'भारत के साथ आकर्षक साझेदारी', USA ने I2U2 क्वाड ग्रुपिंग की सराहना की
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा, हम पूरी दुनिया में रचनात्मक व्यवस्था करने का प्रयास कर रहे हैं।
भारत के साथ साझेदारी बढ़ाना दुनिया के लिए फायदेमंद होने के साथ-साथ ताकतवर देशों के लिए रणनीतिक जरूरत भी है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने गुरुवार को I2U2 समूह को एक 'आकर्षक नई साझेदारी' करार दिया जो स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों में काम करती है। I2U2 चार देशों का समूह है। इसमें भारत समेत अमेरिका, इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। एशिया में भारत की भागीदारी के साथ बने दूसरे क्वाड समूह यानी I2U2 कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण है।

I2U2 चार देशों का समूह
बता दें कि, संयुक्त राष्ट्र चार्टर को बनाए रखने, साझा दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाली साझा चुनौतियों पर सरकारों की एक विविध श्रेणी के साथ जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए, अमेरिका ने I2U2 को एक आकर्षक नई साझेदारी के तौर पर प्रस्तुत किया है। I2U2 का उद्देश्य पानी, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे छह पारस्परिक रूप से पहचाने गए क्षेत्रों में संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित करना है।

अमेरिका, भारत साझेदारी महत्वपूर्ण
अमेरिका के जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय में जो बाइडेन-कमाल हैरिस प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के विषय में जानकारी देते हुए ,अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन (US National Security Advisor Jake Sullivan) ने कहा, हम पूरी दुनिया में रचनात्मक व्यवस्था करने का प्रयास कर रहे हैं।

काफी महत्वपूर्ण है आई2यू2
उन्होंने मजाक में कहा कि,रचनात्मक, उद्देश्यपूर्ण और उद्यमशील I2U2 आपको थोड़ा हास्यास्पद नाम लगता होगा लेकिन भारत, इजरायल, अमेरिका और सुंयक्त अरब अमीरात के बीच यह एक आकर्षक नई साझेदारी है। जो जल क्षेत्र स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इन देशों के साथ साझा चुनौतियों के विविध श्रेणी में काम कर रहे हैं, जो एक सामान्य दृष्टि को बढ़ावा देता है। उन्होंने इस दौरान क्वाड ग्रुपिंग की सराहना की।

आई2यू2 का लक्ष्य
भारत, इजरायल, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात आई2यू2 के जरिए चिन्हित इलाकों में निवेश को बढ़ावा देगी। इसमें जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस समूह के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ निवेश और आधारभूत ढांचागत क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा। वहीं कम कार्बन उत्सर्जन तकनीक आधारित विकास परियोजनाओं पर जोर दिया जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications