हिन्दू ही नहीं मुस्लिम भी सेफ नहीं, किसी जहन्नुम से कम नहीं है पाकिस्तान में रहना
ऑस्ट्रेलिया (पर्थ)। पाकिस्तान से हमें अक्सर ऐसी खबरे सुनने को मिलती है, जिसमें किसी हिन्दू युवक को धर्म की आड़ में प्रताड़ित या किसी हिन्दू युवती के साथ जबरदस्ती कर उसका जबरन धर्म परिवर्तन करवा दिया गया होता है। पाकिस्तान के आंकड़े भी इस बात को साबित करते हैं कि आजादी के बाद से वहां हिन्दू आबादी काफी कम हुई है। इसका कारण यह है कि या तो लोगों ने वहां से पलायन कर लिया है या फिर वे मार दिए गए। लेकिन आज हम जो मामला बताने जा रहे हैं वो किसी हिंन्दू से नहीं बल्कि मुस्लिम कपल से जुड़ा है। बता दें कि पाकिस्तान के कॉमेडियन और साइकोलॉजिस्ट समी शाह को कट्टरपंथियों की प्रताड़ना के चलते 2012 में पत्नी के साथ देश छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म छोड़ दिया और किसी भी धर्म को ना अपनाने की कसम खा ली। सुनिए पाकिस्तान में प्रताड़ना की कहानी उन्हीं की जुबानी..

ईशनिंदा की सजा मौत..
भारत में जो लोग असहिष्णुता का राग अलापते हैं उन्हे समी की बात सुनकर हैरानी होगी। समी के मुताबिक पाकिस्तान में ईशनिंदा के छोटे-छोटे से मामलों में भी भीड़ लोगों को बेदर्दी से मौत के घाट उतार देती। समी ने बताया कि पाकिस्तान में कट्टरपंथ अपने चरम पर है। हालांकि इन सब से आजिज होकर वह पाकिस्तान छोड़कर पत्नी इश्मा अल्वी के साथ 2012 में 'स्किल्ड माइग्रेशन वीजा' पर आस्ट्रेलिया की पर्थ सिटी में सेटेल हो गए थे।
चरम पर है कट्टरपंथ..
ऑस्ट्रेलियन मीडिया को दिए इंटरव्यू में समी ने बताया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि आप हिंन्दू हैं तभी आपको खतरा है बल्कि कट्टरपंथी उन लोगों को भी सजा देने से नहीं चूकते, जो किसी धर्म के बंधन में बंधना नहीं चाहते। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में रुढ़िवादिता अपने चरम पर है और ऐसे मर्दो की संख्या ज्यादा है, जो महिलाओं को आगे बढ़ते नहीं देख सकते, लेकिन अल्वी (समी की पत्नी ) को लेकर मेरी सोच बिल्कुल अलग थी। समी आगे कहते हैं कि हम दोनों ही एक आजाद जिंदगी जीना चाहते थे, जो पाकिस्तान में मुमकिन नहीं था। इसी के चलते उन्होंने इस्लाम धर्म छोड़ दिया और पाकिस्तान में बस गए। समी अब कहते हैं कि वह किसी धर्म में विश्वास न करते हुए सिर्फ इंसानियत पर भरोसा करते हैं।












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