पहचान बदली तो खैर नहीं! पूजा खेडकर केस से लिया सबक, UPSC ने परीक्षा प्रक्रिया में किया बड़ा बदलाव

UPSC की तैयारी करने वाले लाखों उम्मीदवारों के लिए इस बार की परीक्षा प्रक्रिया कई मायनों में अलग रही। संघ लोक सेवा आयोग ने पहली बार आवेदन की शुरुआती जांच में ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर फर्जी और नियमों के खिलाफ किए गए आवेदनों पर सख्त कार्रवाई की है। अब तक कई गड़बड़ियां परीक्षा के बाद या इंटरव्यू के दौरान पकड़ में आती थीं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

नई तकनीक की मदद से आयोग ने परीक्षा शुरू होने से पहले ही करीब 600 संदिग्ध आवेदन रद्द कर दिए। इससे उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जो पूरी ईमानदारी से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हैं। आयोग का कहना है कि इस नई व्यवस्था का मकसद केवल धोखाधड़ी रोकना नहीं, बल्कि सभी उम्मीदवारों को बराबरी का और पारदर्शी मौका देना भी है। यही वजह है कि 2026 की परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा दी गई है।

UPSC

आवेदन भरते ही शुरू हुई AI से जांच

यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार के मुताबिक इस बार आवेदन मिलने के बाद ही 'डी-डुप्लीकेशन' प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि हर उम्मीदवार की पहचान सही हो और कोई भी व्यक्ति गलत जानकारी या एक से ज्यादा आवेदन देकर सिस्टम का फायदा न उठा सके।

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AI सिस्टम ने ऐसे आवेदनों को भी चिन्हित किया जिनमें उम्मीदवार उम्र सीमा पूरी होने या तय प्रयास खत्म होने के बावजूद अलग पहचान के साथ आवेदन करने की कोशिश कर रहे थे। आयोग ने साफ किया कि पूरी जांच सुरक्षित तरीके से की गई और किसी भी उम्मीदवार की निजी जानकारी से समझौता नहीं किया गया।

अब इंटरव्यू तक नहीं पहुंच पाएंगे फर्जी उम्मीदवार

पहले कई मामलों में गड़बड़ी तब सामने आती थी जब उम्मीदवार प्रीलिम्स और मेन्स पास करने के बाद इंटरव्यू तक पहुंच जाते थे। दस्तावेजों की जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन सामने आने पर कार्रवाई होती थी।

लेकिन अब AI आधारित सिस्टम आवेदन के शुरुआती चरण में ही ऐसे मामलों की पहचान कर लेता है। इससे फर्जी उम्मीदवार आगे की किसी भी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। खास बात यह है कि यह सॉफ्टवेयर यूपीएससी ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से खुद तैयार किया है।

पूजा खेडकर मामले के बाद बदली रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग ने यह बदलाव 2024 में सामने आए पूजा खेडकर विवाद के बाद किया। आरोप था कि उन्होंने प्रयासों और आयु सीमा के नियमों से बचने के लिए कथित तौर पर अपनी और अपने माता-पिता की पहचान में बदलाव कर परीक्षा दी थी। मामला सामने आने के बाद उनका चयन रद्द कर दिया गया था।

इसी घटना के बाद यूपीएससी ने भविष्य में ऐसी किसी भी संभावना को खत्म करने का फैसला लिया। इसलिए इस बार आधार आधारित सत्यापन, लाइव फोटो, फेस मैचिंग और AI आधारित डी-डुप्लीकेशन जैसी नई तकनीकों को परीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया।

15 साल के रिकॉर्ड से हुआ मिलान

इस बार आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की जानकारी कई स्तरों पर जांची गई। AI ने नाम, माता-पिता का नाम, जन्म तिथि और फोटो का मिलान आयोग के पिछले 15 वर्षों के रिकॉर्ड से किया। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि कहीं किसी ने अपनी पहचान बदलकर दोबारा आवेदन तो नहीं किया है या फिर उम्र और प्रयासों की सीमा छिपाने की कोशिश तो नहीं की। जांच पूरी होने के बाद लगभग 600 आवेदन सीधे रद्द कर दिए गए।

आधार वेरिफिकेशन का भी मिला फायदा

इस साल 24 मई को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए करीब 8.18 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इनमें से लगभग 5.49 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। आयोग के अनुसार करीब 94 प्रतिशत उम्मीदवारों ने नए पोर्टल के जरिए आधार सत्यापन कराया। इससे उनकी पहचान की पुष्टि आसान हो गई। जिन उम्मीदवारों ने आधार वेरिफिकेशन नहीं कराया, उनके मामलों में AI सिस्टम ने उपलब्ध जानकारियों का अलग से विश्लेषण किया।

कैटेगरी बदलने वाले आवेदनों पर भी नजर

यूपीएससी ने इस बार सामाजिक श्रेणी बदलकर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की भी अलग से जांच की। AI सिस्टम ने ऐसे 43,497 मामलों को चिन्हित किया जिनमें पिछले प्रयास की तुलना में उम्मीदवार की कैटेगरी बदली हुई थी।

इसके बाद सभी संबंधित उम्मीदवारों से ईमेल के जरिए जरूरी दस्तावेज मांगे गए। जांच के दौरान कई मामलों में पता चला कि पहले आवेदन के समय जरूरी प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था, इसलिए सामान्य वर्ग से आवेदन किया गया था। हालांकि जांच पूरी होने के बाद 133 आवेदन ऐसे पाए गए जो नियमों के अनुसार मान्य नहीं थे और उन्हें भी रद्द कर दिया गया।

इस बार क्यों कम हुए आवेदन?

2025 की तुलना में इस बार यूपीएससी में आवेदन करने वालों की संख्या कम रही। पिछले साल जहां करीब 9.5 लाख आवेदन आए थे, वहीं इस बार यह संख्या घटकर लगभग 8.18 लाख रह गई। आयोग के अधिकारियों का मानना है कि सख्त सत्यापन प्रक्रिया और नई तकनीक के इस्तेमाल की वजह से फर्जी या नियमों के खिलाफ आवेदन करने वाले लोगों की संख्या कम हुई, जिससे कुल आवेदनों में भी गिरावट देखने को मिली।

यूपीएससी में कितने प्रयास मिलते हैं?

यूपीएससी के नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के उम्मीदवार 32 वर्ष की आयु तक अधिकतम 6 प्रयास कर सकते हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों को 35 वर्ष की आयु तक 9 प्रयास की अनुमति होती है। वहीं अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के उम्मीदवार 37 वर्ष की आयु तक परीक्षा दे सकते हैं। इन दोनों वर्गों के लिए प्रयासों की संख्या पर कोई सीमा तय नहीं की गई है।

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