Explainer:भारतीय सैनिकों की वापसी पर इज्जत वाले समझौते पर कैसे पहुंचा मालदीव? मुइज्जू नहीं कर पाए India को OUT
India-Maldives News: भारत और मालदीव के बीच द्वीप देश से भारतीय सैनिकों को निकालने को लेकर सहमति बन गई है और दोनों देश एक ऐसे समाधान पर पहुंचे हैं, जहां ना किसी की हार है और ना ही किसी की जीत। लेकिन, इस समझौते के बाद कहा जा सकता है, कि राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, मालदीव से भारत को बाहर निकालने में कामयाब नहीं हो पाए हैं।
भारत और मालदीव ने मई तक विमान के संचालन और रखरखाव करने वाले सभी भारतीय सैन्य कर्मियों को हटाकर, हिंद महासागर द्वीपसमूह में तीन विमानन प्लेटफार्मों के संचालन के लिए "पारस्परिक रूप से व्यावहारिक समाधान" ढूंढ लिया है।

भारत और मालदीव में बनी सहमति
नई दिल्ली में मालदीव के अधिकारियों के साथ एक हाई लेवल बैठक के बाद दोनों देश इस सहमति पर पहुंचे हैं, कि भारतीय सैनिकों की जगह भारत के सिविल कर्मचारी अब मालदीव में तैनात होंगे। दरअसल, भारतीय सैनिकों को द्वीप देश से बाहर निकालने के लिए एक समधान तक पहुंचने के लिए दोनों देशों के बीच एक कमेटी का गठन किया गया था।
दिल्ली में दूसरी बैठक के बाद भारतीय दूतावास ने कहा है, कि दोनों पक्षों ने समधान निकाल लिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि "मालदीव के लोगों को मानवीय और चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाले भारतीय विमानन प्लेटफार्मों का लगातार संचालन होता रहेगा।"
विदेश मंत्रालय ने कहा, "बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने चल रही विकास सहयोग परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने सहित साझेदारी बढ़ाने के कदमों की पहचान करने की दिशा में द्विपक्षीय सहयोग से संबंधित व्यापक मुद्दों पर अपनी चर्चा जारी रखी।"
पिछले महीने, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से 15 मार्च तक द्वीप राष्ट्र से अपने सभी सैन्य कर्मियों को वापस बुलाने को कहा था।
लेकिन, दिल्ली में हुई बैठक में उच्च स्तरीय कोर ग्रुप की अगली बैठक, पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तारीख पर माले में आयोजित करने पर सहमति बनी है।
मालदीव के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, कि "तय समझौते के तहत भारत अगले महीने की 10 तारीख, यानि 10 मार्च 2024 तक तीन उड्डयन प्लेटफ़ॉर्मों से एक प्लेटफॉर्म से सैनिक हटा लेगा। जबकि, बाकी बचे दोनों प्लेटफॉर्मों से भी 10 मई 2024 तक भारतीय सैनिक हटा लिए जाएंगे।"
इज्जत वाला क्यों है समझौता?
दरअसल, मालदीव के राष्ट्रपति ने अपने चुनावी कैम्पेन के दौरान ही प्रचार किया था, कि अगर वो राष्ट्रपति बनते हैं, तो मालदीव से भारत को बाहर कर देंगे। लेकिन, उनकी गुप्त मंशा ये थी, कि भारतीय सैनिकों की जगह वो चीनी सैनिकों की तैनाती करना चाहते थे।
लेकिन, भारत मोहम्मद मुइज्जू के इरादों से भलि भांति वाकिफ था। लिहाजा जो समझौता हुआ है, उसके तहत भारतीय सैनिक जरूर मालदीव से वापस आ जाएंगे, लेकिन उनकी जगह भारतीय सिविल कर्मचारी ही तैनात किए जाएंगे, जो सैनिकों वाला काम करेंगे।
यानि, चीनी सैनिकों की मालदीव में तैनाती का मोहम्मद मुइज्जू का इरादा फेल हो गया है।
मालदीव के राष्ट्रपति के भारत के सामने झुकने की सबसे बड़ी वजह थी, वहां का विपक्ष का भारत समर्थक होना।
मोहम्मद मुइज्जू की पार्टी के पास संसद में बहुमत नहीं है और भारत समर्थक पार्टियों ने मोहम्मद मुइज्जू के खिलाफ महाभियोग लाने की पूरी तैयारी कर रखी है और संसद में महाभियोग लाने के लिए भी बहुमत मुइज्जू के विरोधियों के पास है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विपक्षी पार्टियां भारत से इशारे के इंतजार में हैं और अगर मोहम्मद मुइज्जू भारत के सामने अकड़ने की कोशिश करते, तो फिर उनका राष्ट्रपति बने रहना ही मुश्किल हो जाता।
इसके अलावा, पिछले महीने इलाक के अभाव में एक बच्चे की मौत के बाद मोहम्मद मुइज्जू विरोधियों के निशाने पर थे, क्योंकि उन्होने भारत से मदद लेने पर रोक लगा दी थी। जिसकी वजह भारतीय हेलीकॉप्टर, विमान और ऑफशोर पेट्रोलिंग वेसल को फौरन रीस्टार्ट करने का प्रेशर भी उनके ऊपर काफी ज्यादा था।
चीनी सैनिकों की तैनाती चाहते थे मुइज्जू
दरअसल, मोहम्मद मुइज्जू भारत की जगह पर चीनी असैनिकों की तैनाती चाहते थे और एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए मोहम्मद मुइज्जू ने सिंगापुर में काम करने वाली एक चीनी कंपनी को ठेका देने का फैसला किया था।
अगर मुइज्जू का प्लान कामयाब हो जाता, तो भारत की जगह चीन के पास ठेका होता और चीन ही हेलीकॉप्टर, विमान और ऑफशोर पेट्रोलिंग वेसल की जिम्मेदारी संभालता, लेकिन विपक्ष की चेतावनी और अपनी कुर्सी पर मंडरा रहे खतरे से मोहम्मद मुइज्जू डर गये थे और उन्होंने अपनी कुर्सी बचाने के लिए भारत के सामने घुटने टेकने का ही विकल्प चुना है।












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