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हिंदुस्तान को नहीं बचा पाएगी S-400 मिसाइल! पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के जनक ने दी तबाही की चेतावनी

India Nuclear Programe: पाकिस्तान ने भारत को लेकर अपनी परमाणु नीति घोषित कर दी है और ऐसे में भारत पर भी दबाव बन रहा है, कि वो पाकिस्तान को लेकर अपनी परमाणु नीति घोषित करे और अपने पुराने 'पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं' की नीति को बदले।

भारत पर अब दबाव इस बात को लेकर भी बन रही है, कि वो अपनी आदर्शवादी रणनीति को बदलते हुए अपने परमाणु हथियार भंडार में छोटे-छोटे परमाणु हथियारों को शामिल करे, ताकि परमाणु युद्ध की हालत में दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने लिए उसे एक सेकंड भी सोचना ना पड़े।

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'लिटिल बॉय' परमाणु बम कैसा था?

अमेरिका ने जापान के ऊपर 6 अगस्त 1945 को जो सबसे पहला परमाणु बम गिराया था, उसका नाम 'लिटिल बॉय' था और उसे मेजर पॉल ने एनोला गे नाम के यूएसएएफ बी-29 बॉम्बर से हिरोशिमा पर गिराया था।

'लिटिल बॉय' का वजन 9,700 किलोग्राम था और इसकी मारक क्षमता 20 किलोटन से कम थी। लेकिन, इसके बाद से परमाणु बम बनाने में दुनिया तरक्की करती चली गई और रूस ने दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु बम तैयार कर लिया।

परमाणु हथियारों की प्रमुख आवश्यकताओं में से एक डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म बनी हुई है। ICBM (इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) और MRBM (मध्यम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल) दुर्जेय और विश्वसनीय डिलीवरी प्लेटफॉर्म हैं, और विभिन्न देशों में इनके अलग-अलग नाम हैं। इन दोनों तरह के मिसाइलों से परमाणु बम किसी दूसरे देश पर फेंके जा सकते हैं।

भारत ने पिछले महीने जिस अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण किया है, वो MRV टेक्नोलॉजी से लैस है और भारत अपनी इस मिसाइल से अपने दुश्मनों पर परमाणु बम गिरा सकता है।

लेकिन दूसरी तरफ, पाकिस्तान लगातार परमाणु हथियारों का उत्पादन कर रहा है और वर्तमान में उसके पास, भारत की तुलना में ज्यादा परमाणु हथियार हैं, जिनकी प्रक्षेपण क्षमताएं चीन से काफी मेल खाती हैं। अन्य परमाणु देशों की तुलना में पाक परमाणु कार्यक्रम का एक अलग आयाम है, क्योंकि पाक परमाणु हथियारों का केवल एक ही लक्ष्य है, वो वो है भारत।

परमाणु हथियारों को लेकर नया विवाद क्या है?

भारत ने कलपक्कम के पास एक प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) बनाने के लिए कदम उठाया है और एक बार स्टार्ट होने के बाद यहां से प्लूटोनियम का उत्पादन शुरू हो जाएगा। हालांकि, भारत का ये प्रोजेक्ट कम से कम 20 साल पीछए है, लेकिन हालिया समय में जो संकेत मिले हैं, उससे पता चलता है, कि भारत जल्द ही इस प्रोजेक्ट में कामयाबी हासिल करने वाला है।

भारत ने हाल ही में MIRV टेक्नोलॉजी से लैस AGNI-V बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च कर अपनी क्षमता का परिचय दिया है और MIRV टेक्नोलॉजी क्षमता वाले दुनिया के पांच देशों में शामिल हो गया है।

वहीं, पाकिस्तान चगाई (परमाणु) परीक्षण को यौम-ए-तकबीर (महानता का दिन) के रूप में मनाता है। दुनिया भर में, केवल एक ही नाम को 'पाक परमाणु बम के जनक' के रूप में जाना जाता है और वो नाम है, डॉ अब्दुल कादिर खान।

लेकिन, एक दूसरी हकीकत ये है, कि पाकिस्तान के परमाणु हम को परमाणु हथियार में बदलने वाले शख्स का नाम है, लेफ्टिनेंट जनरल किदवई।

लेफ्टिनेंट जनरल किदवई के ही नेतृत्व में ही पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम फला-फूला और अब भी फल-फूल रहा है। पाकिस्तान परमाणु कार्यक्रम में उनका योगदान एसएसएम (सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों) की एक सीरिज बनाना है, जो अंडमान सहित भारत को प्रभावी ढंग से कवर करते हुए कुछ सौ से कुछ हजार किलोमीटर तक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं।

वर्तमान में, लेफ्टिनेंट जनरल किदवई पाक नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) के सलाहकार हैं।

पाकिस्तान के जनरल की धमकी क्या है?

