अर्जेंटीना-UK के बीच फिर गरमाया फॉकलैंड द्वीप मुद्दा, टूट गयी डील, भारत से क्या है कनेक्शन?

ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच फॉकलैंड द्वीप को लेकर 2016 में एक समझौता हुआ था। अब अर्जेंटीना ने एकतरफा तौर पर उससे हटने का निर्णय लिया है। इस द्वीप को लेकर दोनों देशों के बीच 190 सालों से विवाद चल रहा है।

Falkland Islands

Image: Oneindia

अर्जेंटीना ने यूके के साथ अपना 2016 का फॉकलैंड करार तोड़ डाला है और द्वीपों की संप्रभुता पर नई वार्ता की मांग की है। अर्जेंटीना के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मंत्री सैंटियागो कैफ़िएरो ने भारत में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते से हाथ खींच लिया और ब्रिटेन के विदेश सचिव जेम्स क्लेवरली को सूचित किया। इस दौरान उन्होंने अपने ब्रिटिश समकक्ष जेम्स क्लेवरली के साथ बैठक में फॉकलैंड द्वीप विवाद पर फिर से वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव दिया।

अंग्रेजों ने बसाया फॉकलैंड द्वीप

फॉकलैंड को अर्जेंटीना में लास इस्लास माल्विनास के नाम से जाना जाता है। फॉकलैंड द्वीप दो मुख्य द्वीप ईस्ट फॉकलैंड और वेस्ट फॉकलैंड समेत लगभग 200 छोटे द्वीपों से बना है। यह द्वीप अर्जेंटीना की मुख्य भूमि से लगभग 600 किमी और लंदन से 12,700 किमी दूर है। दक्षिण अटलांटिक में स्थित इस द्वीप समूह पर लंबे समय से अर्जेंटीना दावा करता रहा है। फॉकलैंड को पहली बार अंग्रेजों द्वारा साल 1765 में बसाया गया था। हालांकि स्पेन ने कुछ समय बाद इस द्वीप पर कब्जा कर लिया।

आजादी के बाद अर्जेंटीना ने किया दावा

स्पेन से आजादी मिलने के बाद 1820 में अर्जेंटीना ने फॉकलैंड द्वीप पर अपना दावा पेश किया। लेकिन अंग्रेजों ने वर्ष 1833 की शुरुआत में फिर से इस द्वीप पर अपना कब्जा जमा लिया। उन्नीसवीं सदी के आखिर तक इस द्वीप पर 2000 से अधिक ब्रिटिश बसाए जा चुके थे। हालांकि अर्जेंटीना इस द्वीप पर अंग्रेजों के कब्जे का विरोध करता रहा। चूंकि उस दौर में अंग्रेज दुनिया सबसे बड़ी शक्ति थे तो अर्जेंटीना ने कभी अंग्रेजों से लोहा लेना ठीक नहीं समझा।

अर्जेंटीना ने छेड़ा युद्ध

जब संयुक्त राष्ट्र अस्तित्व में आया तो फॉकलैंड का मुद्दा UN में ट्रांसफर हो गया। संयुक्त राष्ट्र ने साल 1965 में विवाद का शांतिपूर्ण समाधान खोजने हेतु ब्रिटेन और अर्जेंटीना को विचार-विमर्श के लिये आमंत्रित करने वाले एक प्रस्ताव को अनुमति दी। इस मुद्दे पर चर्चा चल ही रही थी कि लेकिन इसमें हो रही देरी से नाराज होकर साल 1982 में अर्जेंटीना ने फॉकलैंड पर आक्रमण कर दिया। 74 दिनों के बाद 14 जून को इस जंग में आखिरकार अर्जेंटीना की हार हुई। इस दौरान अर्जेंटीना के 655 और ब्रिटेन के 255 सैनिक मारे गए।

2013 में हुआ जनमत संग्रह

इस द्वीप पर अंग्रेजों की तैनाती कायम रही। इस बीच साल 2009 में फॉकलैंड में एक नया संविधान लागू हुआ जिससे वहां के लोगों के अधिकारों को और अधिक सुरक्षित किया गया। साल 2013 में फॉकलैंड द्वीप पर एक जनमत संग्रह आयोजित किया गया। इसमें 1500 लोगों ने मत डाले। 1497 लोगों ने यूके और 3 लोगों ने अर्जेंटीना के साथ रहना चुना। हालांकि, अर्जेंटीना ने अपने दावे को नहीं छोड़ा, चुनाव को एक अर्थहीन प्रचार स्टंट के रूप में खारिज कर दिया। इसके बाद ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच फॉकलैंड/मालविनास द्वीपों को लेकर 2016 में एक समझौता हुआ।

क्या है फॉकलैंड डील?

इस समझौते में दोनों पक्षों ने फोराडोरी-डंकन डील पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में दोनों देश संप्रभुता के बारे में असहमत होने पर सहमत हुए लेकिन ऊर्जा, शिपिंग और मछली पकड़ने जैसे मुद्दों पर सहयोग करने और युद्ध में मारे गए अज्ञात अर्जेंटीना सैनिकों के अवशेषों की पहचान करने के लिए तैयाय हुए। लेकिन अब अर्जेंटीना द्वारा एकतरफा समझौते को तोड़ने पर इसे ब्रिटेन की कमजोरी से जोड़ा जा रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक यूक्रेन की सैन्य मदद में ब्रिटेन ने खुद को फिलहाल इतना उलझा लिया है कि अर्जेंटीना को ऐसा कदम उठाने का यह सही मौका मालूम पड़ा।

भारत से क्या है कनेक्शन?

इस दावे के पीछे की वजह ये भी है कि बीते साल भी भारत में आयोजित रॉयसीना डायलॉग में अर्जेंटीना ने इस मुद्दे को उछाला था। अर्जेंटीना ने भारत से अपील भी की थी कि वह इस मामले पर ब्रिटेन से बात करे। अर्जेंटीना के विदेश मंत्री सैंटियागो कैफिएरो ने भारत आकर द कमीशन फॉर द डायलॉग ऑन द क्वश्चेन ऑफ द माल्विनास आईलैंड्स इन इंडिया नाम के एक आयोग को भी लॉन्च किया था। अब एक साल बाद भारत में ही यह मुद्दा फिर से उछला है और यही पर अर्जेंटीना ने 2016 की डील को रद्द किया है।

ब्रिटेन ने फॉकलैंड अपना बताया

फिलहाल ब्रिटेन ने द्वीप समूह की संप्रभुता पर बातचीत की संभावना को ठुकरा दिया है। विदेश मंत्री क्लेवर्ली ने एक ट्वीट में कहा कि फॉकलैंड, ब्रिटेन का है। वहां के लोगों को अपने भविष्य को चुनने का हक है और उन्होंने ब्रिटेन के साथ रहना चुना है। अर्जेंटीना स्थित ब्रिटिश राजदूत क्रिस्टी हेस ने 2016 के 'ऐतिहासिक और महत्त्वपूर्ण समझौते' को रद्द करने के अर्जेंटीना के फैसले पर निराशा जताई है। ब्रिटेन के मंत्री डेविड रेटली ने इसे एक "निराशाजनक निर्णय" बताया है। उन्होंने कहा, "अर्जेंटीना ने 1982 के संघर्ष में मारे गए लोगों के परिवारों को सांत्वना देने वाले समझौते से हटने का फैसला किया है।"

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