Farmers Protest: अमेरिकी कांग्रेस के इंडिया कॉकश ने किया समर्थन, जानिए भारतीय लोकतंत्र पर क्या कहा ?
US Congressional India Caucus on Farmers Protest: वाशिंगटन डीसी। भारत सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले दो महीने से अधिक समय से किसानों का आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन को लेकर दुनिया भर में बात हो रही है। अब अमेरिका की कांग्रेसनल कमेटी के इंडिया कॉकश में भी इसे लेकर चर्चा हुई है।

पहली बार इंडिया कॉकश की बैठक
कांग्रेसनल इंडिया कॉकश ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि लोकतंत्र के मानकों को बनाए रखना सुनिश्चित किया जाए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति जारी रहने के साथ ही प्रदर्शनकारियों को इंटरनेट उपलब्ध कराए जाने को कहा है।
कांग्रेस के इंडिया कॉकश के सह-अध्यक्ष सांसद ब्रैड शर्मन ने कहा कि उन्होंने दूसरे सह-अध्यक्ष रिपब्लिकन सांसद स्टीव चैबट और उपाध्यक्ष रो खन्ना के साथ के साथ बैठक कर इस बारे में चर्चा की है जिसमें भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू से किसान आंदोलन के बारे में बात करने को कहा गया है।
ये पहला मौका है जब कांग्रेस के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स के इंडिया कॉकश ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर बैठक की है।

सांसदों ने फ्री स्पीच को लेकर भी जताई चिंता
सांसद ब्रैड शर्मन ने कहा "मैंने भारत सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि लोकतंत्र के मानदंडों को बनाए रखा जाए और प्रदर्शनकारियों को शांति से विरोध करने और इंटरनेट और पत्रकारों तक पहुंचने की अनुमति दी जाए। भारत के सभी दोस्तों को उम्मीद है कि सभी पार्टियां एक समझौते पर पहुंच सकती हैं।"
सांसद स्टीव कोहेन ने कहा है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और फ्री स्पीच इसका प्रमुख स्तंभ है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा "मैं किसान आंदोलन को नजदीक से देख रहा हूं और इंटरनेट सेवा के काटे जाने और सरकार द्वारा प्रायोजित हमले के रूप में फ्रीडम ऑफ स्पीच पर संभावित हमले को लेकर चिंतित हूं।"

दिल्ली बॉर्डर पर डटे हैं किसान
पिछले 70 दिनों से तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान दिल्ली के बॉर्डर पर जुटे हुए हैं। इनमें अधिकांश किसान पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हैं। किसानों की मांग है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले ले। सरकार और किसानों के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है। 22 जनवरी को सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई बातचीत में सरकार ने कृषि कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा था लेकिन किसानों ने इसे मानने से इनकार कर दिया था।












Click it and Unblock the Notifications