-लेफ्टिनेंट जनरल किदवई ने हाल ही में इस्लामाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज में दिए गये एक संबोधन में धमकी दी है, कि पाकिस्तान का परमाणु हथियार कार्यक्रम भारत केंद्रित है।

-इसके अलावा, उन्होंने एक नया शब्द गढ़ा:- पाकिस्तान के प्रति भारत के शत्रुतापूर्ण नजरिए के कारण पाकिस्तान, अब पूर्ण स्पेक्ट्रम निवारक (FSD) विकसित कर रहा है।

-उन्होंने धमकी देते हुए कहा, कि पाकिस्तानी SSM (सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें) अपने सबसे पश्चिमी लॉन्च बेस से भारत में कहीं भी सभी ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम हैं।

-उन्होंने स्पष्ट रूप से भारत को चुनौती देते हुए भारत की 'बड़े पैमाने पर प्रतिशोध' नीति की आलोचना करते हुए कहा, कि पाकिस्तान न केवल भारत के परमाणु हमले से बचेगा, बल्कि तथाकथित बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) S-400 मिसाइल होने के बावजूद महत्वपूर्ण भारतीय लक्ष्यों को मारकर उचित तरीके से जवाब भी देगा।

-उन्होंने आगे कहा, कि पाकिस्तानी SSM कुछ मीटर के भीतर लक्ष्य को मार सकते हैं, जिससे भारत की मिसाइल और रक्षा प्रणालियों को आसानी से निष्क्रिय किया जा सकता है।

-इसके अलावा, उन्होंने एक और अहम बात ये कही, कि पाकिस्तान न केवल काउंटर वैल्यू, बल्कि काउंटर सिटी की लक्ष्यीकरण रणनीति भी अपनाएगा। जिससे साबित होता है, कि भारत से दुश्मनी में पगलाया हुआ पाकिस्तान, लगातार विनाश के रास्ते पर बढ़ता जा रहा है।

-उन्होंने आगे पुष्टि की, कि पाकिस्तान राजनीतिक और आर्थिक रूप से उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, इसके बावजूद परमाणु कार्यक्रम और इसके आगे के संवर्द्धन में बाधा नहीं डाली जाएगी।

भारत की प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए?

पाकिस्तान की तरफ से आने वाली ऐसी प्रतिक्रियाओं को लेकर भारत की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया जाता है। लेकिन, लेफ्टिनेंट जनरल किदवई की इन धमकियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। और उनकी धमकियों से दो महत्वपूर्ण बातें पता चलती हैं।

-- पाकिस्तान विश्वसनीय न्यूनतम निवारण (CMD) से पूर्ण स्पेक्ट्रम निवारण (FSD) पर स्विच कर रहा है।

-- काउंटर सिटी टारगेटिंग स्ट्रैटेजी के विकल्प का प्रयोग करना। इसका मतलब यह है, कि पाक परमाणु हथियार भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों के साथ-साथ जनसंख्या केंद्रों को भी निशाना बनाएंगे। यानि, पाकिस्तान भरत के आम नागरिकों पर भी परमाणु बम गिराने से नहीं हिचकेगा।

हालांकि, मोदी सरकार ने अक्सर दावा किया है, कि 'भारत के परमाणु हथियार सिर्फ दिखाने के लिए नहीं हैं,' बावजूद हम स्पष्ट रूप से यह कहने में नाकाम रहे हैं, कि चीन और पाकिस्तान के खिलाफ 'नो फर्स्ट यूज़' (एनएफयू) नीति को आवश्यकता-आधारित फर्स्ट यूज़ (एनबीएफयू) में बदल दिया गया है।

पाकिस्तान की धमकियों को नजरअंदाज नहीं करते हुए, शायद अब समय आ गया है, कि सैन्य नेतृत्व आदर्शवादी, पहले इस्तेमाल न करने की नीति को उचित तरीके से दफन करने के लिए सरकार पर दबाव डाले और सरकार को समझाए, कि भारत अपनी नीति को साफ करे, कि हम अपनी जरूरत के हिसाब से परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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