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Mass Extinction: महाविनाश के छठे दौर की ओर बढ़ रही पृथ्वी, इंसानी प्रजाति पर मंडराया खतरा

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नई दिल्ली: हाल ही में पृथ्वी अचानक बहुत ही तेजी से घूमने लगी थी। इतना ही नहीं बढ़ते तापमान और हो रहे जलवायु परिवर्तन के बाद पृथ्वी को लेकर वैज्ञानिक वक्त-वक्त पर खतरे के संकेत भी देते रहते हैं। इस बीच अब विशेषज्ञों ने दावा किया है कि पृथ्वी को महाविनाश का जल्दी ही सामना करना पड़ सकता है। पृथ्वी छठे सामूहिक विलोपन (Sixth mass extinction) यानी एक और महाविनाश की ओर बढ़ रही है।

पिछले बार डायनासोर गायब, इस बार खतरे में इंसान

पिछले बार डायनासोर गायब, इस बार खतरे में इंसान

साढ़े चार अरब साल पुरानी धरती ने अपने पिछले 54 करोड़ सालों के दौरान अब तक पांच बड़े पैमाने पर विलुप्त होने की घटनाओं का सामना किया है। यानी की धरती पांच महाविनाशों को झेल चुकी है। अब माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन ग्रह को अगले विनाशकारी स्थिति की ओर ले जा रहा है। बताया जाता है कि इससे पहले 5वीं सामूहिक विलुप्ति की घटना में कई दूसरे जीवों के साथ धरती से डायनासोर गायब हो गए थे। वहीं इस बार अगर ऐसा होता है तो इस विलुप्त खतरे के शुरुआत में भी इंसान गायब हो सकता हैं।

वैज्ञानिकों ने किया कयामत के दिन की भविष्यवाणी

वैज्ञानिकों ने किया कयामत के दिन की भविष्यवाणी

वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अब कयामत के दिन की भविष्यवाणी के रूप में पृथ्वी 'छठे सामूहिक विलुप्त होने की घटना' की ओर बढ़ रही है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है ग्रह से टकराने वाली अगली सामूहिक विलुप्ति (महाविनाश) की घटना जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित होगी। हालांकि अब पृथ्वी को ऐसी स्थिति में आने की जरूरत होगी, जहां जलवायु परिवर्तन ग्रह को तेजी से नष्ट कर रहा है, और अब उसे बदला जा सकता है।

प्राग की चार्ल्स यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ने जानिए क्या कहा?

प्राग की चार्ल्स यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ने जानिए क्या कहा?

प्राग की चार्ल्स यूनिवर्सिटी में इकोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डेविड स्टॉर्च ने लाइव साइंस को बताया कि "विलुप्त होने की वर्तमान दर विलुप्त होने की सामान्य दर से अधिक परिमाण के लगभग दो आदेश हैं। उन्होंने कहा कि इन अंतिम सामूहिक विलुप्त होने के दौरान पाया गया जलवायु परिवर्तन विलुप्त होने का एकमात्र कारण नहीं हो सकता है, लेकिन विलुप्त होने की दर उस समय हुए अन्य वैश्विक परिवर्तनों का परिणाम हो सकती है।"

महानिवाश के कुछ कदम दूर पृथ्वी

महानिवाश के कुछ कदम दूर पृथ्वी

वहीं जापान में तोहोकू विश्वविद्यालय में पृथ्वी विज्ञान विभाग में प्रोफेसर कुनियो काहो ने समझाया कि जिस तरह से ग्रह गर्म हो रहा है, यह पृथ्वी को तेजी से नष्ट करने के लिए आवश्यक तापमान से केवल कुछ डिग्री दूर है, इसे ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा: "9C या 16.2F के औसत वैश्विक तापमान में वृद्धि, ग्लोबल वार्मिंग के साथ बड़े पैमाने पर विलुप्त होने के लिए आवश्यक है।"

ग्रहों के गर्म होने की वर्तमान दर से दोगुने से अधिक

ग्रहों के गर्म होने की वर्तमान दर से दोगुने से अधिक

इधर, यूके सरकार की वेबसाइट के अनुसार 1880 के बाद से संयुक्त भूमि और समुद्र के तापमान में 0.14F या 0.08C प्रति दशक की औसत दर से वृद्धि हुई है। यानी कि साल 1880 और 2022 के बीच लगभग दो डिग्री। हालांकि, 1981 के बाद से वृद्धि की औसत दर 0.18C या 0.32F है, जो कि ग्रहों के गर्म होने की वर्तमान दर से दोगुने से अधिक है। वहीं जापान के जलवायु वैज्ञानिकों ने अपनी स्टडी से यह भी निष्कर्ष निकला है कि अगर मौजूदा वक्त में तबाही आती है तो वह पिछले पांच घटनाओं की तरह नहीं होगी और साथ ही बताया गया है कि कम से कम कई शताब्दियों तक फिर ऐसा नहीं होगा।

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English summary
Experts have claimed Earth will Face sixth mass extinction
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