है, जो कि ज्यादातर अरब दुनिया में इजरायली दूतावासों पर हमला हो।
इजराइल पर कैसे हमला कर सकता है ईरान?
खुफिया अधिकारियों की राय है, कि ईरान, इजराइल के खिलाफ सीधा हमला नहीं करेगा, क्योंकि फिर इसे युद्ध माना जाएगा और इजराइल को हमले के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का अधिकार मिल जाएगा। अमेरिका पहले ही कह चुका है, कि युद्ध की स्थिति में वो इजराइल के साथ खड़ा रहेगा।
ऐसी स्थिति में, विशेषज्ञों का मानना है, कि तेहरान, इजराइल से मुकाबला करने के लिए अपने शस्त्रागार में मौजूद लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग करेगा। हाल ही में अटलांटिक काउंसिल के एक निदेशक जोनाथन पैनिकॉफ ने कहा है, कि "इजराइली जमीन पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करना, या फिर ड्रोन हमला करना काफी ज्यादा असरदार साबित होगा, लेकिन ये काफी ज्यादा जोखिम भरा भी होगा।"
हालांकि, ईरान के पास एक दूसरा विकल्प भी है और वो है, इजराइली सीमा पर हमला करने के लिए हमास, हिज्बुल्लाह, कातिब हिजबुल्लाह, हूती और बद्र संगठनों का इस्तेमाल करना। दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के पास मिसाइलों का एक विशाल भंडार है जिसका उपयोग वे इजराइल को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट्स ये भी हैं, कि हिज्बुल्लाह नहीं चाहता है, कि वो इजराइल से आमने-सामने की लड़ाई लड़े, क्योंकि ऐसी स्थिति में इजराइल उसका नामोनिशान मिटा सकता है।
कुल मिलाकर एक और युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और अगर ईरान सीधे युद्ध में शामिल होता है, तो दुनिया एक और भीषण लड़ाई की गवाह बन सकती है।
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