कौन हैं वो महिला मंत्री? 3 महीने का बेटा गोद में लेकर मीटिंग में पहुंची, कभी दूध पिलाया-कभी स्पीच दी

Minister Romina Pourmokhtari News: क्या आपने कभी किसी मंत्री को अंतरराष्ट्रीय बैठक में तीन महीने के बच्चे को गोद में लेकर भाषण देते देखा है? शायद नहीं। लेकिन स्वीडन की 30 वर्षीय जलवायु और पर्यावरण मंत्री रोमिना पोरमोख्तारी ने यही कर दिखाया। वे यूरोपीय संघ (EU) के जलवायु मंत्रियों की अहम बैठक में अपने तीन महीने के बेटे एडम को गोद में लेकर पहुंचीं।

बैठक के दौरान कभी वह बच्चे को शांत कराती दिखीं, कभी उसे दूध पिलाती नजर आईं और इसी बीच उन्होंने जलवायु नीति पर अपना संबोधन भी दिया। लक्जमबर्ग से सामने आए इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का ध्यान खींचा। EU अधिकारियों के मुताबिक, किसी मंत्रिस्तरीय बैठक में पहली बार किसी शिशु की मौजूदगी दर्ज हुई। यह सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि कामकाजी माताओं, लैंगिक समानता और परिवार के प्रति जिम्मेदारी को लेकर दुनिया के सामने स्वीडन के मॉडल की एक मजबूत मिसाल बन गया। आइए जानते हैं कि कौन हैं ये मंत्री? क्या है इसकी कहानी?

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'मां बनना करियर का अंत नहीं'

दरअसल, 25 जून 2026 को लक्जमबर्ग में EU पर्यावरण और जलवायु मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। रोमिना पोरमोख्तारी हाल ही में पैरेंटल लीव से वापस लौटी थीं। उन्होंने जानबूझकर बेटे एडम को साथ लिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि रोमिना बेटे को गोद में लिए बैठी हैं। जब बच्चा रोता है तो वे उसे थपथपाकर शांत करती हैं, लेकिन मीटिंग के एजेंडे पर अपनी बात भी पूरी गंभीरता से रखती हैं।

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बैठक से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मैंने जानबूझकर यह किया ताकि, यह संदेश दिया जा सके कि महिलाओं को करियर और परिवार में से एक चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। मां बनना करियर का अंत नहीं है। बैठक के बाद रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने जोर दिया कि यूरोप की परिवार-समर्थक नीतियां, सहयोगी साथी और कार्यस्थल का समर्थन इसे संभव बनाते हैं।

Who Is Romina Pourmokhtari: कौन हैं रोमिना पोरमोख्तारी?

रोमिना पोरमोख्तारी का जन्म 12 नवंबर 1995 को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से ईरान का है। उनके पिता इब्राहिम पोरमोख्तारी राजनीतिक शरणार्थी के रूप में ईरान छोड़कर स्वीडन आए थे। घर का माहौल शुरू से ही राजनीतिक चर्चाओं से भरा रहता था, जिसका असर रोमिना की सोच और करियर पर भी पड़ा।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर

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रोमिना ने स्टॉकहोम क्षेत्र में अपनी पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2013 में उन्होंने लिबरल यूथ ऑर्गनाइजेशन से जुड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उनकी नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें 2019 से 2022 तक लिबरल यूथ फेडरेशन (LUF) का अध्यक्ष चुना गया।

26 साल की उम्र में बनीं सबसे युवा मंत्री

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अक्टूबर 2022 में स्वीडन में नई सरकार बनने पर रोमिना को जलवायु और पर्यावरण मंत्री बनाया गया। उस समय उनकी उम्र महज 26 वर्ष थी, जिससे वह स्वीडन के इतिहास की सबसे कम उम्र की मंत्रियों में शामिल हो गईं।

जून 2025 में प्रेमी से शादी, 2026 में बच्चे को दिया जन्म

रोमिना ने जून 2025 में फिजियोथेरेपिस्ट फ्रेडरिक (Fredrik) से शादी की। इसके बाद मार्च 2026 में उन्होंने बेटे एडम को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद उन्होंने पैरेंटल लीव ली और जून 2026 में दोबारा सरकारी कामकाज संभालने लौट आईं। इस दौरान उनके पति भी पैरेंटल लीव पर हैं और बच्चे की देखभाल में बराबर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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स्वीडन की पैरेंटल लीव दुनिया के लिए मिसाल

स्वीडन को वर्क-लाइफ बैलेंस और लैंगिक समानता के मामले में दुनिया के सबसे प्रगतिशील देशों में माना जाता है। प्रत्येक बच्चे पर 480 दिन (करीब 16 महीने) की सवेतन पैरेंटल लीव मिलती है। 90 दिन केवल मां और 90 दिन केवल पिता के लिए आरक्षित होते हैं। इन्हें दूसरे अभिभावक को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। बाकी छुट्टियां माता-पिता आपसी सहमति से बांट सकते हैं। निर्धारित सीमा तक माता-पिता को करीब 80% वेतन भी मिलता है। पिता की भागीदारी बढ़ाने के लिए 'डैडी मंथ्स' जैसी व्यवस्था लागू की गई है।

यह नीति 1974 से लागू है और समय-समय पर इसमें बदलाव किए गए हैं। इसके कारण स्वीडन में महिलाओं की कार्यस्थल पर भागीदारी बढ़ी है, लैंगिक समानता मजबूत हुई है और बच्चों की देखभाल में दोनों अभिभावकों की भूमिका संतुलित हुई है।

रोमिना ने क्या कहा?

रोमिना पोरमोख्तारी का मानना है कि केवल सरकारी नीतियां ही काफी नहीं होतीं। उन्होंने कहा, "अगर आपका जीवनसाथी पुरानी सोच वाला न हो और जिम्मेदारियां बराबर निभाए, तभी ऐसी नीतियां वास्तव में सफल होती हैं।" यही वजह है कि उनके पति भी पैरेंटल लीव लेकर बेटे की देखभाल कर रहे हैं, जबकि रोमिना मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

रोमिना पहली नहीं हैं, बच्चों को दफ्तर ले जाने के कई केस

  • 2010: इटली की सांसद लिसिया रोंजुली ने 6 हफ्ते की बेटी को गोद में लेकर यूरोपीय संसद में भाग लिया।
  • 2018: न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने 3 महीने की बेटी नेवे को लेकर UNGA में भाग लिया। वे दुनिया की पहली निर्वाचित महिला PM बनीं जिन्होंने ऐसा किया।
  • 2017: ऑस्ट्रेलिया की सीनेटर लारिसा वॉटर्स ने संसद में अपनी 2 महीने की बेटी को स्तनपान कराते हुए भाषण दिया।

रोमिना पोरमोख्तारी का यह कदम दिखाता है कि सही नीतियां, सहयोगी परिवार और आधुनिक सोच के साथ महिलाएं बिना compromise किए आगे बढ़ सकती हैं। तीन महीने के बच्चे को गोद में लिए स्पीच देना केवल एक वीडियो नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाला क्षण है।

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