नीदरलैंड में 'इस्लाम विरोधी' नेता गीर्ट वाइल्डर्स का PM बनना लगभग तय, उनकी जीत से यूरोप में क्यों मचा हाहाकार?
धुर दक्षिणपंथी और अपने इस्लाम विरोधी विचारों के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय गीर्ट विल्डर्स नीदरलैंड के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं। एग्जिट पोल्स के मुताबिक, डच संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी फॉर फ्रीडम (पीवीवी) पार्टी को सबसे अधिक सीटें मिलने का दावा किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि नीदरलैंड चुनाव के इन नतीजों का यूरोप पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। गीर्ट विल्डर्स इस्लाम को लेकर अपनी तीखी आलोचना और कठोर आप्रवासन नीतियों के कारण कई बार सुर्खियों में बने रहते हैं।

ऐसा कहा जा रहा है कि अगर गीर्ट विल्डर्स नीदरलैंड के पीएम बन जाते हैं तो वे देश के अगले बोरिस जॉनसन साबित होंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि अब नीदरलैंड में यूरोपीय संघ से निकलने की 'नेक्जिट' प्रक्रिया शुरू होगी।
ब्रिटेन ने 2016 में ब्रेक्जिट के लिए मतदान किया था। यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने की प्रक्रिया को 'ब्रेक्जिट' कहा जाता है।
सिर्फ यूरोपीय संघ से बाहर निकलना ही नहीं, वाइल्डर्स के पीएम बनने के बाद अन्य भी कई चीजें हैं जिसे सोच कर यूरोप के हाथ-पांव फूल गए हैं। दरअसल जलवायु एक्शन से लेकर यूक्रेन के लिए हथियार नीतियों तक में दक्षिणपंथी नेता गीर्ट वाइल्डर्स परंपरागत रात से उलट सोच रखते हैं।
हालांकि इस बार के चुनाव प्रचारों के दौरान ग्रीट वाइल्डर्स पहले की तुलना में काफी नरम नजर आ रहे हैं। उन्हें डर है कि अन्य पार्टियां उन्हें समर्थन देने से इनकार कर सकती है। ऐसे में यह 60 वर्षीय नेता संभल कर बयान दे रहा है।
बुधवार रात नतीजे आने के बाद वाइल्डर्स ने कहा कि वह अच्छी तरह से समझते हैं कि पार्टियां उस सरकार के साथ नहीं जाना चाहती हैं जो असंवैधानिक उपाय चाहती है। उन्होंने साफ कहा कि वे मस्जिदों, कुरानों और इस्लामिक स्कूलों के बारे में बात नहीं करने जा रहे हैं।
भले ही वाइल्डर्स सत्ता के बदले में यूरोपीय संघ के जनमत संग्रह की अपनी मांग छोड़ने को तैयार हैं मगर फिर भी उनकी जीत ने यूरोपीय संघ संस्थानों में सिहरन पैदा कर दी है।
पोलिटिको की रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि अन्य सेंटरविंग पार्टियां गीर्ट वाइल्डर्स को फिर से बाहर करने में एकजुट हो जाती हैं और इसमें कामयाब होती हैं तो बाद में नाराज मतदाता इन पार्टियों से भारी कीमत वसूल सकते हैं।
डच चुनाव में प्रवासन एक प्रमुख मुद्दा था। यूरोपीय संघ के राजनेताओं के लिए, यह एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। जैसे-जैसे प्रवासियों की संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे यूरोप के कई देशों में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों को समर्थन भी मिल रहा है।
पिछले साल इटली में जियोर्जिया मेलोनी ने अपने ब्रदर्स ऑफ इटली के लिए सत्ता हासिल की थी। फ्रांस में, मरीन ले पेन अभी भी एक ताकतवर स्थिति में हैं। चुनावों में वह लगातार 2 बार दूसरे स्थान पर रह चुकी हैं। जर्मनी में, अल्टरनेटिव फॉर डॉयचलैंड भी हाल के महीनों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
अपने विजय भाषण में वाइल्डर्स ने नीदरलैंड में आने वाली 'शरणार्थियों की सुनामी' से निपटने का वादा किया है। वाइल्डर्स ने कहा, "डच फिर से नंबर 1 होंगे।" "लोग अपना देश वापस चाहते हैं।"
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