न्यूजक्लिक के पत्रकारों पर छापेमारी...पूर्व PAK मंत्री ने लोकतंत्र पर उठाए सवाल, पाकिस्तानियों ने ही धोया
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मंगलवार की सुबह न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक से जुड़े 30 ठिकानों पर छापेमारी की। साथ ही पुलिस कई पत्रकारों को अपने साथ ले गई है। इनमें अभिसार शर्मा, प्रबीर पुरकायस्थ, संजय राजौरा, उर्मिलेश, भाषा सिंह, परंजॉय गुहा ठाकुरता, ऑनिंदो चक्रवर्ती और सोहेल हाशमी शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि 17 अगस्त को दर्ज हुए एक मामले में यूएपीए और आईपीसी की अन्य धाराओं में यह कार्रवाई हुई है और अभी भी छापेमारी चल रही है। न्यूजक्लिक से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी को लेकर पाकिस्तान से इमरान खान की सरकार में मंत्री रहे चौधरी फवाद हुसैन ने भी टिप्पणी की है।

फवाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है- सुबह-सुबह दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र पत्रकारों के घरों पर छापेमारी की है, भारत में अब केवल कागजों पर लोकतंत्र है, असल में यहां एक फासीवादी सरकार है...
पाकिस्तान के पूर्व मंत्री के इस ट्वीट पर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई है। कई लोग पूर्व मंत्री से उनकी सरकार के दौरान पत्रकारों पर हुई कार्रवाईयों के संबंध में सवाल पूछ रहे हैं तो कई उनपर करारी टिप्पणी कर रहे हैं।
एक्स पर एक यूजर ने फवाद हुसैन से पूछा, आप पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में क्या सोचते हैं? क्या आप उस विषय पर भी कुछ प्रकाश डालना चाहेंगे? मेरा मतलब है कि आप पाकिस्तान में रहते हैं या भारत में?
मोहसिन इकबाल नाम के एक यूजर ने फवाद हुसैन पर व्यंग्य करते हुए लिखा है कि भारत तो हमेशा पाकिस्तान की नकल करता है।
एस्क पर द स्किन डॉक्टर नाम के यूजर ने लिखा है- पाकिस्तान का समर्थन आखिरी चीज है जो वे पत्रकार इस समय चाहेंगे। भारत के लिए चीजें आसान बनाने के लिए धन्यवाद। आपका समर्थन भारतीय सरकार को यह समझाने में बहुत मदद करेगा कि वे पत्रकार वास्तव में भारत में दुश्मन के एजेंडे का प्रचार करने के लिए विदेशी धन ले रहे थे।
आपको बता दें कि 5 अगस्त को न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट जारी कर बताया था कि न्यूजक्लिक को चीन से जुड़े श्रीलंकाई मूल के एक अरबपति नोवेल रॉय सिंघम ने फाइनेंस किया था। वे चीनी प्रोपेगैंडा को बढ़ावा देने के लिए भारत समेत दुनियाभर में संस्थाओं को फंडिंग करते हैं।
इस रिपोर्ट के आधार पर 17 अगस्त को न्यूजक्लिक के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उर्मिलेश, अभिसार सहित कई पत्रकारों को लम्बे समय तक जेल में रखा जा सकता है। इनके खिलाफ IPC की धारा 153 (A) (धर्म, जाति के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के साथ-साथ यूएपीए की कई धाराएं (13, 16, 17, 18 और 22) भी लगाई गईं। धारा 16- आंतकी मामलों से जुड़ी, धारा 17- आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग जुटाना, धारा 18- षड्यंत्र की सजा, धारा 22 सी- कंपनियों द्वारा किए गए अपराध की सजा है।












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