Gold Reserves: अचानक विदेश में रखे सोना को वापस क्यों ला रहा भारत, RBI का क्या है सीक्रेट प्लान

India Bringing Gold back from UK: दुनिया भर में मची उथल-पुथल और युद्ध के माहौल के बीच भारत ने एक बड़ा और साहसिक फैसला लिया है। अपनी आर्थिक सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) विदेशों में रखा अपना सोना तेजी से वापस भारत ला रहा है।

यह कदम केवल दिखावा नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने की एक सोची-समझी रणनीति है। जब दुनिया के बड़े देशों के बीच भरोसे की कमी हो रही है, तब भारत 'अपना सोना, अपनी तिजोरी' के मंत्र पर चल रहा है ताकि संकट के समय किसी दूसरे देश पर निर्भर न रहना पड़े।

India bringing gold back from UK

RBI Gold Reserves: विदेश से सोना वापस क्यों ला रहा भारत?

रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों द्वारा अन्य देशों की संपत्तियां फ्रीज करने की घटनाओं ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। भारत को अब यह महसूस हो रहा है कि लंदन या न्यूयॉर्क की तिजोरियों में रखा सोना राजनीतिक खींचतान के कारण कभी भी फंस सकता है। अपनी संपत्ति पर अपना पूरा नियंत्रण रखने के लिए RBI ने पिछले कुछ महीनों में 100 टन से ज्यादा सोना वापस मंगाया है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट में हमारी संपत्ति पूरी तरह सुरक्षित और हमारे हाथ में रहे।

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सुरक्षा की नई परिभाषा: 'अपना हाथ, जगन्नाथ'

पुराने समय में माना जाता था कि लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना रखना ज्यादा सुरक्षित और व्यापार के लिए आसान है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सोना आपके भौतिक कब्जे में नहीं है, तो संकट के समय वह आपका नहीं कहलाएगा। भारत अब सुरक्षा का मतलब 'विदेशी भरोसा' नहीं बल्कि 'स्वदेशी नियंत्रण' मान रहा है। यही कारण है कि आज भारत के कुल सोने का लगभग 77% हिस्सा देश की अपनी सीमाओं के भीतर सुरक्षित रखा जा चुका है।

आर्थिक मजबूती और सोने पर बढ़ता भरोसा

भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। पहले यह लगभग 14% थी, जो अब बढ़कर 16.7% के करीब पहुंच गई है। यह इस बात का संकेत है कि डॉलर या अन्य विदेशी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव के बीच भारत सोने को सबसे भरोसेमंद 'बीमा' मान रहा है। जब शेयर बाजार या मुद्राएं गिरती हैं, तब सोना ही देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देता है। खुद के पास सोना होने से रिजर्व बैंक को कठिन समय में तुरंत फैसले लेने की आजादी मिलती है।

क्या अब लंदन और न्यूयॉर्क पर भरोसा कम हुआ?

लंदन और न्यूयॉर्क आज भी सोने के व्यापार के सबसे बड़े केंद्र हैं, लेकिन उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। विकसित देशों द्वारा दूसरे देशों के फंड्स को ब्लॉक करने की नीति ने विकासशील देशों को सतर्क कर दिया है। भारत पूरी तरह से नाता नहीं तोड़ रहा, क्योंकि लिक्विडिटी (नकदी की उपलब्धता) के लिए थोड़ा सोना अब भी बाहर है। मगर संदेश साफ है: भारत अब अपनी आर्थिक संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा और अपनी मेहनत की कमाई को अपनी ही जमीन पर रखना बेहतर समझता है।

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