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चीन ने पैसा देकर फेसबुक को साधा, उइगर मुस्लिमों के आरोपों पर फैलाया प्रोपेगैंडा, खुल गया राज

facebook taking money from china: बीजिंग। दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक चीन की कम्युनिष्ट सरकार के साथ मिलकर उसके अपराधों को ढकने में मदद कर रहा है। फेसबुक चीन से पैसे ले रहा है और इसके बदले चीन को उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार को लेकर लग रहे आरोपों पर अपना दुष्प्रचार करने दे रहा है। एक जांच में इसका खुलासा हुआ है।

चीनी प्रोपेगैंडा में शामिल हुआ फेसबुक

चीनी प्रोपेगैंडा में शामिल हुआ फेसबुक

द प्रेस गजट के अनुसार सिलिकॉन वैली स्थित दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी ने चीन के शिनजियांग में हुए नरसंहार के बारे में झूठी बातें फैलाने वाले कंटेंट को अपने पेज पर प्रमोट करने के लिए चीन से पैसे लिए। चीनी समाचार आउटलेट चाइना डेली और सीजीटीएन ने लाखों यूजर्स तक अपने प्रोपेगैंडा को पहुंचाने के लिए फेसबुक की पेड सर्विस का इस्तेमाल किया था। चाइना डेली चीन में शासन करने वाली कम्युनिष्ट पार्टी का मुखपत्र है।

फेसबुक के बारे में ये जानकारी ऐसे समय में आई है जब उसने गुरुवार को ही उसके ऊपर लोकतंत्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगा है। फेसबुक ने आज ही आस्ट्रेलिया में अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज कंटेंट शेयर करने और उसे देखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। फेसबुक का ये कदम आस्ट्रेलिया सरकार के उस नियम के विरोध में है जिसके मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर न्यूज कंटेंट शेयर करने पर उसके बदले न्यूज आउटलेट को पैसा देना होगा। इस नियम में सबसे खास बात यह थी कि अगर सोशल मीडिया कंपनी न्यूज की कीमत पर सहमत नहीं हो पाती है तो सरकार की तरफ से एक प्रतिनिधि नियुक्त किया जाएगा और वह इस बारे में फैसला देगा।

चीनी प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए सरकारी मीडिया से लिया पैसा

चीनी प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए सरकारी मीडिया से लिया पैसा

एक तरफ फेसबुक ने जहां आस्ट्रेलिया के न्यूज आउटलेट से पैसा वसूलता है वहीं दूसरी तरफ वह चीन से भी पैसा ले रहा है औऱ उसके झूठे दावों को दुनिया के सामने फैलाने में लगा है। पिछले साल अक्टूबर में फेसबुक ने चीन की कम्युनिष्ट पार्टी की प्रोपेगैंडा मशीनरी चाइना डेली के कंटेंट को फैलाने के लिए 400 डॉलर की रकम ली थी जिसमें पश्चिमी देशों पर चीन के बारे झूठ और दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया था।

फेसबुक की प्रचार सामग्री को लेकर की गई जांच में पता चला है कि इस रिपोर्ट को मुख्य रूप से नेपाल में युवाओं को टारगेट किया गया था जो कि शिनजियांग क्षेत्र से सटे हुए इलाके में लगा हुआ है।

इसके साथ ही कोविड-19 महामारी को लेकर चीन के ऊपर लग रहे आरोपों का जवाब देने के लिए भी चीन फेसबुक का इस्तेमाल कर रहा है। अटलांटिक काउंसिल की डिजिटल फोरेंसिक रिसर्च लैब के सहयोग से आयोजित एक एसोसिएटेड प्रेस की खोजी रिपोर्ट में ये सामने आया था। इस सप्ताह की शुरुआत में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया था कि चीनी अधिकारियों ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन द्वारा वायरस फैलाने के आरोपों के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाया था।

चीन ने दिया आरोपों पर जवाब

चीन ने दिया आरोपों पर जवाब

फेसबुक पर पैसा देकर अपने बारे में छवि बनाने की रिपोर्ट सामने आने आने बाद चीन ने अब इस कदम का बचाव किया है।

रिपोर्ट के बारे में पूछने पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने हालांकि आरोपों को लेकर कोई सीधा जवाब तो नहीं दिया लेकिन उन्होंने रिपोर्ट को बढ़ा चढ़ाकर पेश किए जाने की बात कही। साथ ही कहा कि चीन के पास भी सोशल मीडिया को इस्तेमाल करने का अधिकार होना चाहिए।

हुआ ने विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में कहा कि पश्चिम में कुछ लोग, जैसे कि अमेरिका, चीन के उद्देश्यों और उसकी सच्चाई की आवाज को सुनना नहीं चाहते हैं।

हुआ ने कहा "वे (पश्चिमी देश) डरते हैं कि अधिक लोग सच्चाई को जानेंगे, और वे अब गलत तरीके से गलत जानकारी नहीं फैला सकेंगे। वे चाहते हैं कि वह लोगों के जनमत को भ्रमित करने पर एकाधिकार कर सकें।"

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