Jaishankar foreign visit: कतर से अमेरिका तक, 6 देशों की यात्रा पर विदेश मंत्री एस जयशंकर, दौरा क्यों है खास?
S Jaishankar 6 Nation Tour: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर रविवार से छह देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर निकल रहे हैं। 5 से 15 जुलाई तक चलने वाले इस दौरे में वह कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, अमेरिका (न्यूयॉर्क) और बेल्जियम (ब्रुसेल्स) जाएंगे।
इस दौरान उनका फोकस भारत के रणनीतिक और आर्थिक साझेदारों के साथ रिश्ते मजबूत करना, ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय समुदाय के हितों की रक्षा और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को आगे बढ़ाना रहेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह दौरा भारत की कूटनीतिक सक्रियता का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

कतर दौरा: ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार
कतर भारत के सबसे बड़े एलएनजी (LNG) आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में उसकी अहम भूमिका है। इसके अलावा कतर में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग, निवेश, व्यापार, रक्षा संबंध और भारतीय समुदाय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। पश्चिम एशिया में बदलते हालात के बीच कतर के साथ मजबूत रिश्ते भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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बहरीन दौरा: खाड़ी क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार
बहरीन भारत का पुराना और भरोसेमंद साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, फिनटेक, स्वास्थ्य और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। बहरीन में भी हजारों भारतीय काम करते हैं और दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंध हैं। जयशंकर की यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देना और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करना है।
कुवैत दौरा: तेल आपूर्ति और निवेश पर रहेगा फोकस
कुवैत भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल, स्वास्थ्य और निवेश के क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं। हाल के वर्षों में कुवैत भारतीय निवेश और कुशल पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और भारतीय समुदाय के हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
ओमान दौरा: हिंद महासागर में भारत का अहम सहयोगी
ओमान भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री और रणनीतिक साझेदार है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और बंदरगाह विकास में दोनों देशों के बीच मजबूत तालमेल है। ओमान भारत के लिए ऊर्जा का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके अलावा वहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। जयशंकर की यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर विशेष चर्चा होगी।
अमेरिका दौरा: संयुक्त राष्ट्र में भारत की वैश्विक दावेदारी
न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। यह भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए अहम कदम माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर भारत अपने पक्ष को मजबूत करेगा। इस अभियान का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के प्रभाव और समर्थन को और बढ़ाना है।
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बेल्जियम दौरा: यूरोप के साथ व्यापार और तकनीक को नई रफ्तार
बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की तीसरी मंत्री स्तरीय बैठक होगी। यहां व्यापार, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और सप्लाई चेन जैसे अहम विषयों पर चर्चा होगी। यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।












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