समंदर में चीन को पीछे धकेलने का अभियान शुरू, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने भेजे वारशिप्स, युद्ध की संभावना

साउथ चायना सी में चीन को पीछा धकेलने के लिए फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने अपने अपने वारशिप्स भेज दिए हैं। माना जा रहा है कि साउथ चायना सी में जंग के हालात बन सकते हैं।

कैनबरा/नई दिल्ली: चीन को समंदर में पीछे धकेलने का अभियान शुरू हो चुका है और क्वाड के साथ यूरोपीय देश भी आ गये हैं। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन भी चीन के खिलाफ एकसाथ आ गये हैं और इसी के साथ तय हो गया है कि आने वाले वक्त में चीन की मुसीबत बढ़ने वाली है और संभव है कि बहुत जल्द समंदर में लड़ाई भी शुरू हो जाए। चीन के खिलाफ ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अपने वारशिप्स अमेरिका को मदद करने के लिए साउथ चायना सी में भेज दिए हैं।

समंदर में लड़ाई की आहट

समंदर में लड़ाई की आहट

समूचे साउथ चायना सी पर चीन अपना अधिकार समझता है जबकि अमेरिका समेत विश्व के कई बड़े देश और साउथ चायना सी में आने वाले छोटे छोटे देश अंतर्राष्ट्रीय समुन्द्री कानून के तहत साउथ चायना सी में स्वतंत्र समुन्द्री कानून लागू करने के पक्ष में हैं, लिहाजा अब साउथ चायना सी में लड़ाई के हालात बनने लगे हैं। ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट न्यूज.कॉम.एयू में जेमी सीडल ने एक आर्टिकिल के जरिए कहा है कि 'राजनीतिक प्रयासों के साथ साथ लड़ाई की सुगबुगाहट, अंतर्राष्ट्रीय फोरम एक साथ आ चुका है और चीन की आक्रामकता के खिलाफ यूरोपीय देशों ने प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है'

चीन को चुनौती

चीन को चुनौती

जापान इंटरनेशन सिक्योरिटी कॉमेंटेटर हिरोकी अकीता ने कहा है कि 'इंडो-पैसिफिक रीजन के लिए ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के वारशिप्स रवाना हो चुके हैं, जिसकी वजह से इंडो-पैसिफिक में चीन की तरफ से प्रतिक्रिया दी जा सकती है, और नये टेंशन की शुरूआत हो सकती है लेकिन, इसका एक पॉजिटिव पक्ष ये है कि ताइवर स्ट्रेट और साउथ चायना सी में चीन की विस्तारवादी नीति को इससे नुकसान होगा'। उन्होंने कहा है कि 'इस लड़ाई में यूरोपीय देशों के जुड़ने का मतलब ये है कि चीन के मिलिट्री एक्शन के खिलाफ बाड़ेबंदी शुरू हो चुकी है'। साउथ चायना सी में फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के वारशिप्स उस वक्त भेजे गये हैं, जब चीन की नेवी विश्व की सबसे बड़ी नेवी बन चुकी है।

चीन का खतरनाक रवैया

चीन का खतरनाक रवैया

इसी हफ्ते चीन नेशनल असेंबली में चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के चेयरमैन शी जिनपिंग ने कहा है कि उनका मकसद ऐसी सेना को तैयार करना है जो दुनिया की किसी भी ताकत को हरा दे। उन्होंने नशनल एसेंबली को संबोधित करते हुए कहा कि 'हमारे देश की वर्तमान सिक्योरिटी कंडीशन काफी हद तक अस्थिर और अनिश्चित है'। वहीं, चीन के रक्षामंत्री ने ऐलान किया है कि चीन एक हाईरिस्क फेज में पहुंच चुका है। यानि, इसके साथ ही ये तय हो गया है कि चीन आने वाले वक्त में काफी तेजी से अपनी शक्ति बढ़ाएगा। वहीं, इस बार चीन ने डिफेंस बजट में भी काफी ज्यादा इजाफा किया है। वहीं, अमेरिकन नेवी ने दावा किया है कि चीन की नेवी विश्व की सबसे बड़ी नेवी बन चुकी है, जिसके पास 360 पानी के लड़ाकू जहाज है।

सबसे खतरनाक सेना बनाने की तरफ चीन

सबसे खतरनाक सेना बनाने की तरफ चीन

चीन की पिपल्स रिपब्लिक ऑफ चायना ना सिर्फ विश्व की सबसे बड़ी जलशक्ति बन चुका है बल्कि वो लगातार न्यूक्लियर पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स, लड़ाकू जहाज, न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल्स, लार्ज कोस्ट गार्ड कटर्स और पोलर आइस ब्रेकर का निर्माण कर रहा है। अमेरिकी रक्षामंत्रालय ने चीन की इस मिलिट्री शक्ति और प्लानिंग को लेकर दुनिया को चेतावनी जारी कर दी है। पिछले साल दिसंबर में नाटो ने चीन को भी भी दुनिया के लिए खतरा बताया था।

चीन के खिलाफ विश्व की शक्तियां

चीन के खिलाफ विश्व की शक्तियां

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ साथ हिंद महासागर में भारत की मदद के लिए फ्रांस भारत के साथ युद्धाभ्यास कर रहा है। वहीं, साउथ चायना सी में चीनी एग्रेशन को काउंटर करने के लिए ब्रिटेन ने अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर क्वीन एलिजाबेथ को मल्टीलेटरल टास्क फोर्स के साथ पिछले साल साउथ चायना सी में डिप्लॉय कर चुका है। वहीं, अमेरिका ने साउथ चायना सी के जरिए सैन्य जहाज जापान तक भेजने के लिए दुनिया के सामने जर्मनी की तारीफ की है। वहीं, अमेरिका ने साउथ चायना सी में जर्मनी द्वारा भेज गये वारशिप्स की तारीफ करते हुए उसके फैसले का स्वागत किया है।

बेहद खतरनाक है यूरोपीयन नेवी

बेहद खतरनाक है यूरोपीयन नेवी

यूरोपीय देशों का चीन के खिलाफ आना चीन के लिए बहुत बड़ा झटका है। ऐसा इसलिए क्योंकि फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर और वारशिप्स बेहद खतरना हैं। यूरोपीय देशों के वारक्राफ्ट्स अत्याधुनिक, लड़ाई करने में बेहद घातक और अमेरिकन नैवी उसे आसानी से ऑपरेट कर सकें, इसे ध्यान में रखकर बनाया गया है। वहीं, यूरोपीयन नेवी के जवान साल भर दुनिया के अलग अलग हिस्सों में युद्धाभ्यास करते रहते हैं, लिहाजा उनके पास लड़ाई का अनुभव भी काफी ज्यादा है। जिसकी वजह से माना जा रहा है चीन को साउथ चायना सी में पीछे धकेलनें में ये शक्तियां कामयाब हो जाएंगी।

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